विद्यार्थियों को दिखाया जाएगा वास्तविक क्षुद्रग्रह का टुकड़ा, प्रवेश रहेगा पूरी तरह निःशुल्क
लखनऊ, विश्व क्षुद्रग्रह दिवस (World Asteroid Day) के अवसर पर 30 जून को लखनऊ स्थित इंदिरा गांधी नक्षत्रशाला में एक दिवसीय विशेष वैज्ञानिक कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा। इस कार्यक्रम में देश के प्रतिष्ठित वैज्ञानिक, खगोलविद और एस्ट्रॉयड शोध विशेषज्ञ विद्यार्थियों, शोधार्थियों तथा आम नागरिकों के साथ अंतरिक्ष विज्ञान और क्षुद्रग्रहों पर संवाद करेंगे।
कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों और युवाओं में खगोल विज्ञान के प्रति रुचि बढ़ाना तथा क्षुद्रग्रहों (Asteroids), नियर अर्थ ऑब्जेक्ट (NEO) और अंतरिक्ष विज्ञान के बारे में वैज्ञानिक जागरूकता फैलाना है। कार्यक्रम में भाग लेने के लिए किसी प्रकार का शुल्क नहीं रखा गया है और इच्छुक नागरिक भी इसमें शामिल हो सकते हैं।
विश्व स्तर के विशेषज्ञ होंगे शामिल
कार्यक्रम में विश्व के विभिन्न Asteroid Search Campaigns में मेंटर की भूमिका निभाने वाले डॉ. अमृतांशु वाजपेयी विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे। उनके नाम अब तक 12 से अधिक प्रोविजनल एस्ट्रॉयड डिस्कवरी दर्ज हैं।
इसके अलावा ISRO से जुड़े ISTRAC के वैज्ञानिक राजीव कुमार तथा लखनऊ के प्रसिद्ध एस्ट्रोफिजिसिस्ट डॉ. शंकर दयाल पाठक भी कार्यक्रम में शामिल होंगे। विशेषज्ञ विद्यार्थियों के साथ संवाद करेंगे और अंतरिक्ष अनुसंधान से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर जानकारी साझा करेंगे।
प्रतिभागियों को दिखाया जाएगा असली क्षुद्रग्रह का टुकड़ा
कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण यह रहेगा कि राजीव कुमार अपने पास सुरक्षित वास्तविक क्षुद्रग्रह (Asteroid) का एक टुकड़ा प्रतिभागियों को दिखाएंगे। इससे विद्यार्थियों को अंतरिक्ष विज्ञान को करीब से समझने का दुर्लभ अवसर मिलेगा।
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क्यों मनाया जाता है विश्व क्षुद्रग्रह दिवस?
संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा प्रतिवर्ष 30 जून को विश्व क्षुद्रग्रह दिवस मनाया जाता है। यह दिवस 1908 में रूस के साइबेरिया स्थित टूंगूस्का क्षेत्र में हुए इतिहास के सबसे बड़े दर्ज क्षुद्रग्रह विस्फोट (Tunguska Event) की स्मृति में आयोजित किया जाता है।
वैज्ञानिकों के अनुसार लगभग 50 मीटर व्यास का एक क्षुद्रग्रह पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करने के बाद लगभग 10 किलोमीटर की ऊंचाई पर विस्फोटित हो गया था। इस विस्फोट से लगभग 2,150 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र का जंगल नष्ट हो गया और करोड़ों पेड़ धराशायी हो गए थे। यह घटना इस बात का महत्वपूर्ण उदाहरण है कि पृथ्वी के निकट वायुमंडल में होने वाला क्षुद्रग्रह विस्फोट भी व्यापक विनाश का कारण बन सकता है।
खगोल विज्ञान के प्रति बढ़ रही युवाओं की रुचि
विशेषज्ञों के अनुसार आज खगोल विज्ञान केवल वैज्ञानिक अध्ययन का विषय ही नहीं, बल्कि विद्यार्थियों और युवाओं के बीच एक लोकप्रिय हॉबी भी बन चुका है। International Astronomical Search Collaboration (IASC) जैसी संस्थाएं दुनिया भर के विद्यार्थियों और नागरिक वैज्ञानिकों को वास्तविक खगोलीय डेटा उपलब्ध कराकर नए क्षुद्रग्रहों की खोज में भागीदारी का अवसर प्रदान करती हैं।
इंदिरा गांधी नक्षत्रशाला का यह कार्यक्रम विद्यार्थियों, शिक्षकों, शोधार्थियों, खगोल विज्ञान क्लबों और विज्ञान प्रेमियों के लिए अंतरिक्ष विज्ञान को समझने का एक अनूठा अवसर साबित होगा।
