उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत को मिली नई पहचान, ₹119.47 करोड़ की 21 विकास परियोजनाएं पूरी
लखनऊ, 13 जुलाई 2026। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और विकास को नई गति मिली है। संस्कृति विभाग द्वारा प्रदेश के विभिन्न जनपदों में लगभग ₹119.47 करोड़ की लागत से 21 प्रमुख सांस्कृतिक विकास परियोजनाएं पूरी कर ली गई हैं। इन परियोजनाओं में रामलीला स्थलों का कायाकल्प, सांस्कृतिक केंद्रों का निर्माण, संग्रहालयों का आधुनिकीकरण, स्मारकों का विकास, संगीत महाविद्यालय और नाट्य संस्थानों के उन्नयन जैसे महत्वपूर्ण कार्य शामिल हैं। विभाग के अनुसार इन परियोजनाओं का जल्द ही लोकार्पण किया जाएगा।
प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान को मिल रही नई मजबूती
प्रदेश के संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि इन विकास कार्यों का उद्देश्य उत्तर प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करते हुए आधुनिक सुविधाओं से जोड़ना है। इससे न केवल प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान मजबूत होगी, बल्कि धार्मिक एवं सांस्कृतिक पर्यटन को भी नई गति मिलेगी।
उन्होंने बताया कि विभाग की अद्यतन प्रगति रिपोर्ट के अनुसार मैनपुरी, गोरखपुर, बांदा, फिरोजाबाद, हरदोई, कुशीनगर, प्रतापगढ़, अलीगढ़, बलिया सहित कई जिलों में सार्वजनिक रामलीला स्थलों का सौंदर्यीकरण, बाउंड्री वॉल, मंच, प्रवेश द्वार, शेड, छाया कुंज तथा अन्य आधारभूत सुविधाओं का निर्माण पूरा हो चुका है।
सांस्कृतिक अधोसंरचना को मिला नया आयाम
संस्कृति विभाग ने प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं को भी पूरा किया है। इनमें—
चित्रकूट में महर्षि वाल्मीकि सांस्कृतिक केंद्र
आजमगढ़ के हरिहरपुर में संगीत महाविद्यालय
लखनऊ में डॉ. भीमराव आंबेडकर स्मारक एवं सांस्कृतिक केंद्र तथा संग्रहालय के आंतरिक विकास कार्य
भारतेन्दु नाट्य अकादमी का नवीनीकरण एवं इंटीरियर
शाहजहांपुर के स्वतंत्रता संग्राम संग्रहालय में फसाड लाइटिंग और म्यूजिकल फाउंटेन
फतेहपुर में शहीद त्रिदेव प्रसाद स्मारक का निर्माण
जैसी प्रमुख परियोजनाएं शामिल हैं।
विरासत संरक्षण के साथ आधुनिक सुविधाओं का समन्वय
प्रदेश सरकार ने सांस्कृतिक और ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण के साथ आधुनिक सुविधाओं का भी समावेश किया है। कन्नौज में अंतरराष्ट्रीय रोमा समुदाय को समर्पित स्मारक एवं मुक्ताकाशी मंच का निर्माण पूरा हो चुका है और इसके हस्तांतरण की प्रक्रिया जारी है।
वहीं बलिया के रसड़ा स्थित नाथ बाबा मेला मैदान में रिटेनिंग वॉल, प्रकाश व्यवस्था और अन्य विकास कार्य पूरे किए जा चुके हैं, जिससे धार्मिक एवं सांस्कृतिक आयोजनों के लिए बेहतर सुविधाएं उपलब्ध होंगी।
रामलीला स्थलों का हुआ व्यापक विकास
प्रदेश के अनेक जनपदों में रामलीला मैदानों का व्यापक विकास किया गया है। मैनपुरी के कुसमरा, कुरावली और भोगांव, गोरखपुर के तरकुलही, बांदा के अलीगंज, फिरोजाबाद के खेरिया और नौशहरा, हरदोई के संडीला, कुशीनगर, प्रतापगढ़ और अलीगढ़ सहित कई स्थानों पर रामलीला स्थलों का आधुनिकीकरण किया गया है।
इन स्थलों पर बाउंड्री वॉल, मंच, प्रवेश द्वार, शेड और अन्य आवश्यक सुविधाएं विकसित होने से धार्मिक आयोजनों के संचालन में सुविधा मिलेगी और स्थानीय पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा।
पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिलेगा लाभ
संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह ने कहा कि अधिकांश परियोजनाएं निर्धारित समयसीमा के भीतर पूरी कर ली गई हैं। इन परियोजनाओं से उत्तर प्रदेश की ऐतिहासिक, धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहरों को आधुनिक स्वरूप मिलेगा। साथ ही सांस्कृतिक पर्यटन को बढ़ावा मिलने से स्थानीय स्तर पर रोजगार एवं स्वरोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण, पर्यटन विकास और आधुनिक अधोसंरचना के समन्वित विकास के लिए लगातार कार्य कर रही है, ताकि आने वाली पीढ़ियां भी उत्तर प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर से जुड़ सकें।
