कैनविज टाइम्स, डिजिटल डेस्क ।
भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) भूषण गवई ने बुधवार को मुंबई के बांद्रा (पूर्व) में बनने वाले नए बॉम्बे उच्च न्यायालय भवन की आधारशिला रखने के बाद कहा कि न्यायालय का परिसर "न्याय का मंदिर" होना चाहिए, "सात सितारा होटल" नहीं। उन्होंने कहा कि इस नए भवन के निर्माण में फिजूलखर्ची से बचा जाए और इसे लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप बनाया जाए। सीजेआई ने कार्यक्रम के दौरान कहा कि “कुछ अखबारों में पढ़ा कि नई इमारत बहुत फिजूलखर्ची वाली है। इसमें दो न्यायाधीशों के लिए साझा लिफ्ट की व्यवस्था है। हमें याद रखना चाहिए कि न्यायाधीश अब सामंती प्रभु नहीं रहे, बल्कि आम नागरिकों की सेवा के लिए नियुक्त होते हैं।” उन्होंने कहा कि न्यायिक परिसरों की योजना बनाते समय केवल न्यायाधीशों की जरूरतों पर नहीं, बल्कि वादियों की आवश्यकताओं पर भी ध्यान देना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि यह उनकी महाराष्ट्र की अंतिम यात्रा है, क्योंकि वह 24 नवंबर 2025 को पद से सेवानिवृत्त होने वाले हैं। सीजेआई ने कहा कि उन्हें गर्व है कि वह अपने गृह राज्य में सर्वश्रेष्ठ न्यायालय भवन की नींव रखकर अपना कार्यकाल समाप्त कर रहे हैं। कार्यक्रम में महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भी हिस्सा लिया। उन्होंने कहा कि नया भवन बॉम्बे उच्च न्यायालय के मौजूदा ऐतिहासिक ढांचे का पूरक होगा, जो 1862 से देश के न्यायिक इतिहास का एक महत्वपूर्ण प्रतीक रहा है। फडणवीस ने बताया कि पुराने हाईकोर्ट भवन का निर्माण मात्र 16,000 रुपये में हुआ था और उसमें 300 रुपये की बचत भी की गई थी। उन्होंने वास्तुकार हफीज कॉन्ट्रैक्टर से यह सुनिश्चित करने का आग्रह किया कि नया भवन “भव्य तो हो, पर लोकतांत्रिक, साम्राज्यवादी नहीं।सीजेआई भूषण गवई ने अपने संबोधन के अंत में कहा कि न्यायपालिका, विधायिका और कार्यपालिका, तीनों को संविधान की भावना के तहत समाज को न्याय देने के लिए मिलकर काम करना चाहिए।
