पर्यटन विभाग की परियोजनाओं की होगी जमीनी पड़ताल, कागजों तक नहीं रहेगा सीमित: मंत्री जयवीर सिंह
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में पर्यटन और धार्मिक स्थलों के विकास की योजनाएं अब केवल कागजी प्रस्तावों के आधार पर मंजूर नहीं होंगी। हर परियोजना का पहले जमीनी सत्यापन होगा, उसकी उपयोगिता और जनहित का आकलन किया जाएगा, और उसके बाद ही योजनाओं को अंतिम स्वीकृति मिलेगी — ताकि जनता का पैसा वहीं खर्च हो जहां उसका वास्तविक लाभ लोगों तक पहुंचे।
इसी सोच के साथ पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने सोमवार को वित्तीय वर्ष 2026-27 की पर्यटन, संस्कृति एवं धर्मार्थ कार्य विभाग की कार्ययोजना की प्रदेशव्यापी समीक्षा का शुभारंभ किया। पहले चरण में आगरा और अलीगढ़ मंडल की परियोजनाओं की समीक्षा की गई।
18 मंडलों में समीक्षा अभियान, आगरा-अलीगढ़ से शुरुआत
पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने विशेष समीक्षा अभियान के पहले चरण में आगरा और अलीगढ़ मंडल की 80 परियोजनाओं का बिंदुवार निरीक्षण किया। प्रत्येक प्रस्ताव की प्रगति, गुणवत्ता और उपयोगिता का मूल्यांकन किया गया। अब यही प्रक्रिया प्रदेश के सभी 18 मंडलों में अपनाई जाएगी, जिसमें प्रत्येक मंडल में समीक्षा बैठक के साथ स्थलीय निरीक्षण भी शामिल होगा।
मंडलवार परियोजनाओं की समीक्षा: पूरा ब्यौरा
| मंडल / विभाग | परियोजनाएं | अनुमानित लागत |
|---|---|---|
| आगरा मंडल (पर्यटन) | 58 परियोजनाएं | लगभग ₹273 करोड़ |
| मथुरा (धर्मार्थ विभाग) | 3 परियोजनाएं | लगभग ₹245 करोड़ |
| अलीगढ़ मंडल (अलीगढ़, कासगंज, एटा, हाथरस) | 19 परियोजनाएं | ₹500 करोड़ से अधिक |
'तथ्यों की कसौटी पर परखी जाएगी हर परियोजना'
मंत्री जयवीर सिंह ने स्पष्ट किया कि अब कोई भी परियोजना केवल प्रस्ताव के आधार पर स्वीकृत नहीं होगी। हर योजना को ठोस तथ्यों पर परखा जाएगा। प्रत्येक प्रस्ताव के साथ निम्नलिखित दस्तावेज अनिवार्य होंगे:
- भूमि अभिलेख
- स्थल के नवीनतम फोटोग्राफ
- व्यवहारिक लागत का आकलन
- ऐतिहासिक या धार्मिक महत्व के प्रमाण
- स्थानीय लोगों और पर्यटकों को मिलने वाले प्रत्यक्ष लाभ का स्पष्ट विवरण
संबंधित विभाग, जिला प्रशासन और कार्यदायी संस्था की जिम्मेदारी भी पहले से तय की जाएगी, ताकि क्रियान्वयन में पूरी पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित हो सके।
हर चरण पर निगरानी, नवंबर तक पूरे होंगे विलंबित कार्य
मंत्री ने कहा कि जनता का पैसा केवल उन योजनाओं पर खर्च होगा जिनका असर जमीन पर स्पष्ट दिखाई दे। प्रत्येक परियोजना का चयन पूरी पारदर्शिता के साथ होगा और निर्माण कार्य की हर चरण में निगरानी रहेगी।
बैठक में अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए गए कि:
- निर्माण कार्यों की गुणवत्ता से किसी भी स्तर पर समझौता न हो
- सभी कार्य तय समय-सीमा के भीतर पूरे किए जाएं
- विलंबित परियोजनाएं नवंबर 2026 तक हर हाल में पूर्ण की जाएं
- स्थानीय जनप्रतिनिधियों (सांसद, विधायक, विधान परिषद सदस्य) को परियोजनाओं की नियमित जानकारी दी जाए
- भूमि पूजन और शिलान्यास कार्यक्रमों में जनप्रतिनिधियों को अनिवार्य रूप से आमंत्रित किया जाए
