वैश्विक ऊर्जा संकट से निपटने को यूपी के हर विकास खंड में स्थापित हुए ऊर्जा वन, 2.81 लाख पौधे रोपित
लखनऊ। वैश्विक ऊर्जा संकट के दृष्टिगत जलौनी लकड़ी की अनवरत उपलब्धता सुनिश्चित करने हेतु 23 जुलाई 2026 को 'एक पेड़ मां के नाम' विषयवस्तु पर आधारित वृक्षारोपण महायज्ञ 2026 के अंतर्गत प्रदेश के प्रत्येक विकास खंड में न्यूनतम 1 हेक्टेयर क्षेत्र में सिरस, बबूल, सुबबूल, गुटेल, कदम्ब जैसी तीव्र गति से बढ़ने वाली प्रजातियों का रोपण कर ऊर्जा वनों की स्थापना की गई।
हर साल 226 किलो जलौनी लकड़ी का होता है उपयोग
उल्लेखनीय है कि पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा वर्ष 2020 में निर्गत रिपोर्ट के अनुसार वनों के निकटवर्ती ग्रामीणों द्वारा औसतन प्रतिवर्ष 226 किलोग्राम प्रति व्यक्ति जलौनी लकड़ी का उपयोग किया जाता है, तथा वन क्षेत्र के समीपवर्ती लगभग 2.27 करोड़ ग्रामवासी निवास करते हैं।
यदि वनों के समीपवर्ती क्षेत्रों के निवासियों को जलौनी लकड़ी की आवश्यकता होती है तो वर्ष 2026 में लगाए जा रहे ऊर्जा वन उस मांग की पूर्ति करने में सहायक होंगे। यदि भविष्य में इस प्रकार की आवश्यकता नहीं होती है तो भी ऊर्जा वनों के रूप में स्थापित वृक्ष कार्बन अवशोषण कर पर्यावरण के सुधार में सहायक होंगे।
242.40 हेक्टेयर में रोपे गए 2,81,233 पौधे
प्रदेश में 242.40200 हेक्टेयर क्षेत्रफल में 2,81,233 पौधे रोपित कर प्रत्येक विकास खंड में ऊर्जा वन स्थापित किए गए।
वन विभाग, ग्राम्य विकास और पंचायती राज विभाग की संयुक्त पहल
वन एवं वन्यजीव विभाग द्वारा स्थापित इन ऊर्जा वनों की स्थापना में ग्राम्य विकास विभाग एवं पंचायती राज विभाग द्वारा सक्रिय सहयोग व सहभागिता प्रदान की गई।
