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आगरा -भालूओं कों ठिठुरन से बचाने की कवायद शुरू

आगरा
  • By Kanhwizz Times
  • Reported By: Kritika pandey
  • Updated: December 8, 2025

कैनविज टाइम्स, डिजिटल डेस्क ।

आगरा में वाइल्डलाइफ एसओएस एवं वन विभाग के संयुक्त देखरेख में भालू संरक्षण एवं पुनर्वास केंद्र संचालित है। शीतकालीन ऋतु के चलते इस केंद्र में रह रहे भालुओं की तीमारदारी और मौसम अनरूप उनके संरक्षण के लिए कई इंतजाम प्रारंभ कर दिए गए हैं। वाइल्डलाइफ एसओएस के मीडिया प्रभारी श्रेष्ठ पचौरी ने बताया कि शीतकालीन ऋतु प्रारंभ हो चुकी है और तापमान में निरंतर गिरावट हो रही है इसको देखते हुए संरक्षण गृह में भालुओं की सुविधाओं और भोजन में भी बदलाव किया गया है अब भालुओं को केंद्र की तरफ से अधिक प्रोटीन युक्त स्वास्थ्यवर्धक भोजन को और बढ़ाया गया है जिसमें गर्म दलिया, चिकन सूप और बॉयल्ड एग और कुछ अन्य खाद्य पदार्थ शामिल किए गए हैं। वृद्ध, बीमार और आर्थिराइटिस से पीड़ित भालूओं के लिए सुरक्षा के साथ हीटर की भी व्यवस्था की गयी है।उनको दिन के समय धूप में अधिक समय बिताने के लिए प्रेरित किया जाता है। गौरतलब है कि इसकी शुरुआत आगरा में 1999 में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में की गई थी, वर्ष 2002 में इस केंद्र को पहला भालू सौंपा गया था। तब से लेकर अब तक भालुओं के संरक्षण एवं उनके पुनर्वास के लिए कई प्रयास किए गए हैं। वर्तमान में इस केंद्र में 88 भालू सुरक्षित हैं। स्लॉथ नस्ल भालुओं के संरक्षण का सबसे बड़ा केंद्र श्रेष्ठ पचौरी ने बताया कि विश्व में भालू की लगभग 8 नस्लेँ पाई जाती है जिनमें स्लाथ नस्ल के 90% भालू भारत में निवास करते हैं।आगरा के कीठम भालू संरक्षण गृह में इन दिनों स्लाथ 88 भालू रह रहे हैं जिनमे 39 नर और 49 मादा हैं। इन भालुओं को देश के कोने-कोने से रेस्क्यू किया गया है।स्लाथ भालू दुनिया भर में पाई जाने वाली आठ भालू की प्रजातियों में से एक है।इनकी पहचान इनके लंबे, झबरा गहरे भूरे या काले बाल, चार इंच लंबे नाखून से होती है, नाखूंनो का उपयोग वह टीले से दीमक और चींटियों को बाहर निकालने के लिए करते हैं। भारतीय उपमहाद्वीप में वे तटीय क्षेत्र, पश्चिमी घाट और हिमालय बेस तक फैले हुए हैं।

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