आज समाज में एक चिंताजनक बदलाव देखने को मिल रहा है—घर सूने हो रहे हैं और वृद्धाश्रमों की संख्या बढ़ रही है। यह दृश्य न केवल हृदय विदारक है, बल्कि हमारी गिरती सामाजिक संवेदनाओं का प्रतीक भी है। आखिर क्यों हम उन माता-पिता से दूर हो रहे हैं, जिन्होंने हमें उंगली पकड़कर चलना सिखाया?
सनातन संस्कृति में माता-पिता और गुरु को साक्षात ईश्वर का दर्जा दिया गया है। वृद्धजनों का सम्मान करना केवल एक संस्कार नहीं, बल्कि हमारी सभ्यता और गौरवशाली विरासत की पहचान है। जो समाज अपने बुजुर्गों की नींव पर खड़ा है, वह उनका अनादर करके कभी उन्नति नहीं कर सकता।
सरकार की संवेदनशील पहल
वृद्धजनों और निराश्रित महिलाओं के सम्मानपूर्ण जीवन और स्वावलंबन के लिए प्रदेश सरकार ने ₹1,500 प्रति माह पेंशन देने का सराहनीय निर्णय लिया है। यह आर्थिक सहयोग उनके प्रति हमारे सामाजिक दायित्व की एक छोटी सी कोशिश है।
स्वस्थ वृद्धावस्था और योग
इस वर्ष 21 जून को 'अंतरराष्ट्रीय योग दिवस' की थीम 'स्वस्थ वृद्धावस्था के लिए योग' (Yoga for Healthy Aging) है। शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए योग को अपने जीवन का अभिन्न हिस्सा बनाएं। एक स्वस्थ शरीर ही बुजुर्गों को आत्मनिर्भर बनाए रखने में सहायक होगा।
आइए, आज संकल्प लें कि हम अपने घर के 'बुजुर्गों' को केवल सुविधा नहीं, बल्कि 'सम्मान' और 'समय' देंगे।
