जयवीर सिंह: उत्तर प्रदेश लिख रहा गुरु परंपरा संरक्षण का नया अध्याय
गुरुओं की तपोभूमि को संवार रही योगी सरकार, पर्यटन परियोजनाओं से मिल रही 'गुरु दक्षिणा'
मुख्य बिंदु (Highlights)
- गुरु गोरखनाथ, संत रविदास और देवरहा बाबा के तीर्थों का पर्यटन विकास
- श्रृंगी ऋषि, मयन ऋषि, ज्वाला ऋषि से वेदव्यास और दुर्वासा आश्रम तक निर्माण कार्य
- 2019-20 से 2025-26 के बीच करोड़ों रुपए की परियोजनाएं स्वीकृत
लखनऊ। गुरु पूर्णिमा भारतीय संस्कृति में गुरु के प्रति श्रद्धा और ज्ञान परंपरा के सम्मान का पर्व है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार आध्यात्मिक पर्यटन के ज़रिए गुरु परंपरा से जुड़े मंदिरों, आश्रमों और तपोस्थलियों को नए सिरे से संवार रही है।
सनातन परंपरा में यह पर्व 'व्यास पूर्णिमा' के नाम से जाना जाता है, तो बौद्ध परंपरा में यह भगवान बुद्ध के प्रथम उपदेश का स्मृति-दिवस है। जैन परंपरा इसे गौतम स्वामी की ज्ञान-दीक्षा से जोड़ती है, जबकि सिख परंपरा में गुरु-वाणी सर्वोपरि मानी गई है।
उत्तर प्रदेश: ऋषियों और संतों की भूमि
महर्षि वाल्मीकि, वेदव्यास, याज्ञवल्क्य, संत कबीर, रविदास, तुलसीदास और गुरु गोरक्षनाथ — इन सभी विभूतियों ने उत्तर प्रदेश की धरती से भारतीय संस्कृति को दिशा दी। इसी विरासत को संजोने के लिए सरकार ने कई परियोजनाओं को मूर्त रूप दिया है।
प्रमुख परियोजनाएं एक नज़र में
| स्थल | जनपद | स्वीकृत राशि |
|---|---|---|
| गुरु गोरखनाथ कांस्य प्रतिमा (51 फीट) | महोबा | 11.25 करोड़ |
| गुरु गोरखनाथ योग मुद्रा प्रतिमा | अमेठी (जायस) | 5.95 करोड़ |
| सीर गोवर्धन धाम पुनर्विकास | वाराणसी | 51.54 करोड़ |
| देवरहा बाबा आश्रम | देवरिया | 2.50 करोड़ |
| गुरु तेग बहादुर गुरुद्वारा | हापुड़ (गढ़मुक्तेश्वर) | 3.63 करोड़ |
| शुकतीर्थ रविदास मंदिर | मुजफ्फरनगर | 2.30 करोड़ |
| सीर गोवर्धन पार्क विकास | वाराणसी | 2.60 करोड़ |
ऋषि आश्रमों का सौंदर्यीकरण
- श्रृंगी ऋषि तपोभूमि — फर्रुखाबाद
- मयन ऋषि आश्रम — मैनपुरी
- ज्वाला ऋषि मंदिर — जेवर
- गुरु प्रहलाद दास तपोस्थली — सहारनपुर
- उदासीन ऋषि आश्रम — गोरखपुर
- वेदव्यास जन्मस्थली — बांदा
- दुर्वासा ऋषि आश्रम — आजमगढ़
- महर्षि दयानंद गुरुकुल — बुलंदशहर
- अष्टावक्र ऋषि आश्रम — गोंडा
- च्यवन ऋषि आश्रम — कन्नौज
मंत्री जयवीर सिंह का बयान
उत्तर प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह के अनुसार, गुरु पूर्णिमा गुरु परंपरा और भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों के प्रति कृतज्ञता प्रकट करने का पावन अवसर है। सरकार का लक्ष्य है कि नई पीढ़ी अपनी आध्यात्मिक विरासत से जुड़े, श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं मिलें, स्थानीय हस्तशिल्प को बढ़ावा मिले और रोजगार के नए अवसर बनें।
