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यूपी लोक एवं जनजाति संस्कृति संस्थान की परिषद बैठक सम्पन्न, 2026-27 की कार्ययोजना मंजूर

लखनऊ में उत्तर प्रदेश लोक एवं जनजाति संस्कृति संस्थान की सामान्य परिषद बैठक सम्पन्न। विशेष सचिव दीपा रंजन की अध्यक्षता में वित्तीय वर्ष 2026-27 की वार्षिक कार्ययोजना को मंजूरी। जनजातीय धरोहर संरक्षण पर विशेष बल।
  • By Kanhwizz Times
  • Reported By: Shivam Srivastava
  • Updated: August 6, 2026

लोक एवं जनजाति संस्कृति संस्थान की सामान्य परिषद बैठक सम्पन्न, 2026-27 की कार्ययोजना मंजूर

लखनऊ। उत्तर प्रदेश लोक एवं जनजाति संस्कृति संस्थान की सामान्य परिषद की बैठक बुधवार को संस्कृति निदेशालय सभागार में विशेष सचिव, संस्कृति विभाग दीपा रंजन की अध्यक्षता में सम्पन्न हुई।

बैठक में मौजूद रहे ये गणमान्य सदस्य

बैठक में डॉ. रति शंकर त्रिपाठी (अध्यक्ष, भारतेन्दु नाट्य अकादमी), प्रो. जयन्त खोत (अध्यक्ष, उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी), डॉ. राजेश अहिरवार (सहायक निदेशक, संस्कृति निदेशालय), डॉ. विनय कुमार सिंह (निदेशक, राज्य संग्रहालय), डॉ. कुमुद सिंह, नरेन्द्र पाठक, जगप्रसाद तिवारी, सुरेश प्रसाद कुशवाहा, डॉ. बृजभान मरावी, तारा चौधरी, डॉ. मनोज कुमार मिश्रा (भातखण्डे संस्कृति विश्वविद्यालय), राम विनय (उत्तर प्रदेश पुरातत्व विभाग), धर्मेन्द्र यादव (कोषाध्यक्ष) तथा संस्थान के निदेशक अतुल द्विवेदी सहित सामान्य परिषद के सभी सम्मानित सदस्यों ने सहभागिता की।

वित्तीय वर्ष 2026-27 की कार्ययोजना को मंजूरी

इसके उपरांत वित्तीय वर्ष 2026-2027 के प्रस्तावित वार्षिक कार्यक्रमों एवं कार्ययोजना पर विस्तारपूर्वक विचार-विमर्श किया गया तथा उन्हें सामान्य परिषद द्वारा अनुमोदित किया गया। बैठक में संस्थान के प्रशासनिक, वित्तीय एवं सांस्कृतिक कार्यों की विस्तृत समीक्षा करते हुए विभिन्न योजनाओं के प्रभावी संचालन, संसाधनों के समुचित उपयोग तथा कार्यों में पारदर्शिता एवं गुणवत्ता सुनिश्चित करने पर विशेष बल दिया गया।

लोक एवं जनजातीय कला संरक्षण पर चर्चा

बैठक के दौरान प्रदेश की समृद्ध लोक एवं जनजातीय कला, संस्कृति, लोक परंपराओं एवं लोक कलाकारों के संरक्षण, संवर्धन तथा व्यापक प्रचार-प्रसार हेतु संचालित योजनाओं एवं भावी कार्यक्रमों पर भी विस्तृत चर्चा हुई। परिषद के सदस्यों ने संस्थान की भावी कार्ययोजना को अधिक प्रभावी, जनोन्मुखी एवं परिणामपरक बनाने के लिए महत्वपूर्ण सुझाव दिए, जिन पर आवश्यक निर्णय लेते हुए उनके समयबद्ध क्रियान्वयन पर सहमति व्यक्त की गई।

बैठक के दौरान संस्थान की आगामी सांस्कृतिक गतिविधियों, लोक एवं जनजातीय कलाकारों के हितों, शोध एवं प्रकाशन कार्यों, प्रशिक्षण कार्यक्रमों तथा सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण एवं संवर्धन से संबंधित विभिन्न विषयों पर विस्तृत एवं सार्थक चर्चा हुई।

अध्यक्ष दीपा रंजन के निर्देश

इस अवसर पर अध्यक्ष दीपा रंजन ने संस्थान को प्रदेश की समृद्ध लोक एवं जनजातीय सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण, संवर्धन एवं व्यापक प्रचार-प्रसार हेतु और अधिक सक्रिय, प्रभावी तथा परिणामोन्मुखी ढंग से कार्य करने के निर्देश दिए।

अध्यक्ष द्वारा विशेष रूप से जनजातीय समुदायों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने, संस्थान की गतिविधियों एवं उपलब्धियों का व्यापक स्तर पर प्रचार-प्रसार सुनिश्चित करने तथा उत्तर प्रदेश की लोक एवं जनजातीय संस्कृति से जुड़ी विलुप्तप्राय धरोहरों जैसे पारंपरिक हस्तशिल्प, स्थानीय व्यंजन, लोक औषधीय पारंपरिक ज्ञान एवं अन्य पारंपरिक सांस्कृतिक विरासत का व्यवस्थित प्रलेखन, संरक्षण एवं संग्रहण करने पर बल दिया गया।

इसके साथ ही संस्कृति विभाग के अधीन संचालित सभी संस्थानों एवं अकादमियों के साथ बेहतर समन्वय स्थापित कर संयुक्त रूप से सांस्कृतिक गतिविधियों के संचालन तथा प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण हेतु प्रभावी कार्ययोजना विकसित करने की आवश्यकता पर भी विशेष जोर दिया गया।

बैठक के अंत में निदेशक अतुल द्विवेदी ने सभी सम्मानित सदस्यों का आभार व्यक्त किया।

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