- कई संस्थानों में नहीं हैं पर्याप्त अग्निशमन उपकरण,इमरजेंसी एग्जिट का भी अभाव,मानकों के अनुपालन पर उठे सवाल
बख्शी का तालाब,लखनऊ। राजधानी के बख्शी का तालाब(बीकेटी), इटौंजा और सैरपुर क्षेत्र में संचालित निजी अस्पतालों और छात्र-छात्राओं के हॉस्टलों की अग्नि सुरक्षा व्यवस्था गंभीर सवालों के घेरे में है। क्षेत्र में संचालित कई संस्थानों में फायर सेफ्टी मानकों की अनदेखी किए जाने के आरोप हैं, जिससे मरीजों, छात्रों और कर्मचारियों की सुरक्षा पर खतरा मंडरा रहा है।
स्थानीय लोगों और सूत्रों के अनुसार, क्षेत्र के कई निजी अस्पतालों और हॉस्टलों में पर्याप्त अग्निशमन उपकरण उपलब्ध नहीं हैं। कई संस्थानों में फायर अलार्म, स्मोक डिटेक्टर और हाइड्रेंट सिस्टम जैसी आवश्यक व्यवस्थाएं या तो नदारद हैं या फिर केवल औपचारिकता तक सीमित हैं। इसके अलावा, अधिकांश भवनों में आपात स्थिति के दौरान सुरक्षित निकासी के लिए समुचित इमरजेंसी एग्जिट की व्यवस्था भी नहीं है।बताया जा रहा है कि कई अस्पताल और हॉस्टल संकरी गलियों, सीमित प्रवेश-निकास मार्गों और संकरी सीढ़ियों वाले भवनों में संचालित हो रहे हैं। ऐसे में आग लगने जैसी आपदा की स्थिति में बड़े हादसे की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।सूत्रों का यह भी दावा है कि क्षेत्र के कुछ अस्पतालों और हॉस्टलों के भवनों के नक्शे संबंधित प्राधिकरण से स्वीकृत नहीं हैं। ऐसे में भवनों की वैधता और निर्धारित मानकों के अनुपालन को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं।
बीते चंद दिनों पहले राजधानी के अलीगंज क्षेत्र में संचालित कोचिंग सेंटर में आग लगाने से 15 छात्र छात्राओं की जान चली गई।इसके बावजूद बीकेटी, इटौंजा और सैरपुर क्षेत्र में सुरक्षा मानकों की अनदेखी जारी रहने से स्थानीय लोगों में चिंता बढ़ रही है।अग्निशमन विशेषज्ञों का कहना है कि अस्पतालों और हॉस्टलों जैसे संवेदनशील संस्थानों में फायर अलार्म, स्मोक डिटेक्टर, अग्निशमन यंत्र, हाइड्रेंट सिस्टम, स्पष्ट इमरजेंसी एग्जिट और नियमित फायर ऑडिट अनिवार्य रूप से होना चाहिए। साथ ही भवनों का संबंधित प्राधिकरण से स्वीकृत होना भी आवश्यक है।क्षेत्रीय नागरिकों ने जिला प्रशासन, अग्निशमन विभाग और संबंधित प्राधिकरणों से बीकेटी, इटौंजा और सैरपुर क्षेत्र में संचालित अस्पतालों व हॉस्टलों की व्यापक जांच कराए जाने तथा मानकों का उल्लंघन करने वाले संस्थानों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई किए जाने की मांग की है, ताकि भविष्य में किसी बड़े हादसे से बचा जा सके।
