चंडीगढ़। फरीदाबाद की उच्च-सुरक्षा नीमका जेल में बंद आतंकवाद के आरोपी अब्दुल रहमान की रविवार देर रात हत्या किए जाने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। घटना का खुलासा सोमवार सुबह हुआ, जब जेल प्रशासन को बैरक में उसका शव मिला। हत्या के आरोप में एक अन्य कैदी अरुण चौधरी को हिरासत में लिया गया है, जिसे हाल ही में जम्मू-कश्मीर से नीमका जेल स्थानांतरित किया गया था।
जेल सूत्रों के अनुसार, अब्दुल रहमान पर एक नुकीले, हाथ से बनाए गए हथियार से हमला किया गया। घटना के समय वह अल्ट्रा-हाई सिक्योरिटी सेल में बंद था, जहां अरुण चौधरी को भी रखा गया था। सूचना मिलते ही जेल अधिकारी और स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंची। शव को पोस्टमार्टम के लिए सिविल अस्पताल भेज दिया गया है। जेल प्रशासन के विशेष सुरक्षा प्रकोष्ठ ने इस पूरे मामले में सुरक्षा चूक की औपचारिक जांच शुरू कर दी है।
उत्तर प्रदेश के मिल्कीपुर निवासी 19 वर्षीय अब्दुल रहमान को पिछले वर्ष 2 मार्च को हरियाणा स्पेशल टास्क फोर्स (STF), गुजरात एटीएस और इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) की संयुक्त कार्रवाई में गिरफ्तार किया गया था। उस पर भारतीय उपमहाद्वीप में सक्रिय आतंकी संगठन अल-कायदा से जुड़े होने और ‘अबू सुफियान’ नामक ऑपरेटिव के निर्देश पर काम करने के आरोप थे।
गिरफ्तारी के दौरान सुरक्षा एजेंसियों ने उसके पास से दो जिंदा हैंड ग्रेनेड और डेटोनेटर बरामद किए थे। एजेंसियों का दावा था कि वह अयोध्या को निशाना बनाने की साजिश रच रहा था। जांच में यह भी सामने आया था कि वह सोशल मीडिया के माध्यम से कट्टरपंथी विचारधारा से प्रभावित हुआ था।
हमले का आरोपी अरुण चौधरी उर्फ ‘अबू जट्ट’ जम्मू के आरएस पुरा क्षेत्र का रहने वाला है। उसके खिलाफ हत्या और रंगदारी सहित कई संगीन आपराधिक मामले दर्ज हैं, जिनमें सांबा का चर्चित अक्षय शर्मा हत्याकांड भी शामिल है। अक्टूबर 2024 में उसे कठुआ जेल से नीमका जेल लाया गया था। इससे पहले वह कठुआ जेल के भीतर से इंस्टाग्राम पर लाइव आकर जेल स्टाफ पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाकर भी सुर्खियों में आ चुका है।
गौरतलब है कि फरीदाबाद के डबुआ थाने में अब्दुल रहमान के खिलाफ शस्त्र अधिनियम और विस्फोटक पदार्थ अधिनियम के तहत पहले से मामला दर्ज था। प्रशासन अब हत्या के पीछे के कारणों की गहन जांच कर रहा है और यह भी पता लगाया जा रहा है कि उच्च-सुरक्षा क्षेत्र में आरोपी तक नुकीला हथियार कैसे पहुंचा।
