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रिसर्च और इनोवेशन को मजबूती देने के लिए ओपीपीआई ने एनआईपीईआर से मिलाया हाथ

अहम साझेदारी की घोषणा
  • By Kanhwizz Times
  • Reported By: Dhirendra Mishra
  • Updated: April 11, 2026

लखनऊ, कैनविज टाइम्स संवाददाता। ऑर्गेनाइजेशन ऑफ फार्मास्युटिकल प्रोड्यूसर्स ऑफ इंडिया (ओपीपीआई) ने नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मास्युटिकल एजुकेशन एंड रिसर्च, रायबरेली (एनआईपीईआर-आर) के साथ मिलकर भारत में फार्मास्युटिकल रिसर्च को बढ़ावा देने के लिए एक अहम साझेदारी की घोषणा की है। इस पहल के तहत ओपीपीआई, एनआईपीईआर-रायबरेली के तीसरे और चौथे वर्ष के दो मेधावी शोधार्थियों को गोल्ड और सिल्वर स्कॉलरशिप देगा। यह स्कॉलरशिप रिसर्च ग्रांट के रूप में दी जाएगी, जिससे ऐसे प्रोजेक्ट्स को समर्थन मिलेगा जो वास्तविक स्वास्थ्य समस्याओं के समाधान की क्षमता रखते हैं। शोधार्थियों का चयन विशेषज्ञों की एक समिति करेगी, जो रिसर्च की गुणवत्ता, उपयोगिता और उसके व्यावहारिक प्रभाव के आधार पर मूल्यांकन करेगी। इस पहल का उद्देश्य न सिर्फ वैज्ञानिक उत्कृष्टता को बढ़ावा देना है, बल्कि ऐसे शोध को प्रोत्साहित करना भी है जो मरीजों की देखभाल और हेल्थकेयर इनोवेशन में योगदान दे सके। यह साझेदारी इंडस्ट्री और अकादमिक जगत के बीच बढ़ते सहयोग को भी दर्शाती है, जो एक मजबूत और भविष्य के लिए तैयार फार्मा इकोसिस्टम बनाने में अहम भूमिका निभा रहा है। इस पहल के तहत ओपीपीआई ‘प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस’ मॉडल को आगे बढ़ाने में सहयोग करेगा। इसके जरिए उसकी सदस्य कंपनियों के अनुभवी प्रोफेशनल सीधे एनआईपीईआर रायबरेली के छात्रों और शोधकर्ताओं से जुड़ सकेंगे। इस पहल के माध्‍यम से ओपीपीआई से जुड़े विशेषज्ञ छात्रों के लिए सेशन, वर्कशॉप और मेंटरशिप कार्यक्रम आयोजित करेंगे, जिससे उन्हें व्यावहारिक अनुभव और इंडस्ट्री की समझ मिलेगी। इससे पढ़ाई और इंडस्ट्री की जरूरतों के बीच का अंतर कम होगा और छात्र अपनी वैज्ञानिक खोजों को व्यावहारिक और उपयोगी स्वास्थ्य समाधान में बदलने के लिए बेहतर तरीके से तैयार हो सकेंगे। ओपीपीआई के डायरेक्टर जनरल अनिल मताई ने कहा कि भारत फार्मा इनोवेशन के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर आगे बढ़ने के एक अहम मोड़ पर खड़ा है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए सिर्फ ढांचे में नहीं, बल्कि नए विचारों और उन्हें आगे बढ़ाने वाली युवा प्रतिभाओं में निवेश करना जरूरी है। एनआईपीईआर रायबरेली के साथ हमारी साझेदारी इस सोच पर आधारित है कि रिसर्च सिर्फ पढ़ाई तक सीमित न रहे, बल्कि उससे सीधे लोगों के स्वास्थ्य पर सकारात्मक असर दिखे। इन स्कॉलरशिप्स के जरिए हम उभरते शोधकर्ताओं को प्रोत्साहित करना चाहते हैं, ताकि वे नए समाधान विकसित कर सकें जो भारत ही नहीं, बल्कि दुनिया भर में मरीजों के जीवन में बदलाव ला सकें। यह पहल सरकार के उस प्रयास के अनुरूप भी है, जिसमें फार्मा शिक्षा और रिसर्च को मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है। देश में नए एनआईपीईआर संस्थान खोलने और मौजूदा संस्थानों को बेहतर बनाने की दिशा में काम किया जा रहा है। ओपीपीआई पहले से ही अपने सदस्य संगठनों के जरिए देशभर के एनआईपीईआर संस्थानों के साथ मिलकर रिसर्च और प्रतिभा विकास को बढ़ावा देता रहा है। एनआईपीईआर-रायबरेली की डायरेक्टर शुभिनी सराफ ने कहा कि हमारे संस्थान में हम ऐसी वैज्ञानिक प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध हैं, जो स्वास्थ्य क्षेत्र में सार्थक बदलाव ला सकें। ओपीपीआई के साथ यह साझेदारी पढ़ाई और इंडस्ट्री के बीच संबंध को और मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम है। मेधावी छात्रों को सहयोग देने और इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स से सीधेजुड़ने का मौका मिलने से हमारे यहां होने वाले रिसर्च की गुणवत्ता, उपयोगिता और प्रभाव और बेहतर होगा। हमारा मानना है कि इस तरह की साझेदारियां भविष्य के शोधकर्ताओं को तैयार करने में बेहद जरूरी हैं, ताकि वे भारत और दुनिया की बदलती स्वास्थ्य चुनौतियों का समाधाननिकाल सकें।

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