बटेश्वर धाम, कोठी मीना बाजार और बाबा नीब करौरी संग्रहालय पर फोकस
आगरा में निम्न प्रस्ताव रखे गए:
- बटेश्वर धाम के प्राचीन मंदिरों का संरक्षण
- पूर्व प्रधानमंत्री स्व. अटल बिहारी वाजपेयी स्मारक पर पर्यटक सुविधाओं का विकास
- कोठी मीना बाजार का सौंदर्यीकरण, पार्किंग सहित अन्य सुविधाओं का विस्तार
फिरोजाबाद में:
- आर्य संस्कृति संकुल का विकास
- बाबा नीब करौरी संग्रहालय के दूसरे चरण का कार्य
- जिला सीमाओं पर पर्यटन सूचना केंद्र
- महुआ वाली कालिका माता मंदिर में पर्यटक सुविधाओं का विकास
मैनपुरी में शीतला माता मंदिर, राम जानकी मंदिर और मनकामेश्वर मंदिर सहित प्रमुख धार्मिक स्थलों पर पर्यटक सुविधाएं विकसित करने का प्रस्ताव रखा गया।
धर्मार्थ विभाग की ₹245 करोड़ की योजनाएं, बांके बिहारी कॉरिडोर न्यायालय में विचाराधीन
बैठक में धर्मार्थ कार्य विभाग की लगभग ₹245 करोड़ लागत वाली तीन प्रमुख परियोजनाओं की भी समीक्षा हुई, जिनमें शामिल हैं:
- 15 धार्मिक स्थलों का संरक्षण एवं विकास
- श्री बांके बिहारी जी महाराज कॉरिडोर
- विभिन्न धार्मिक स्थलों पर जन सुविधाओं का विकास
अधिकारियों ने बताया कि बांके बिहारी कॉरिडोर का मामला फिलहाल न्यायालय में विचाराधीन है।
अलीगढ़ मंडल के धार्मिक स्थलों पर बढ़ेंगी सुविधाएं
अलीगढ़, कासगंज, एटा और हाथरस के धार्मिक स्थलों पर निम्न सुविधाएं विकसित करने का प्रस्ताव है:
- बहुउद्देशीय भवन
- पेयजल एवं शौचालय
- प्रकाश व्यवस्था
- QR कोड आधारित सूचना प्रणाली
- बैठने की व्यवस्था, पैदल मार्ग और लैंडस्केपिंग
आगे की राह: शेष 16 मंडलों की समीक्षा भी होगी
बैठक के अंत में मंत्री जयवीर सिंह ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि सभी लंबित अभिलेख, तकनीकी विवरण और भूमि संबंधी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद ही अंतिम कार्ययोजना प्रस्तुत की जाए। साथ ही संयुक्त स्थलीय निरीक्षण कराने के निर्देश भी दिए, ताकि परियोजनाओं का चयन केवल फाइलों के आधार पर नहीं बल्कि वास्तविक आवश्यकता और जनहित को ध्यान में रखकर किया जा सके।
बैठक में संबंधित जनप्रतिनिधि, जिला प्रशासन के अधिकारी तथा पर्यटन, संस्कृति एवं धर्मार्थ कार्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। प्रदेश के शेष 16 मंडलों की समीक्षा भी क्रमवार की जाएगी।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
1. आगरा-अलीगढ़ मंडल की कितनी परियोजनाओं की समीक्षा हुई? पहले चरण में 80 परियोजनाओं की समीक्षा हुई — आगरा मंडल की 58, मथुरा धर्मार्थ विभाग की 3, और अलीगढ़ मंडल की 19 परियोजनाएं।
2. विलंबित परियोजनाओं को पूरा करने की डेडलाइन क्या है? मंत्री जयवीर सिंह ने सभी विलंबित परियोजनाओं को नवंबर 2026 तक हर हाल में पूर्ण करने के निर्देश दिए हैं।
3. बांके बिहारी कॉरिडोर परियोजना की मौजूदा स्थिति क्या है? अधिकारियों के अनुसार बांके बिहारी कॉरिडोर का मामला फिलहाल न्यायालय में विचाराधीन है।
4. प्रोजेक्ट स्वीकृति के लिए अब क्या-क्या अनिवार्य होगा? भूमि अभिलेख, स्थल के नवीनतम फोटोग्राफ, लागत आकलन, ऐतिहासिक/धार्मिक महत्व के प्रमाण और जनता को मिलने वाले प्रत्यक्ष लाभ का विवरण अनिवार्य होगा
