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बीबीएयू में महिला उद्यमिता पर मंथन, नवाचार और आत्मनिर्भरता को बताया विकास की कुंजी

बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय में महिला उद्यमिता पर कार्यक्रम आयोजित, विशेषज्ञों ने मिलेट्स, माइक्रोग्रीन्स को बताया नए अवसर।
  • By Kanhwizz Times
  • Reported By: Shivam Srivastava
  • Updated: August 25, 2026

लखनऊ। बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय (बीबीएयू) में सोमवार को महिला उद्यमिता को बढ़ावा देने और महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के उपायों पर गहन मंथन हुआ। इंस्टीट्यूशन इनोवेशन काउंसिल, डिपार्टमेंट ऑफ फूड एंड न्यूट्रीशन तथा सेंटर फॉर इनोवेशन, इनक्यूबेशन एंड इंटरप्रेन्योरशिप के संयुक्त तत्वावधान में 'महिला उद्यमिता' विषय पर विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया।

मिलेट्स और माइक्रोग्रीन्स बन सकते हैं नए अवसर

कार्यक्रम में मुख्य वक्ता प्रो. सुनीता मिश्रा ने सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) को स्थानीय स्तर पर अपनाने की जरूरत बताते हुए कहा कि इससे सामाजिक, आर्थिक और पर्यावरणीय क्षेत्रों में सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है। उन्होंने बताया कि स्वस्थ एवं पौष्टिक आहार के प्रति बढ़ती जागरूकता के कारण मिलेट्स, माइक्रोग्रीन्स और अन्य पोषक खाद्य पदार्थों की मांग तेजी से बढ़ रही है, जो महिला उद्यमिता के लिए नए द्वार खोल सकते हैं।

उन्होंने कहा कि महिलाएं इन क्षेत्रों में उद्यम स्थापित कर आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने के साथ-साथ स्वस्थ समाज के निर्माण और सतत विकास लक्ष्यों की प्राप्ति में भी अपना योगदान दे सकती हैं।

उद्यमिता एक महत्वपूर्ण जीवन कौशल: प्रो. शैलजा दीक्षित

पंडित सुंदरलाल शर्मा केंद्रीय व्यावसायिक शिक्षा संस्थान, भोपाल की प्रो. शैलजा दीक्षित ने ऑनलाइन माध्यम से संबोधित करते हुए कहा कि उद्यमिता केवल व्यवसाय करने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक महत्वपूर्ण जीवन कौशल है। इससे पहल करने, समस्या का समाधान खोजने, नवाचार, निर्णय लेने, वित्तीय समझ, आत्मविश्वास और जोखिम उठाने जैसी क्षमताओं का विकास होता है।

किरण मजूमदार-शॉ और नायका का दिया उदाहरण

इंस्टीट्यूशन इनोवेशन काउंसिल, बीबीएयू के अध्यक्ष प्रो. नवीन कुमार अरोड़ा ने कहा कि महिला उद्यमिता के क्षेत्र में तेजी से बदलाव हो रहा है। उन्होंने किरण मजूमदार-शॉ और नायका जैसी सफल महिला उद्यमियों एवं कंपनियों का उदाहरण देते हुए कहा कि नवाचार, नेतृत्व और दृढ़ संकल्प के माध्यम से महिलाएं उद्यमिता के क्षेत्र में अपनी पहचान बना रही हैं।

उन्होंने विश्वविद्यालय की सेक्शन-8 कंपनी 'नवकल्पना' का उल्लेख करते हुए कहा कि इस तरह के प्रयास विद्यार्थियों में नवाचार और उद्यमशीलता की भावना विकसित करने में सहायक हैं। साथ ही उन्होंने शिक्षकों से विद्यार्थियों के साथ नियमित ब्रेनस्टॉर्मिंग गतिविधियां आयोजित करने का आह्वान किया।

कार्यक्रम की रूपरेखा

कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन एवं बाबासाहेब डॉ. भीमराव अम्बेडकर के चित्र पर पुष्पांजलि से हुई। डिपार्टमेंट ऑफ फूड एंड न्यूट्रीशन की विभागाध्यक्ष प्रो. नीतू सिंह ने अतिथियों और प्रतिभागियों का स्वागत किया। आयोजन समिति की ओर से शिक्षकों को पौधे भेंट कर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम के अंत में मुख्य वक्ता को स्मृति चिह्न प्रदान किया गया तथा डॉ. माधवी डेनियल ने धन्यवाद ज्ञापित किया।

इस अवसर पर प्रो. शालिनी अग्रवाल, प्रो. शूरा दारापुरी, डॉ. प्रियंका शंकर सहित शिक्षक, शोधार्थी एवं विद्यार्थी मौजूद रहे।

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