लखनऊ, कैनविज टाइम्स संवाददाता। प्रदेश में कक्षा एक और दो के बच्चों की पढ़ाई को अधिक प्रभावी और गुणवत्तापूर्ण बनाने की दिशा में मंगलवार को टीचिंग एंड लर्निंग प्रैक्टिसेज सर्वे (TLPS)-2025 रिपोर्ट जारी की गई। इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित कार्यक्रम में लैंग्वेज एंड लर्निंग फाउंडेशन (LLF) ने टाटा ट्रस्ट और बेसिक शिक्षा विभाग के सहयोग से रिपोर्ट का विमोचन किया। रिपोर्ट में कक्षा-कक्ष की शिक्षण व्यवस्था का विश्लेषण करते हुए शिक्षण गुणवत्ता सुधार के लिए 10 प्रमुख सिफारिशें दी गई हैं। कार्यक्रम में अपर मुख्य सचिव बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा पार्थसारथी सेन शर्मा, महानिदेशक स्कूल शिक्षा मोनिका रानी, एससीईआरटी निदेशक गणेश कुमार, समग्र शिक्षा के अधिकारी, टाटा ट्रस्ट, एलएलएफ, डायट के प्रतिनिधि, जिला शिक्षा अधिकारी और शिक्षक मौजूद रहे। रिपोर्ट के अनुसार नवंबर 2024 से मार्च 2025 के बीच बहराइच, बरेली, मिर्जापुर और रायबरेली के 200 विद्यालयों की 200 कक्षाओं का अध्ययन किया गया। सर्वे में कक्षा का वातावरण, पाठ संचालन, भाषा एवं गणित शिक्षण, समय प्रबंधन और शिक्षक दृष्टिकोण सहित छह प्रमुख बिंदुओं का मूल्यांकन किया गया। रिपोर्ट में सामने आया कि 97 प्रतिशत कक्षाओं में कार्यशील श्यामपट्ट उपलब्ध हैं, 97 प्रतिशत शिक्षक एफएलएन (FLN) लक्ष्यों से परिचित हैं, 94 प्रतिशत शिक्षकों को क्लस्टर एवं ब्लॉक संसाधन समन्वयकों से शैक्षणिक सहयोग मिल रहा है, जबकि 78 प्रतिशत शिक्षक बच्चों के आकलन का लिखित रिकॉर्ड रखते हैं। हालांकि रिपोर्ट में समावेशी शिक्षण, बेहतर पाठ योजना, प्रभावी प्रतिपुष्टि, बच्चों की सक्रिय भागीदारी, भाषा और गणित शिक्षण को अधिक संवादात्मक बनाने तथा शिक्षकों के सतत व्यावसायिक विकास को और मजबूत करने की आवश्यकता भी बताई गई है। अपर मुख्य सचिव पार्थसारथी सेन शर्मा ने कहा कि विद्यालयों में सकारात्मक और सुरक्षित वातावरण बनाते हुए बच्चों को नियमित पठन-पाठन और लेखन के पर्याप्त अवसर दिए जाएं। उन्होंने निर्देश दिए कि रिपोर्ट की 10 प्रमुख सिफारिशों पर सभी शिक्षक क्लस्टर बैठकों में अनिवार्य रूप से चर्चा कर विद्यालय स्तर पर कार्ययोजना तैयार की जाए। महानिदेशक स्कूल शिक्षा मोनिका रानी ने कहा कि शिक्षक और विद्यार्थियों के बीच आत्मीय संबंध मजबूत होने चाहिए तथा स्कूलों को समुदाय से जोड़ने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि यदि शिक्षक संकल्प लेकर कार्य करें तो बच्चों के सीखने में उल्लेखनीय बदलाव संभव है। एससीईआरटी निदेशक गणेश कुमार ने अभ्यास आधारित और खेल-खेल में सीखने वाली शिक्षा पर जोर दिया। वहीं टाटा ट्रस्ट की ज्योत्सना और एलएलएफ के संस्थापक एवं कार्यकारी निदेशक डॉ. धीर झिंगरन ने कहा कि प्रत्येक कक्षा में गुणवत्तापूर्ण, सहभागी और बाल-केंद्रित शिक्षण से ही बच्चों के सीखने में स्थायी सुधार संभव है।
