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एनबीएफजीआर द्वारा उर्वरकों के संतुलित उपयोग पर जागरूकता अभियान

एनबीएफजीआर
  • By Kanhwizz Times
  • Reported By: Dhirendra Mishra
  • Updated: April 23, 2026

लखनऊ, कैनविज टाइम्स संवाददाता। मेरा गांव मेरा गौरव कार्यक्रम के तहत गुरुवार को एनबीएफजीआर के वैज्ञानिक दल द्वारा लखनऊ के मोहनलालगंज ब्लाक के कोडरा रायपुर ग्राम में उर्वरकों के संतुलित उपयोग पर जागरूकता अभियान का आयोजन किया गया। इस पहल का उद्देश्य क्षेत्र में मछली पालन सहित विभिन्न खेत की फसलों में संतुलित उर्वरक के उपयोग के महत्व पर किसानों में जागरूकता पैदा करना था। उर्वरकों का संतुलित उपयोग मिट्टी के स्वास्थ्य को बनाए रखने, खेत की फसल और जलीय कृषि तालाब उत्पादकता बढ़ाने और दीर्घकालिक कृषि स्थिरता सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। कार्यक्रम में किसानों को रासायनिक उर्वरकों, विशेष रूप से यूरिया और डीएपी के अंधाधुंध और अत्यधिक उपयोग से होने वाली हानियों से अवगत कराया, जिसके कारण कई क्षेत्रों में पोषक तत्वों का असंतुलन हो गया है। कार्यक्रम के दौरान, विशेषज्ञों ने प्राकृतिक खेती, जैव उर्वरक, हरी खाद के प्रयोग और पशु अपशिष्ट से प्राप्त अन्य जैविक आदानों के उपयोग के माध्यम से मछली पालन की प्रथा को एकीकृत करने के महत्व पर प्रकाश डाला, जिससे एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन प्रथाओं को बढ़ावा मिल सके। मिट्टी के स्वास्थ्य को बढ़ाने और उत्पादकता बढ़ाने के लिए विभिन्न वर्षों में फसल चक्र का पालन करने पर जोर दिया गया। वैकल्पिक कृषि पद्धतियों पर भी चर्चा की गई। जागरूकता कार्यक्रम के दौरान भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, नई दिल्ली के विभिन्न संस्थानों द्वारा विकसित जैव उर्वरकों, जैव कीटनाशकों और बायोस्टिमुलेंट्स के बारे में जानकारी भी साझा की गई। गांव में पाया गया कि किसान मछली पालन गतिविधियों का अनुसरण कर रहे हैं तथा एक किसान द्वारा गेहूं-चावल की खेती के अलावा गेंदे के फूलों की खेती शुरू की गयी है। किसानों ने बताया कि नील गाय के खतरे के कारण उन्होंने अरहर जैसी दलहन फसल की खेती छोड़ दी है। हालांकि, कुछ किसान सब्जी और आम के बगीचे के अलावा उड़द की खेती कर रहे हैं। कार्यक्रम में अधिकारियों सहित 50 से अधिक व्यक्तियों ने भाग लिया। जिसमें 33 पुरुष और 12 महिला किसान उपस्थित थीं। कार्यक्रम संस्थान के निदेशक डॉ काजल चक्रवर्ती के निर्देशन में प्रधान वैज्ञानिक डॉ शरद कुमार सिंह व सहायक मुख्य तकनीकी अधिकारी डॉ अखिलेश कुमार मिश्र के समन्वयन में किया गया।

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