लखनऊ। पाकिस्तान में लगभग 125 वर्ष पुराने एक ऐतिहासिक गुरुद्वारा साहिब को कथित रूप से ध्वस्त किए जाने के दावे पर सिक्खी मेरी पहचान फाउंडेशन ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। संगठन के अध्यक्ष सरदार दिलप्रीत सिंह डी.पी. ने इस घटना की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की है।

दिलप्रीत सिंह डी.पी. ने जारी बयान में कहा कि धार्मिक और ऐतिहासिक धरोहरें केवल किसी एक समुदाय की नहीं, बल्कि पूरी मानवता की साझा विरासत होती हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे पवित्र स्थलों को नुकसान पहुंचाने की घटनाएं धार्मिक भावनाओं के साथ-साथ सांस्कृतिक विरासत को भी आहत करती हैं।
उन्होंने भारत और पाकिस्तान की सरकारों से आग्रह किया कि पूरे मामले की पारदर्शी एवं समयबद्ध जांच कराई जाए। यदि जांच में किसी व्यक्ति या संस्था की संलिप्तता सामने आती है तो उसके विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए। साथ ही, संबंधित ऐतिहासिक गुरुद्वारा साहिब का सम्मानपूर्वक पुनर्निर्माण कर उसकी ऐतिहासिक पहचान को सुरक्षित रखा जाए।
संगठन ने कहा कि विश्वभर में धार्मिक एवं ऐतिहासिक स्थलों की सुरक्षा सुनिश्चित करना सभी सरकारों की जिम्मेदारी है। भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाने चाहिए।
फाउंडेशन ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय, मानवाधिकार संगठनों और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के लिए कार्यरत संस्थाओं से भी इस मामले का संज्ञान लेने और धार्मिक धरोहरों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में पहल करने की अपील की।
