राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद ने मुख्यमंत्री को भेजा ज्ञापन, लंबित समस्याओं के समाधान की मांग
लखनऊ। राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद ने प्रदेश के कर्मचारियों की विभिन्न लंबित समस्याओं के समाधान की मांग को लेकर मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर तत्काल संज्ञान लेने का अनुरोध किया है। परिषद के अध्यक्ष जे.एन. तिवारी ने कहा कि कर्मचारियों की कई समस्याएं पिछले दो वर्षों से अधिक समय से लंबित हैं और बार-बार अनुरोध किए जाने के बावजूद उनका समाधान नहीं हो सका है।
जे.एन. तिवारी के अनुसार, मुख्य सचिव एवं प्रमुख सचिव कार्मिक के समक्ष कई बार समस्याएं उठाई गईं, लेकिन कर्मचारियों की मांगों पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने कहा कि विभिन्न विभागों में रिक्त पदों को नहीं भरे जाने के कारण मौजूदा कर्मचारियों पर कार्यभार बढ़ गया है, जिसका उनके स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल असर पड़ रहा है।
परिषद द्वारा कराए गए एक सर्वे का हवाला देते हुए उन्होंने दावा किया कि कार्यभार की अधिकता के कारण 10 से 15 प्रतिशत कर्मचारी अवसाद की स्थिति से जूझ रहे हैं। उन्होंने समय से पदोन्नति नहीं होने के कारण कर्मचारियों में असंतोष और कुंठा बढ़ने की बात भी कही।
वेतन विसंगतियों और आठवें वेतन आयोग का मुद्दा
जे.एन. तिवारी ने कहा कि केंद्र में आठवें वेतन आयोग का गठन हो चुका है और उसकी रिपोर्ट आने की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। वहीं, उत्तर प्रदेश में वेतन समिति 2016 की संस्तुतियों से संबंधित कई संवर्गों की वेतन विसंगतियां मुख्य सचिव समिति के स्तर पर लंबित हैं।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2001 के बाद सृजित पदों के सापेक्ष विज्ञापित पदों पर नियमानुसार गठित चयन समिति के माध्यम से नियुक्त संविदा कर्मचारियों को नियमित करने के लिए पिछले 25 वर्षों में कोई नियमावली जारी नहीं की गई है।
पुरानी पेंशन और चिकित्सा सुविधाओं की भी मांग
संयुक्त परिषद ने पुरानी पेंशन योजना बहाल करने की मांग भी उठाई है। परिषद का कहना है कि नई पेंशन योजना से आच्छादित कर्मचारियों को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
संगठन ने गंभीर बीमारियों की स्थिति में कर्मचारियों को चिकित्सा प्रतिपूर्ति अथवा कैशलेस इलाज की सुविधा देने, आशा बहुओं, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं तथा नियत मानदेय एवं प्रोत्साहन राशि पर कार्य करने वाले कर्मचारियों के लिए न्यूनतम मानदेय निर्धारित करने सहित अन्य मांगों के समाधान की भी मांग की है।
12 लाख कर्मचारियों और 16 लाख पेंशनर्स में आक्रोश का दावा
परिषद अध्यक्ष जे.एन. तिवारी ने दावा किया कि प्रदेश के करीब 12 लाख राज्य कर्मचारी, 16 लाख पेंशनर्स, अधिशासी निकायों में कार्यरत कर्मचारी, आउटसोर्स कर्मचारी और असंगठित क्षेत्र में कार्य करने वाले कर्मचारियों में सरकार के प्रति असंतोष बढ़ रहा है।
उन्होंने आरोप लगाया कि कर्मचारी संगठनों और सरकार के सक्षम स्तर के बीच संवादहीनता की स्थिति बनी हुई है। परिषद ने प्रशासनिक स्तर पर कर्मचारियों की समस्याओं को लेकर संवेदनशीलता के साथ संवाद स्थापित करने की मांग की है।
जे.एन. तिवारी ने यह भी आरोप लगाया कि कार्मिक विभाग से नियंत्रित होने वाले संगठनों के पदाधिकारियों के नियमानुसार जारी होने वाले सचिवालय प्रवेश पत्र पर रोक लगाए जाने से कर्मचारी संगठनों और प्रशासन के बीच बातचीत का रास्ता प्रभावित हुआ है।
मुख्यमंत्री से संवाद स्थापित करने की अपील
संयुक्त परिषद के अध्यक्ष जे.एन. तिवारी ने मुख्यमंत्री को भेजे पत्र में अनुरोध किया कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में संवाद स्थापित करने की प्रक्रिया बंद नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों की बहुत सी समस्याओं का समाधान आपसी बातचीत के माध्यम से किया जा सकता है।
परिषद के अनुसार, उच्च प्रशासनिक स्तर पर संवादहीनता के कारण कर्मचारियों की समस्याएं लंबित हो रही हैं और उन्हें आंदोलन की ओर बढ़ने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
