कानून प्रवर्तन एजेंसियों और फॉरेंसिक विशेषज्ञों को अपराधियों से हमेशा एक कदम आगे रहना होगा: असीम अरुण
UP स्टेट इंस्टिट्यूट ऑफ फॉरेंसिक साइंस में नए सत्र का शुभारंभ, विधायक राजेश्वर सिंह ने की ₹1 लाख पुरस्कार की घोषणा
लखनऊ। उत्तर प्रदेश स्टेट इंस्टिट्यूट ऑफ फॉरेंसिक साइंस में नए सत्र का शुभारंभ हुआ। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि समाज कल्याण मंत्री असीम अरुण तथा विशिष्ट अतिथि स्थानीय विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह की उपस्थिति में संस्थापक निदेशक डॉ. जी के गोस्वामी, राम मनोहर लोहिया नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी के कुलपति डॉ. अमर पाल सिंह और डॉ. एम.के. शन्मुगम सुंदरम (आईएएस) ने दीप प्रज्वलित कर शुभारंभ किया। इस अवसर पर संस्थापक निदेशक ने सभी अतिथियों को स्मृति चिन्ह व अंगवस्त्र भेंट कर सम्मानित किया।
सटीकता ही फॉरेंसिक विज्ञान की बुनियाद: असीम अरुण
मुख्य अतिथि असीम अरुण ने नवागंतुक छात्र-छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा कि उन्होंने ऐसे क्षेत्र को चुना है जो उनके भविष्य के साथ-साथ देश की न्याय व्यवस्था और आंतरिक सुरक्षा के लिए भी अहम है। उन्होंने कहा कि फॉरेंसिक विज्ञान का मूल आधार सटीकता है — केवल अपराधी को पकड़ना काफी नहीं, बल्कि न्यायालय में ग्राह्य वैज्ञानिक साक्ष्य प्रस्तुत करना भी उतना ही ज़रूरी है।
उन्होंने कहा कि मोबाइल फोन, इंटरनेट और कृत्रिम बुद्धिमत्ता जैसी तकनीकों के साथ साइबर अपराधों का स्वरूप भी बदल रहा है, इसलिए एजेंसियों को अपराधियों से एक कदम आगे रहकर लगातार नई तकनीकों पर शोध करना होगा। उन्होंने भारत को "Safe by Design" डिजिटल तंत्र विकसित करने में अग्रणी भूमिका निभाने का आह्वान किया।
BNS में फॉरेंसिक जांच अनिवार्य होने से बढ़ी मांग: राजेश्वर सिंह
विशिष्ट अतिथि डॉ. राजेश्वर सिंह ने कहा कि भारतीय न्याय संहिता (BNS) में सात वर्ष या उससे अधिक दंडनीय अपराधों में फॉरेंसिक जांच अनिवार्य किए जाने से प्रशिक्षित विशेषज्ञों की मांग तेज़ी से बढ़ी है। साइबर अपराध, डिजिटल गिरफ्तारी और ऑनलाइन धोखाधड़ी जैसी चुनौतियों के चलते साइबर फॉरेंसिक की भूमिका अहम हो गई है।
उन्होंने अपने स्वर्गीय पिता आर.पी. सिंह की स्मृति में संस्थान के सर्वश्रेष्ठ विद्यार्थी हेतु प्रतिवर्ष ₹1 लाख नकद पुरस्कार व प्रशस्ति सम्मान देने की घोषणा की।
"करियर पासपोर्ट" अवधारणा पर बोले संस्थापक निदेशक
डॉ. जी के गोस्वामी ने कहा कि AI, साइबर सुरक्षा और डेटा संरक्षण अब हर नागरिक के जीवन का अभिन्न हिस्सा बन चुके हैं। भविष्य उन्हीं युवाओं का होगा जो खुद को निरंतर अपडेट रखेंगे। उन्होंने संस्थान की "करियर पासपोर्ट" अवधारणा का भी उल्लेख किया, जिसका उद्देश्य विद्यार्थियों को उनकी आकांक्षाओं को हकीकत में बदलने के लिए ज़रूरी ज्ञान, कौशल व अवसर उपलब्ध कराना है।
अन्य वक्ताओं के विचार
प्रमुख सचिव डॉ. एम.के. शन्मुगम सुंदरम (आईएएस) ने विद्यार्थियों से रणनीतिक व परिणामोन्मुखी कार्यशैली अपनाने की सलाह दी। कुलपति डॉ. अमर पाल सिंह ने फॉरेंसिक विज्ञान को सुशासन स्थापित करने में निर्णायक बताया।
कार्यक्रम में इजराइल दूतावास की माया शेरमैन, डॉ. प्रदीप कुमार श्रीवास्तव, डॉ. प्रवीण कुमार द्विवेदी, अनुज गुप्ता व हरमन कोहली ने भी अपने व्याख्यान दिए। पुलिस उप महानिरीक्षक हेमराज मीना ने धन्यवाद ज्ञापन किया। इस दौरान उपनिदेशक चिरंजिब मुखर्जी, अतुल यादव, विवेक कुमार, जनसंपर्क अधिकारी संतोष तिवारी सहित अन्य अधिकारी व शिक्षक उपस्थित रहे।
