लखनऊ। सूचना प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और वैज्ञानिक अनुसंधान के दौर में देशभर के युवा अपनी सांस्कृतिक विरासत को भी नई ऊर्जा दे रहे हैं। इसी सोच के साथ टेक्नोक्रेट्स के समूह त्रिसामा आर्ट्स प्राचीन लेटे हुए हनुमान मंदिर में साप्ताहिक भक्ति राग सेवा में हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत के संरक्षण, संवर्धन और सांस्कृतिक पुनर्जागरण का एक अनूठा अभियान बनती जा रही है।
इस सप्ताह आयोजित राग सेवा में बेंगलुरु से आईं युवा हिंदुस्तानी शास्त्रीय गायिका एवं जैव-प्रौद्योगिकी (बायोटेक्नोलॉजी) शोधकर्ता लिपाली प्रियदर्शिनी ने अपनी प्रभावशाली प्रस्तुति से श्रद्धालुओं और संगीतप्रेमियों को भावविभोर कर दिया।
उन्होंने कार्यक्रम का शुभारंभ राग दरबारी में निबद्ध अद्धा ताल की गंभीर बंदिश "जो गुरु कृपा करें" से किया। इसके बाद तीनताल की मध्यलय बंदिश "दीनबंधु दया सिंधु सुनिए प्रभु मेरी" प्रस्तुत कर राग की गरिमा, गहराई और भाव-संपन्नता का उत्कृष्ट परिचय दिया। शास्त्रीय प्रस्तुति के बाद उन्होंने राग दरबारी पर आधारित लोकप्रिय भजन "तोरा मन दर्पण कहलाए" तथा गोस्वामी तुलसीदास रचित अमर भक्ति पद "ठुमक चलत रामचन्द्र" का भावपूर्ण गायन किया। कार्यक्रम का समापन सामूहिक नाम-संकीर्तन से हुआ, जिसमें उपस्थित श्रद्धालुओं ने भी उत्साहपूर्वक सहभागिता की। तबले पर आलोक मिश्रा तथा हारमोनियम पर आर्यन वर्मा ने सधे हुए अंदाज़ में संगत कर प्रस्तुति को और प्रभावशाली बनाया।
त्रिसामा आर्ट्स के संस्थापक इंजीनियर अभिषेक शर्मा ने बताया कि संस्था का उद्देश्य मंदिरों में प्रचलित भारतीय शास्त्रीय संगीत की प्राचीन परंपरा को पुनर्जीवित करना और संगीत को ईश्वर-सेवा का माध्यम बनाना है। उन्होंने कहा कि इस अभियान से देश के विभिन्न राज्यों के आईटी पेशेवर, इंजीनियर, वैज्ञानिक, शोधार्थी, विद्यार्थी तथा अन्य तकनीकी क्षेत्रों से जुड़े युवा स्वेच्छा से जुड़ रहे हैं। वे अपने व्यावसायिक जीवन के साथ भारतीय शास्त्रीय संगीत के अध्ययन, अभ्यास और प्रचार-प्रसार में भी सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।
उन्होंने बताया कि भक्ति राग सेवा में देशभर से प्रतिष्ठित और युवा कलाकार अपनी प्रस्तुतियां दे रहे हैं। यह पहल केवल एक संगीत कार्यक्रम नहीं, बल्कि आधुनिक तकनीकी पीढ़ी को भारतीय सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने वाला राष्ट्रीय सांस्कृतिक आंदोलन बनकर उभर रही है, जो नई पीढ़ी में शास्त्रीय संगीत के प्रति रुचि और श्रद्धा दोनों का विस्तार कर रही है।
