राजाजीपुरम में चक्रवर्ती राजगोपालाचारी की प्रतिमा लगाने की मांग
कॉलोनी का नामकरण जिनके नाम पर हुआ, वहीं नहीं है उनकी कोई प्रतिमा या स्मारक
लखनऊ। राजाजीपुरम क्षेत्र के निवासियों ने भारत रत्न एवं स्वतंत्र भारत के प्रथम भारतीय गवर्नर-जनरल चक्रवर्ती राजगोपालाचारी 'राजाजी' की भव्य प्रतिमा स्थापित करने की मांग की है। इस कॉलोनी का नामकरण भी इन्हीं के नाम पर हुआ था। इस संबंध में बुधवार को राजाजीपुरम में स्थानीय निवासियों की बैठक आयोजित हुई।
मुख्यमंत्री और सांसद से की गई मांग
बैठक में उपस्थित लोगों ने मुख्यमंत्री, स्थानीय सांसद और नगर विकास मंत्री से मांग की कि राजाजीपुरम आवास विकास कॉलोनी के किसी प्रमुख चौराहे अथवा पार्क में चक्रवर्ती राजगोपालाचारी की प्रतिमा स्थापित की जाए।
बैठक में डॉ. सुधा बाजपेयी, ए.के. सक्सेना, कृष्णावतार गुप्ता, अशोक कुमार, हीरालाल केशवानी, प्रकाश चंद्र श्रीवास्तव, अंजू गुप्ता, अरविंद प्रधान, मनोज कुमार बाजपेयी, शैलेन्द्र कुमार अस्थाना, राजन मिश्रा, प्राची गुप्ता और सत्यम द्विवेदी सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।
घनी आबादी वाले क्षेत्र में नहीं है कोई स्मारक
आनंद सक्सेना का कहना है कि राजाजीपुरम जैसे बड़े और घनी आबादी वाले क्षेत्र में राजगोपालाचारी के नाम पर वर्तमान में कोई प्रतिमा अथवा स्मारक नहीं है। उनका मानना है कि प्रमुख स्थान पर उनकी प्रतिमा स्थापित होने से युवा पीढ़ी को उनके राष्ट्रसेवा, स्वतंत्रता संग्राम और सार्वजनिक जीवन के आदर्शों से परिचित कराने में मदद मिलेगी।
कौन थे चक्रवर्ती राजगोपालाचारी
वरिष्ठ समाजसेवी कृष्ण अवतार गुप्ता ने बताया कि चक्रवर्ती राजगोपालाचारी स्वतंत्र भारत के पहले और अंतिम भारतीय गवर्नर-जनरल रहे। उन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई तथा असहयोग आंदोलन, नमक सत्याग्रह और भारत छोड़ो आंदोलन में भाग लिया। वे महात्मा गांधी के करीबी सहयोगियों में भी शामिल थे।
राजगोपालाचारी को वर्ष 1954 में भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'भारत रत्न' से सम्मानित किया गया था। वे राजनेता और प्रशासक होने के साथ-साथ साहित्यकार भी थे तथा रामायण और महाभारत पर उनके साहित्यिक कार्य उल्लेखनीय रहे।
प्रतिमा से मिलेगी आने वाली पीढ़ियों को प्रेरणा
स्थानीय निवासी मनोज बाजपेई ने कहा कि राजाजीपुरम के मुख्य चौराहे या किसी प्रमुख पार्क में उनकी प्रतिमा स्थापित होने से क्षेत्र की पहचान भी सार्थक होगी और आने वाली पीढ़ियों को उनके जीवन एवं राष्ट्रसेवा से प्रेरणा मिलेगी।
