कैनविज टाइम्स,डिजिटल डेस्क। लोकसभा में वक्फ संशोधन बिल पर चर्चा के दौरान शिवसेना के सांसद अरविंद सावंत ने अपनी कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने कहा कि इस बिल में "कथनी और करनी" में बहुत अंतर है और यह बिल वक्फ बोर्डों के लिए न्याय सुनिश्चित नहीं कर पाएगा। उन्होंने सरकार पर आरोप लगाया कि यह विधेयक एक अच्छे उद्देश्य से नहीं बल्कि कुछ राजनीतिक एजेंडों को आगे बढ़ाने के लिए लाया गया है।
अरविंद सावंत ने कहा, "इस बिल का उद्देश्य वक्फ संपत्तियों के संचालन और प्रशासन को अधिक प्रभावी और पारदर्शी बनाना है, लेकिन इस विधेयक में लागू की गई नई प्रावधानों से यह पूरा उद्देश्य पूरा होता नहीं दिख रहा है।" उन्होंने आगे कहा कि वक्फ संपत्तियों का सही तरीके से उपयोग और इनकी देखरेख जरूरी है, लेकिन जो कदम उठाए जा रहे हैं, वे सही दिशा में नहीं हैं।
सावंत ने विधेयक में किए गए संशोधनों पर सवाल उठाया और कहा कि सरकार यह दावा कर रही है कि वक्फ बोर्ड को स्वतंत्रता दी जाएगी, लेकिन वास्तव में यह कदम वक्फ बोर्डों की स्वतंत्रता को सीमित करने वाला साबित हो सकता है। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि इस बिल के लागू होने से वक्फ संपत्तियों पर नियंत्रण और अधिक केंद्रीकरण की ओर बढ़ सकता है, जिससे समुदायों को कोई फायदा नहीं होगा। इससे पहले, इस बिल पर चर्चा में अन्य सांसदों ने भी अपनी आपत्तियां व्यक्त की थीं और वक्फ बोर्ड की संरचना में सुधार की आवश्यकता जताई थी। कुछ सांसदों ने सरकार से वक्फ बोर्डों की स्वतंत्रता और अधिकारों का सम्मान करने की मांग की थी, ताकि इन बोर्डों के माध्यम से मुस्लिम समुदाय के कल्याण के लिए काम किया जा सके।
वक्फ संशोधन बिल का उद्देश्य वक्फ संपत्तियों के प्रशासन में पारदर्शिता और अधिक दक्षता लाना है, लेकिन विपक्षी दलों का कहना है कि इस विधेयक में संशोधन से वास्तविक न्याय और पारदर्शिता की बजाय केंद्रीकरण और सरकारी हस्तक्षेप बढ़ सकता है।
अरविंद सावंत के इस बयान से यह स्पष्ट होता है कि इस बिल को लेकर राजनीतिक असहमति जारी है, और कई विपक्षी दलों का मानना है कि यह विधेयक वक्फ बोर्डों को पूरी स्वतंत्रता और न्याय नहीं देगा।