लगभग 200 उद्योग प्रतिनिधियों, रेलवे अधिकारियों, MSME और स्टार्टअप्स ने लिया हिस्सा, 'मेक इन इंडिया' और 'आत्मनिर्भर भारत' को मिलेगा बढ़ावा
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लखनऊ। भारतीय रेल की ट्रैक्शन डिस्ट्रीब्यूशन (TrD) अवसंरचना को आधुनिक, सुरक्षित और पूरी तरह स्वदेशी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए अनुसंधान अभिकल्प एवं मानक संगठन (RDSO), लखनऊ के भगवान बिरसा मुंडा सभागार में शुक्रवार को "भारतीय रेल की ट्रैक्शन डिस्ट्रीब्यूशन (TrD) अवसंरचना का आधुनिकीकरण एवं स्वदेशीकरण" विषय पर राष्ट्रीय विक्रेता सम्मेलन का आयोजन किया गया।
महानिदेशक प्रभास दनसाना के नेतृत्व में आयोजित इस सम्मेलन में देशभर से लगभग 200 विक्रेताओं के साथ भारतीय रेल, रेलवे बोर्ड, डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (DFCCIL), दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC), नेशनल कैपिटल रीजन ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन (NCRTC), विभिन्न सार्वजनिक उपक्रमों, उद्योग जगत, MSME, स्टार्टअप्स तथा प्रमुख निर्माताओं के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया।
सम्मेलन के दौरान RDSO के विशेषज्ञों और उद्योग जगत के प्रतिनिधियों के बीच ट्रैक्शन डिस्ट्रीब्यूशन अवसंरचना में नवीनतम तकनीकी विकास, स्वदेशी विनिर्माण क्षमता, भविष्य की तकनीकी आवश्यकताओं तथा आधुनिकीकरण की रणनीतियों पर विस्तृत चर्चा हुई। बैठक का मुख्य उद्देश्य रेलवे नेटवर्क की विश्वसनीयता, सुरक्षा, गुणवत्ता और सतत विकास को मजबूत करना तथा स्वदेशी तकनीकों के माध्यम से 'मेक इन India' और 'आत्मनिर्भर भारत' अभियान को गति देना रहा।
तकनीकी सत्रों में ओवरहेड इक्विपमेंट (OHE) और ट्रैक्शन डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम में नवीनतम तकनीकों, नए उत्पादों की आवश्यकता, विक्रेता अनुमोदन प्रक्रिया, गुणवत्ता मानकों, मानकीकरण, डिजिटल मॉनिटरिंग सिस्टम और नवाचार के नए अवसरों पर विस्तार से जानकारी साझा की गई। साथ ही टीआई निदेशालय के अंतर्गत आने वाली महत्वपूर्ण सामग्रियों के लिए विक्रेता आधार का विस्तार करने और उन्नत स्वदेशी उत्पादों के विकास को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया गया।
रेलवे बोर्ड, DFCCIL, DMRC और NCRTC के वरिष्ठ अधिकारियों ने अपने अनुभव साझा करते हुए भविष्य की परियोजनाओं, उद्योग की भूमिका और आधुनिक एवं विश्वस्तरीय रेल अवसंरचना के निर्माण में आपसी सहयोग की आवश्यकता पर बल दिया। इस अवसर पर रेलवे बोर्ड के कार्यकारी निदेशक (गति शक्ति) गजेन्द्र ने भी ट्रैक्शन डिस्ट्रीब्यूशन अवसंरचना के आधुनिकीकरण और स्वदेशीकरण को भारतीय रेल के भविष्य के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बताया।
उद्योग प्रतिनिधियों ने सम्मेलन में तकनीकी विषयों पर खुली चर्चा, विक्रेता अनुमोदन प्रक्रिया से जुड़े सवालों के समाधान और नवाचार को प्रोत्साहित करने के लिए RDSO की पहल की सराहना की। संवादात्मक सत्रों के माध्यम से RDSO और उद्योग जगत के बीच सहयोग को नई मजबूती मिली, जिससे रेलवे तकनीकों के स्वदेशीकरण और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को आगे बढ़ाने का मार्ग और अधिक सशक्त होगा।
