• जब निजीकरण का अभी कोई निर्णय ही नहीं है, तो तत्काल निरस्त हो निजीकरण की कार्यवाही- संघर्ष समिति
लखनऊ, कैनविज टाइम्स संवाददाता। प्रदेश के ऊर्जा मंत्री अरविन्द कुमार शर्मा द्वारा उप्र विधान सभा में दिए गए वक्तव्य कि निजीकरण का अभी कोई निर्णय नहीं है, पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति उत्तर प्रदेश के केन्द्रीय पदाधिकारियों ने कहा कि जब निजीकरण का कोई निर्णय ही नहीं है तो पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण की चल रही प्रक्रिया तत्काल निरस्त कर कार्य का स्वस्थ वातावरण बनाया जाय। संघर्ष समिति ने कहा कि गत वर्ष 25 नवंबर 2024 को पॉवर कॉरपोरेशन के चेयरमैन डॉ आशीष गोयल ने पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण का एकतरफा ऐलान कर ऊर्जा निगमों में अनावश्यक तौर पर औद्योगिक अशांति का वातावरण बना दिया जिसके चलते बिजली कर्मचारी, संविदा कर्मी, जूनियर इंजीनियर और अभियंता विगत 13 माह से लगातार आंदोलन रत हैं। संघर्ष समिति ने कहा कि निजीकरण के नाम पर ट्रांजैक्शन कंसलटेंट नियुक्त किया गया और इस प्रक्रिया में करोड़ों रुपए खर्च किया गया। अवैध ढंग से नियुक्त ट्रांजैक्शन कंसल्टेंट ग्रांट थॉर्टन द्वारा निजीकरण का आर एफ पी डॉक्यूमेंट तैयार किया गया। इसी आर एफ पी डॉक्यूमेंट को पॉवर कॉरपोरेशन प्रबन्धन ने उप्र विद्युत नियामक आयोग को भेजा जिस पर विद्युत नियामक आयोग ने आपत्तियां दर्ज कर इसे पॉवर कॉरपोरेशन को वापस कर दिया। संघर्ष समिति ने कहा कि निदेशक वित्त के पद पर विवादित निधि नारंग को इसी निजीकरण के नाम पर तीन बार सेवा विस्तार दिया गया। इन सबमें करोड़ों रुपए खर्च डालने के बाद अब यह पता चल रहा है कि निजीकरण का कोई निर्णय ही नहीं है। संघर्ष समिति ने कहा कि बिजली कर्मी आंदोलन के साथ उपभोक्ताओं की समस्याओं को सर्वोच्च प्राथमिकता पर अटेंड कर रहे हैं। आंदोलन के कारण उपभोक्ताओं को कोई दिक्कत न हो अतः आंदोलन में विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है। समिति ने कहा कि जब ऊर्जा मंत्री के अनुसार निजीकरण का अभी निर्णय ही नहीं है तो निजीकरण की सारी प्रक्रिया तत्काल निरस्त कर बिजली कर्मियों को विश्वास में लेकर बिजली व्यवस्था को देश में नम्बर एक बनाने का कार्य शुरू किया जाय। निजीकरण के विरोध में चल रहे लगातार आंदोलन के 394वें दिन बिजली कर्मियों ने प्रदेश भर में समस्त जनपदों में व्यापक विरोध प्रदर्शन जारी रखा।
