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अंगदान में क्रांति: 2013 में 5 हजार से 2025 में 20,000 तक पहुंचा प्रतिरोपण, भारत हाथ प्रत्यारोपण में विश्व नंबर-1

India records a fourfold rise in organ transplants from 2013 to 2025, reaching nearly 20,000 cases. The Health Ministry highlights NOTTO reforms, increased deceased donations, Aadhaar-based registrations, and advancements in complex organ transplants including heart, lung, pancreas, and hand transplants.
  • By Kanhwizz Times
  • Reported By: Admin
  • Updated: February 23, 2026

नई दिल्लीः देश में अंग प्रतिरोपण के मामले 2013 में 5,000 से कम थे जो चार गुना की उल्लेखनीय वृद्धि के साथ 2025 में लगभग 20,000 तक पहुंच गए हैं। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने यह जानकारी दी। मंत्रालय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपने रेडियो कार्यक्रम 'मन की बात' में अंगदान के महत्व को रेखांकित किया है और सरकार ने देश में अंगदान आंदोलन को निरंतर प्रोत्साहन दिया है।

एक बयान में मंत्रालय ने रविवार को कहा कि ''राष्ट्रीय अंग एवं ऊतक प्रतिरोपण संगठन'' (एनओटीटीओ) ने अंगदान, आवंटन और प्रतिरोपण के क्षेत्र में अभूतपूर्व प्रगति दर्ज की है, जिससे भारत ने इस क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। मंत्रालय के अनुसार, वर्तमान में लगभग 18 प्रतिशत प्रतिरोपण मृत दाताओं के दान किए गए अंगों से किए जा रहे हैं। वर्ष 2025 में 1,200 से अधिक परिवारों ने अपने प्रियजनों के निधन के बाद अंगदान कर हजारों लोगों की जान बचाने और कई अन्य के जीवन की गुणवत्ता में सुधार लाने में योगदान दिया। प्रत्येक दाता को अब बहु-अंग दाता के रूप में माना जा रहा है, जिससे कई प्राप्तकर्ताओं का जीवन बदल रहा है। 17 सितंबर 2023 से आधार-आधारित सत्यापन प्रणाली के माध्यम से 4.8 लाख से अधिक नागरिकों की मृत्यु के बाद अंग और ऊतक दान के लिए पंजीकरण कराया गया है।

मंत्रालय ने कहा कि भारत ने हृदय, फेफड़े और अग्न्याशय जैसे जटिल अंग प्रतिरोपण करने में दक्षता हासिल की है। बयान में कहा गया कि भारत हस्त प्रतिरोपण में विश्व में अग्रणी है और किसी भी अन्य देश की तुलना में यहां हाथ के प्रतिरोपण के अधिक मामले सामने आते हैं। पिछले एक वर्ष में देश में मृतकों के अंगदान में ऐतिहासिक वृद्धि, बेहतर प्रतिरोपण समन्वय और राष्ट्रीय स्तर पर अंग दान की प्रणाली में सुधार हुआ है, जिससे अधिक मरीजों को समय पर और समान रूप से जीवन रक्षक प्रतिरोपण की सुविधा उपलब्ध हो रही है। मंत्रालय ने कहा कि एनओटीटीओ को राष्ट्रीय समन्वय प्राधिकरण के रूप में सशक्त किया गया है, जिससे वास्तविक समय में अंग आवंटन और राज्यों के बीच निर्बाध सहयोग संभव हुआ है। उसने कहा कि राष्ट्रीय अंग एवं ऊतक प्रतिरोपण रजिस्ट्री का आधुनिकीकरण किया गया है, जिससे पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित हुई है।

मंत्रालय के बयान में कहा गया कि राज्य अंग एवं ऊतक प्रतिरोपण संगठनों (एसओटीटीओ) और क्षेत्रीय संगठनों (आरओटीटीओ) की क्षमता बढ़ाई गई है, साथ ही प्रतिरोपण प्रोटोकॉल को वैश्विक मानकों के अनुरूप सुव्यवस्थित किया गया है। उसने कहा कि डिजिटल प्लेटफॉर्म के उपयोग और 'ग्रीन कॉरिडोर' जैसी व्यवस्था से अंगों के त्वरित और सुरक्षित परिवहन को बढ़ावा मिला है। मंत्रालय ने कहा कि जन जागरूकता अभियान और सामुदायिक सहभागिता से समाज में अंगदान के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित हुआ है। 

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