लखनऊ, कैनविज टाइम्स संवाददाता। बाबू बनारसी दास यूनिवर्सिटी (बीबीडीयू) में शनिवार को राजस्थान हाईकोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश स्वर्गीय न्यायमूर्ति डी.पी. गुप्ता की 100वीं जयंती पर भव्य समारोह का आयोजन किया गया। डॉ. अखिलेश दास गुप्ता ऑडिटोरियम में आयोजित कार्यक्रम में न्यायपालिका, शिक्षा जगत और विधि क्षेत्र की अनेक प्रतिष्ठित हस्तियों ने सहभागिता की। इस अवसर पर पहली जस्टिस डी.पी. गुप्ता राष्ट्रीय मूट कोर्ट प्रतियोगिता-2026 के विजेताओं को भी सम्मानित किया गया। कार्यक्रम का आयोजन कुलाधिपति अलका दास गुप्ता एवं प्रो-चांसलर विराज सागर दास के मार्गदर्शन में हुआ। समारोह में भारत के सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश एवं 23वें विधि आयोग के अध्यक्ष जस्टिस दिनेश माहेश्वरी मुख्य अतिथि रहे। वहीं मद्रास हाई कोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश जस्टिस एम.एन. भंडारी, मद्रास हाई कोर्ट के न्यायाधीश न्यायमूर्ति शमीम अहमद तथा इलाहाबाद हाई कोर्ट के न्यायाधीश न्यायमूर्ति प्रमोद कुमार श्रीवास्तव विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। वक्ताओं ने न्यायमूर्ति डी.पी. गुप्ता के न्यायिक जीवन, निष्पक्षता, ईमानदारी और संवैधानिक मूल्यों के प्रति उनकी अटूट प्रतिबद्धता को याद करते हुए उन्हें नई पीढ़ी के लिए प्रेरणास्रोत बताया। कार्यक्रम के दौरान उनके जीवन एवं न्यायिक योगदान पर आधारित स्मारिका का भी विमोचन किया गया। कुलाधिपति अलका दास गुप्ता ने कहा कि न्यायमूर्ति डी.पी. गुप्ता का जीवन सत्यनिष्ठा, निष्पक्षता और संविधान के प्रति समर्पण का प्रतीक था। उनके आदर्श आज भी युवाओं को न्याय और जनसेवा के मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा देते हैं। प्रो-चांसलर विराज सागर दास ने कहा कि कानूनी शिक्षा का उद्देश्य केवल कानून का ज्ञान देना नहीं, बल्कि छात्रों में तार्किक सोच, जिम्मेदारी और न्याय के प्रति प्रतिबद्धता विकसित करना भी है। मूट कोर्ट प्रतियोगिता जैसे मंच विद्यार्थियों को न्यायालय की वास्तविक कार्यप्रणाली का व्यावहारिक अनुभव प्रदान करते हैं। समारोह के दौरान पहली जस्टिस डी.पी. गुप्ता राष्ट्रीय मूट कोर्ट प्रतियोगिता-2026 का ग्रैंड फिनाले और पुरस्कार वितरण भी हुआ। प्रतियोगिता में देशभर की नेशनल लॉ यूनिवर्सिटीज, केंद्रीय एवं राज्य विश्वविद्यालयों तथा प्रमुख विधि महाविद्यालयों की 54 टीमों ने भाग लिया। विजेता प्रतिभागियों को लगभग एक लाख रुपये की नकद पुरस्कार राशि तथा 96 हजार रुपये मूल्य की एससीसी ऑनलाइन सदस्यता प्रदान की गई। कार्यक्रम के समापन पर विश्वविद्यालय प्रशासन ने कहा कि इस प्रकार की शैक्षणिक पहलें विद्यार्थियों में कानूनी शोध, वकालत की दक्षता और संवैधानिक मूल्यों के प्रति प्रतिबद्धता को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। बीबीडीयू भविष्य में भी ऐसे राष्ट्रीय स्तर के आयोजन कर विधि शिक्षा को नई दिशा देने के लिए प्रतिबद्ध रहेगा।
