बड़े मंगल का विशेष महत्व और इतिहास
लखनऊ के बड़े मंगल का इतिहास सदियों पुराना है। मान्यता है कि नवाब वाजिद अली शाह और उनकी बेगम की मन्नत पूरी होने के बाद अलीगंज के ऐतिहासिक हनुमान मंदिर का जीर्णोद्धार कराया गया था। तभी से यह परंपरा शुरू हुई जो आज एक महा-उत्सव का रूप ले चुकी है। इस दिन जाति, धर्म और ऊंच-नीच की दीवारें ढह जाती हैं और हर कोई हनुमान जी की भक्ति के रंग में सराबोर नजर आता है।
भक्ति और सेवा का अनूठा संगम: भंडारे की महिमा
आज ६वें बड़े मंगल पर सुबह से ही मंदिरों में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ रही है। बजरंगबली का भव्य श्रृंगार किया गया है और हनुमान चालीसा, सुंदरकांड के पाठ से पूरा माहौल भक्तिमय हो गया है।
इस पर्व की सबसे खूबसूरत बात है यहाँ लगने वाले भंडारे। भीषण गर्मी के बीच जगह-जगह पर प्याऊ और भंडारों का आयोजन किया गया है। राहगीरों को ठंडा पानी, शर्बत, पूड़ी-सब्जी, बूंदी और हलवे का प्रसाद बेहद आदर के साथ खिलाया जा रहा है। अमीर हो या गरीब, हर कोई एक ही कतार में बैठकर महाप्रसाद ग्रहण कर रहा है। यह दृश्य हमें सिखाता है कि निस्वार्थ सेवा ही सच्ची मानवता और सबसे बड़ी पूजा है।
संकटमोचन से हमारी प्रार्थना
बजरंगबली को कलयुग का जाग्रत देवता माना जाता है। वे भक्तों के सभी कष्टों को पल भर में हर लेते हैं। आज के इस पावन दिन पर हमारी यही प्रार्थना है कि प्रभु हनुमान जी आपके जीवन से सभी संकटों, विघ्न-बाधाओं और नकारात्मक ऊर्जा का नाश करें। आपके परिवार में सुख, शांति, समृद्धि और उत्तम स्वास्थ्य का वास हो।
आइए, आज के दिन हम भी अपने भीतर छिपे अहंकार और द्वेष को मिटाकर समाज में प्रेम, करुणा और सेवा की भावना का विस्तार करने का संकल्प लें।
एक बार फिर आप सभी को कैनविज टाइम्स परिवार की ओर से ६वें बड़े मंगल की मंगलमय शुभकामनाएं।
कवन सो काज कठिन जग माहीं, जो नहिं होइ तात तुम्ह पाहीं।
