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शकुंतला मिश्रा विश्वविद्यालय: 13वें दीक्षांत में 156 पदक

डॉ. शकुन्तला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय के 13वें दीक्षांत समारोह में 156 पदक, 1919 उपाधियां प्रदान होंगी। 27 दिव्यांग विद्यार्थियों ने जीते 45 पदक।
  • By Kanhwizz Times
  • Reported By: Admin
  • Updated: July 28, 2026

156 पदकों से सजेगा डॉ. शकुन्तला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय का 13वां दीक्षांत समारोह

130 मेधावियों को मिलेंगे पदक, 27 दिव्यांग विद्यार्थियों ने जीते 45 पदक

लखनऊ, 27 जुलाई 2026। डॉ. शकुन्तला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय के 13वें दीक्षांत समारोह में इस वर्ष मेधावी विद्यार्थियों को कुल 156 पदक प्रदान किए जाएंगे। इनमें 76 स्वर्ण, 40 रजत और 40 कांस्य पदक शामिल हैं। प्रवक्ता प्रो. यशवंत वीरोदय ने बताया कि विश्वविद्यालय की ओर से अंतिम पदक सूची जारी कर दी गई है।

स्वर्ण, रजत व कांस्य पदकों का पूरा विवरण

76 स्वर्ण पदकों में 33 छात्राओं को 41 स्वर्ण पदक और 26 छात्रों को 35 स्वर्ण पदक दिए जाएंगे। कुल 57 विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक प्राप्त होंगे।

40 रजत पदकों में 23 छात्राओं को 24 रजत पदक और 13 छात्रों को 16 रजत पदक प्रदान किए जाएंगे। कुल 36 विद्यार्थियों को रजत पदक मिलेगा।

40 कांस्य पदकों में 23 छात्राओं को 26 कांस्य पदक तथा 14 छात्रों को 14 कांस्य पदक दिए जाएंगे। कुल 37 विद्यार्थियों को कांस्य पदक से सम्मानित किया जाएगा।

कुल मिलाकर 156 पदकों में 77 छात्राओं को 91 पदक और 53 छात्रों को 65 पदक प्रदान किए जाएंगे।

दिव्यांग विद्यार्थियों को मिले 45 पदक — विशेष उपलब्धि

कुलपति आचार्य संजय सिंह ने कहा कि दीक्षांत समारोह की एक विशेष उपलब्धि यह भी है कि 27 दिव्यांग विद्यार्थियों ने कुल 45 पदक अर्जित किए हैं। इनमें 13 दिव्यांग छात्राएं और 14 दिव्यांग छात्र शामिल हैं। इन विद्यार्थियों ने 22 स्वर्ण पदक प्राप्त किए हैं।

कुल 1,919 विद्यार्थियों को मिलेंगी उपाधियां

13वें दीक्षांत समारोह में विश्वविद्यालय की ओर से कुल 1,919 विद्यार्थियों को उपाधियां प्रदान की जाएंगी। इनमें 955 छात्राएं और 964 छात्र शामिल हैं। कुल उपाधियों में 17 शोध उपाधियां (पीएचडी) भी प्रदान की जाएंगी।

कुलपति का बयान

कुलपति आचार्य संजय सिंह ने कहा, "हमारे विद्यार्थियों की उपलब्धियां विश्वविद्यालय की गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, समावेशी वातावरण और उत्कृष्ट शैक्षणिक संस्कृति का प्रमाण हैं। विशेष रूप से दिव्यांग विद्यार्थियों का उत्कृष्ट प्रदर्शन यह दर्शाता है कि अवसर और संसाधन मिलने पर प्रतिभा किसी भी सीमा को स्वीकार नहीं करती। 13वां दीक्षांत समारोह हमारे सभी विद्यार्थियों के परिश्रम, अनुशासन और उपलब्धियों का उत्सव होगा।"

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