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गणेशोत्सव पर जानें खास मंदिर की कहानी, जहां गणपति विराजते हैं मोर पर

पुणे
  • By Kanhwizz Times
  • Reported By: Kritika pandey
  • Updated: August 29, 2025

कैनविज टाइम्स, डिजिटल डेस्क । 

गणेश चतुर्थी के पावन अवसर पर देशभर में गणपति बप्पा की भक्ति का माहौल देखने को मिलता है। इस मौके पर हम आपको एक ऐसे अनोखे मंदिर के बारे में बता रहे हैं, जिसकी विशेषता सुनकर आप हैरान रह जाएंगे। यह मंदिर पुणे के सोमवार पेठ स्थित त्रिशुंड गणपति मंदिर है, जहां भगवान गणेश अपने पारंपरिक वाहन चूहे पर नहीं, बल्कि मोर पर विराजमान हैं। त्रिशुंड गणपति मंदिर का इतिहास लगभग एक हजार साल पुराना माना जाता है। बताया जाता है कि पहले यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित था, लेकिन बाद में इसे गणेश जी को अर्पित कर दिया गया। इस मंदिर का निर्माण 26 अगस्त 1754 को धामपुर (इंदौर के पास) के भिक्षुगिरि गोसावी ने शुरू कराया था और 1770 में इसे पूरा किया गया। मंदिर सोमवार पेठ की भीड़-भाड़ वाली गलियों में कमला नेहरू अस्पताल चौक के पास स्थित है। मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता इसकी अद्भुत प्रतिमा है। यहां स्थापित गणपति की मूर्ति तीन सूंड वाली, तीन आंखों वाली और छह भुजाओं वाली है। यही कारण है कि इन्हें त्रिशुंड विनायक कहा जाता है। काले पत्थर से बनी इस प्रतिमा पर बारीक नक्काशी की गई है। भगवान गणेश की सूंड में लड्डू बनाया गया है और पूरी मूर्ति कीमती रत्नों से सजी हुई है। इस मंदिर की मान्यता है कि जो भी भक्त यहां सच्चे मन से प्रार्थना करता है, उसकी हर मनोकामना पूरी होती है। श्रद्धालु मानते हैं कि त्रिशुंड गणपति की पूजा करने से नए कार्यों में सफलता, ज्ञान और सौभाग्य प्राप्त होता है। गणेशोत्सव के दौरान यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन करने पहुंचते हैं और इस अद्वितीय स्वरूप के बप्पा के दर्शन कर अपने जीवन को धन्य मानते हैं।

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