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दिल्ली के सरकारी अस्पतालों में मुफ्त दवा का दावा फेल, मरीजों को बाहर से खरीदनी पड़ रही दवाएं

नई दिल्ली
  • By Kanhwizz Times
  • Reported By: Kritika pandey
  • Updated: November 6, 2025

कैनविज टाइम्स, डिजिटल डेस्क ।

राजधानी दिल्ली में सरकार बदल गई, लेकिन सरकारी अस्पतालों के हालात अब भी जस के तस बने हुए हैं। दिल्ली सरकार के “मुफ्त दवा योजना” के दावे एक बार फिर झूठे साबित हो रहे हैं। दैनिक जागरण की पड़ताल में यह खुलासा हुआ है कि दिल्ली के प्रमुख सरकारी अस्पतालों में मरीजों को ओपीडी और भर्ती के दौरान भी दवाएं बाहर से खरीदनी पड़ रही हैं। दवा की भारी कमी, टेंडर प्रक्रिया में देरी और सप्लाई चेन की गड़बड़ियों ने स्वास्थ्य सेवाओं को बुरी तरह प्रभावित किया है। मरीजों को सर्दी, खांसी और बुखार जैसी सामान्य दवाएं भी अस्पताल से नहीं मिल पा रही हैं। नतीजतन, अस्पतालों के आसपास दवा का कारोबार तेजी से बढ़ रहा है और मेडिकल स्टोरों की बिक्री कई गुना बढ़ गई है। दिल्ली सरकार का दावा है कि राजधानी के सभी सरकारी अस्पतालों में नि:शुल्क दवाएं और उपचार उपलब्ध हैं, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां करती है। बढ़े हुए बजट के बावजूद अस्पतालों में दवाओं की उपलब्धता अधूरी है। ओपीडी में आए मरीजों से लेकर भर्ती मरीजों के तीमारदारों तक को बाहर से दवाएं खरीदनी पड़ रही हैं। सूत्रों के मुताबिक, मरीजों को हर चार में से दो दवाएं अस्पताल से नहीं मिलतीं। कई बार तो उन्हें जरूरी जीवनरक्षक दवाएं भी बाजार से खरीदनी पड़ती हैं। इस मुद्दे पर स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों और स्वास्थ्य मंत्री डॉ. पंकज सिंह से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन किसी ने भी प्रतिक्रिया नहीं दी। स्थिति यह है कि दिल्ली के लगभग सभी सरकारी अस्पतालों के आसपास मेडिकल स्टोरों का कारोबार करोड़ों में पहुंच गया है। यह हाल तब है जब सरकार ने स्वास्थ्य बजट में बढ़ोतरी के साथ ‘मुफ्त इलाज और दवा’ को प्राथमिकता देने का दावा किया था। दिल्ली के सरकारी अस्पतालों में “मुफ्त दवा” का वादा फिलहाल सिर्फ कागजों पर ही नजर आ रहा है। स्वास्थ्य सेवाओं की यह जमीनी सच्चाई सरकार के दावों की पोल खोल रही है और मरीजों को राहत की बजाय परेशानी झेलनी पड़ रही है।

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