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अब कागज़ी प्रस्तावों पर नहीं, जमीनी सत्यापन के बाद मंजूर होंगी पर्यटन परियोजनाएं: जयवीर सिंह

उत्तर प्रदेश में पर्यटन अवस्थापना सुविधाओं के लिए 575 परियोजनाओं को 1198.41 करोड़ रुपये स्वीकृत। पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह ने दिए जमीनी सत्यापन के सख्त निर्देश।
  • By Kanhwizz Times
  • Reported By: Admin
  • Updated: July 28, 2026

परियोजनाएं अब कागज पर प्रस्तावों के आधार पर मंजूर नहीं होंगी: जयवीर सिंह

लखनऊ। प्रदेश में पर्यटकों की बढ़ती संख्या को देखते हुए पर्यटन के अनुभव को और बेहतर करने के उद्देश्य से पर्यटन अवस्थापना सुविधाओं का सृजन और विकास किया जा रहा है। इसको दृष्टिगत रखते हुए वित्तीय वर्ष 2025-26 में राज्य सेक्टर के अंतर्गत प्रदेश के विभिन्न पर्यटन स्थलों पर अवस्थापना सुविधाओं के सृजन एवं विकास के लिए 1198.41 करोड़ रुपये की 575 परियोजनाएं स्वीकृत की गई हैं।

प्रमुख परियोजनाओं की सूची

इसके तहत जनपद आगरा में छत्रपति शिवाजी महाराज संग्रहालय की परियोजना का क्यूरेशन कार्य, जनपद लखनऊ में नवसेना शौर्य संग्रहालय का क्यूरेशन कार्य कराया जा रहा है। इसी प्रकार जनपद फर्रूखाबाद के संकिसा में, महोबा में प्लेनिटोरियम का कार्य, सीतापुर के नैमिषारण्य धाम में वेदारण्यम की स्थापना का कार्य, जनपद फिरोजाबाद के समौर बाबा धाम, करहरा हेतु पार्किंग पर्यटन सुविधा केन्द्र तथा अन्य पर्यटन सुविधाओं का सृजन किया जा रहा है।

इसी प्रकार बलिया में महर्षि भृगु आश्रम, जनपद बस्ती में भदेश्वर नाथ मन्दिर का पर्यटन विकास, बिजनौर में विदुर कुटी स्थल, कन्नौज में मेंहदी घाट, जनपद कासगंज के सोरों तीर्थ क्षेत्र में पवित्र कुण्ड स्थित घाट का पुर्नविकास एवं सौन्दर्यीकरण, जनपद मथुरा में परिक्रमा मार्ग, मेरठ में हस्तिनापुर का समेकित पर्यटन विकास तथा जनपद संतकबीरनगर में स्थित तामेश्वरनाथ मन्दिर का पर्यटन विकास कराया जा रहा है।

अब जमीनी सत्यापन के बाद ही मिलेगी मंजूरी

यह जानकारी सोमवार को प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने दी। उन्होंने बताया कि वित्तीय वर्ष 2026-27 की पर्यटन-संस्कृति विभाग की कार्ययोजना की प्रदेशव्यापी समीक्षा की जा रही है। उन्होंने विभागीय अधिकारियों एवं कार्यदायी संस्थाओं को साफ तौर से बता दिया है कि पर्यटन योजनाएं कागजों तक सीमित न रहें बल्कि उसे जमीन पर दिखना चाहिए। देर से चल रही परियोजनाओं को आगामी नवम्बर तक पूरा कराया जाएगा। इसी क्रम में वह उच्चाधिकारियों के साथ प्रदेश के सभी मण्डलों में समीक्षा बैठक करके परियोजनाओं की हकीकत परख रहे हैं। उन्होंने निर्देश दिए कि योजनाएं अब कागज पर प्रस्तावों के आधार पर मंजूर नहीं होंगी बल्कि हर परियोजना का पहले से जमीनी सत्यापन होगा। इसकी उपयोगिता और जनहित का आंकलन किया जाएगा।

12 मंडलों की हुई समीक्षा

उन्होंने बताया कि बरेली, मेरठ, सहारनपुर, आगरा, झांसी, कानपुर, गोरखपुर, वाराणसी, विंध्याचल, प्रयागराज, चित्रकूट, अलीगढ़ आदि मण्डलों की समीक्षा की गई। समीक्षा के दौरान उन्होंने निर्देश दिए कि योजनाओं की उपयोगिता और जनहित का आकलन किया जाए। इसके बाद योजनाओं की स्वीकृति दी जाएगी। इसका वास्तविक लाभ आम जनता को मिलना चाहिए। उन्होंने आगरा और अलीगढ़ मण्डल की समीक्षा करते हुए निर्देश दिए कि अब कोई भी परियोजना केवल प्रस्ताव के आधार पर स्वीकृत नहीं होगी बल्कि हर योजना को ठोस तथ्यों की कसौटी पर परखा जाएगा। प्रत्येक प्रस्ताव के साथ भूमि अभिलेख, स्थल के नवीनतम फोटोग्राफ, व्यावहारिक लागत का आकलन तथा ऐतिहासिक एवं धार्मिक महत्व के परिणाम अनिवार्य होंगे।

निर्माण की हर चरण में होगी निगरानी

पर्यटन मंत्री ने बताया कि परियोजनाओं के क्रियान्वयन में पूरी पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जाएगी। जनता का पैसा केवल उन योजनाओं पर खर्च होगा, जिसका असर जमीन पर साफतौर से देखा जा सके। निर्माण कार्य की हर चरण में निगरानी होगी। चयन से लेकर परियोजना पूरी होने तक जवाबदेही तय की जाएगी। विलम्बित परियोजनाओं को हरहाल में आगामी नवम्बर तक पूरा कराया जाएगा।

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