यूपी रेरा की अर्धवार्षिक रिपोर्ट 2026: राज्य के रियल एस्टेट क्षेत्र में लगातार मजबूत प्रगति
लखनऊ। उत्तर प्रदेश भू-संपदा विनियामक प्राधिकरण (यूपी रेरा) की वर्ष 2026 की अर्धवार्षिक रिपोर्ट राज्य के रियल एस्टेट क्षेत्र में लगातार हो रही मजबूत प्रगति को दर्शाती है। रिपोर्ट के अनुसार परियोजनाओं के पंजीकरण, आवासीय इकाइयों की संख्या, पूंजी निवेश तथा घर खरीदारों की शिकायतों के प्रभावी निस्तारण में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। इससे स्पष्ट होता है कि उत्तर प्रदेश देश के सबसे तेजी से विकसित हो रहे रियल एस्टेट बाजारों में अपनी मजबूत पहचान बना रहा है।
2026 की पहली छमाही में कहां-कितनी परियोजनाएं पंजीकृत हुईं
वर्ष 2026 के पहले छह महीनों में यूपी रेरा ने प्रदेश में 143 नई रियल एस्टेट परियोजनाओं का पंजीकरण किया। जिलावार आंकड़े इस प्रकार हैं:
| जिला | पंजीकृत परियोजनाएं |
|---|---|
| लखनऊ | 37 |
| गौतमबुद्ध नगर | 27 |
| गाजियाबाद | 19 |
| आगरा | 10 |
| मथुरा | 10 |
| वाराणसी | 7 |
| झांसी | 3 |
| बाराबंकी | 3 |
| बरेली | 3 |
| प्रयागराज | 3 |
इन परियोजनाओं के अंतर्गत 46,049 आवासीय इकाइयों के निर्माण का प्रस्ताव है, जिनमें लगभग ₹31,952 करोड़ का निवेश किया जाएगा।
एनसीआर से आगे बढ़ता यूपी का रियल एस्टेट बाजार
अब रियल एस्टेट विकास केवल एनसीआर या लखनऊ तक सीमित नहीं रह गया है। प्रदेश के अन्य शहर भी तेजी से नए रियल एस्टेट केंद्र के रूप में उभर रहे हैं। हालांकि निवेश और लक्ज़री आवासीय परियोजनाओं के मामले में गौतमबुद्ध नगर और गाजियाबाद अभी भी अग्रणी हैं। वहीं परियोजनाओं की संख्या के आधार पर लखनऊ एनसीआर के बाहर प्रदेश का सबसे प्रमुख रियल एस्टेट केंद्र बनकर उभरा है।
गौतमबुद्ध नगर में परियोजनाओं की संख्या भले ही कम हो, लेकिन वहां बड़े आकार की तथा लक्ज़री एवं सुपर लक्ज़री आवासीय परियोजनाएं विकसित की जा रही हैं, जिसके कारण निवेश और आवासीय इकाइयों की संख्या अधिक है। गाजियाबाद में भी यही रुझान देखने को मिलता है।
आवासीय इकाइयों की संख्या में लगातार वृद्धि
पिछले कुछ वर्षों में प्रस्तावित आवासीय इकाइयों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी देखी गई है:
| वर्ष | प्रस्तावित आवासीय इकाइयां |
|---|---|
| 2023 | 55,297 |
| 2024 | 69,365 |
| 2025 | 84,976 |
| 2026 (पहली छमाही) | 46,049 |
वर्ष 2025 में 2024 की तुलना में 15,611 अधिक इकाइयां प्रस्तावित हुईं, जो लगभग 22.5 प्रतिशत की वृद्धि है। वर्ष 2023 से 2025 के दौरान कुल 2,09,638 आवासीय इकाइयां प्रस्तावित हुईं, और 2026 की पहली छमाही के आंकड़े जोड़ने पर यह संख्या बढ़कर 2,55,687 हो गई है।
घर खरीदारों को मिली बड़ी राहत
यूपी रेरा के माध्यम से घर खरीदारों को ₹2,173 करोड़ से अधिक की राशि वापस मिली है। इसके अतिरिक्त रिकवरी प्रमाणपत्रों के आधार पर प्रमोटरों से हुए समझौतों के माध्यम से 1,801 आवंटियों को ₹550.50 करोड़ की राशि दिलाई गई। इस प्रकार रिकवरी प्रमाणपत्रों से संबंधित 8,212 मामलों में घर खरीदारों को कुल ₹2,173.78 करोड़ की राशि प्राप्त हुई है।
'रेरा संवाद' बना शिकायत निवारण का प्रभावी मंच
रेरा संवाद आज हितधारकों की समस्याओं के समाधान का एक प्रभावी डिजिटल मंच बन चुका है, जिसके माध्यम से लोग वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग द्वारा सीधे अपनी समस्याएं प्रस्तुत कर समयबद्ध समाधान प्राप्त कर सकते हैं। अब तक यूपी रेरा 206 रेरा संवाद कार्यक्रम आयोजित कर चुका है, जिनमें 5,375 मामलों का सफलतापूर्वक समाधान किया गया है।
'घर खरीदारों और निवेशकों का बढ़ता विश्वास' — अध्यक्ष संजय भूसरेड्डी
यूपी रेरा के अध्यक्ष संजय भूसरेड्डी ने कहा कि यह अर्धवार्षिक रिपोर्ट उत्तर प्रदेश के रियल एस्टेट क्षेत्र में घर खरीदारों और निवेशकों के बढ़ते विश्वास का प्रमाण है। परियोजनाओं के पंजीकरण, आवासीय इकाइयों की उपलब्धता और पूंजी निवेश में लगातार हो रही वृद्धि राज्य सरकार की विकासोन्मुखी नीतियों तथा यूपी रेरा की पारदर्शिता, जवाबदेही और समयबद्ध परियोजना क्रियान्वयन सुनिश्चित करने की प्रतिबद्धता का परिणाम है।
उन्होंने बताया कि यूपी रेरा का प्रयास नियामकीय अनुपालन को और सुदृढ़ करना, जिम्मेदार रियल एस्टेट विकास को बढ़ावा देना तथा एक पारदर्शी, उपभोक्ता-केंद्रित व्यवस्था विकसित करना है, जिससे उत्तर प्रदेश के रियल एस्टेट क्षेत्र का सतत विकास सुनिश्चित हो सके।
निष्कर्ष
यूपी रेरा की यह अर्धवार्षिक रिपोर्ट स्पष्ट रूप से दिखाती है कि उत्तर प्रदेश का रियल एस्टेट क्षेत्र न केवल तेजी से विस्तार कर रहा है, बल्कि उपभोक्ता संरक्षण और पारदर्शिता के मामले में भी लगातार मजबूत हो रहा है। बढ़ते निवेश, नई परियोजनाओं और घर खरीदारों की शिकायतों के त्वरित निस्तारण से प्रदेश देश के अग्रणी रियल एस्टेट गंतव्यों में शुमार हो रहा है।
