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शंख एयरलाइंस' के मालिक की कहानी: श्रवण बोले-रिस्क उठाने से डरता तो टेंपो ही चलता रह जाता, ऐसे हुई शुरूआत

शंख एयरलाइंस के फाउंडर श्रवण कुमार विश्वकर्मा का कहना है कि हवाई जहाज लग्जरी नहीं, बल्कि आम आदमी के लिए ट्रांसपोर्ट का साधन है।
  • By Kanhwizz Times
  • Reported By: Admin
  • Updated: January 3, 2026

शंख एयरलाइंस' के मालिक की कहानी: श्रवण बोले-रिस्क उठाने से डरता तो टेंपो ही चलता रह जाता, ऐसे हुई शुरूआत

शंख एयरलाइंस के फाउंडर श्रवण कुमार विश्वकर्मा का कहना है कि हवाई जहाज लग्जरी नहीं, बल्कि आम आदमी के लिए ट्रांसपोर्ट का साधन है। 2000 करोड़ के शुरुआती निवेश से शुरू हो रही एयरलाइन का लक्ष्य चार साल में 100 एयरक्राफ्ट का बेड़ा खड़ा करना और गांव-कस्बों के लोगों को सस्ती उड़ान का विकल्प देना है। एयरलाइन कोई लग्जरी नहीं है बल्कि यह भी एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाने के लिए ट्रांसपोर्ट का एक माध्यम भर है। इस लग्जरी टैग की वजह से ही आम आदमी इस पर बैठने से झिझकता है।  गांव कस्बों से लेकर छोटे शहरों तक में रहने वाले करोड़ों आम लोगों की इसी झिझक को दूर करेगी शंख एयरलाइंस। कभी कानपुर से उन्नाव के बीच टेंपो चलाकर आज शंख एयरलाइंस की नींव डालने वाले श्रवण कुमार विश्वकर्मा ने अपनी इस सोच को  खास बातचीत में खुलकर साझा किया। कॉमन मैन'' फ्लाइट के टैग के साथ बाजार में उतरे शंख एयरलाइंस के फाउंडर ने कहा कि देश में औसत फ्लाइट 2 घंटे की होती है। इन 2 घंटे में आपको ऐसी कौन सी लग्जरी चाहिए. आपको लग्जरी चाहिए है तो कम समय में सस्ती टिकट पर अपने गंतव्य को जाइए और फिर आराम का समय बताएं। लेकिन अगर आप लग्जरी यात्रा चाहते हैं तो हमारे एयरबस में बिजनेस क्लास भी होगा। टिकट की आसमान छूती कीमतों पर कहा कि मेरी फ्लाइट का टिकट अगर सुबह 10:00 बजे 7000 का है तो शाम के 6:00 तक 7000 ही रहेगा। इसका मतलब ये नहीं कि बिजनेस को घाटे पर चलाना है लेकिन इस तरह का पैसा नहीं चाहिए। अगर मेरे अंदर की आत्मा गवारा नहीं करेगी तो मुझे पैसा नहीं चाहिए। मुझे पैसे की कीमत पता है क्योंकि मैंने अपना बिजनेस शून्य से शुरू किया है। अपने रिस्क पर शुरू किया है और आज जहां भी हूं अपने रिस्क और अपने फैसलों पर की वजह से हूं। सवारी नहीं होगी तो टेंपो हो जहाज, नहीं चलेगा

श्रवण ने देसी भाषा में समझाया कि अगर सवारी नहीं रहेगी तो चाहे टेंपो हो, बस हो, ट्रेन हो या हवाई जहाज.. कोई धंधा नहीं चलेगा। सवारी रहेगी तभी बिजनेस भी राजा की तरह चलेगा। हमें समझना होगा कि यह सिर्फ ट्रांसपोर्ट का एक साधन है ना की लग्जरी। उन्होंने बताया कि शंख एयरलाइन 4 साल की मेहनत है। मैं केवल हाई स्कूल तक पढ़ा हूं। एक मध्यवर्ग परिवार में पला बढ़ा हूं। पढ़ लिखकर कहीं अच्छी नौकरी ही मेरी भी सोच थी।

आखिर टेंपो चलते-चलते जहाज उड़ाने का फैसला कैसे कर लिया, इस सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि बहुत कुछ आपके हाथ में नहीं होता है लेकिन समय के साथ अपने आप इस दिशा में आगे बढ़ता गया। टेंपो के बाद सीमेंट, माइनिंग का काम किया, लोहे का काम किया फिर ट्रक खरीदे और 450 ट्रकों का एक अच्छा खासा बेड़ा तैयार किया। बहुत संघर्ष किया। बीच में ऐसे भी कई फैसले थे जिससे मुझे नुकसान हुआ लेकिन उन गलतियों से सीखा और आगे बढ़ा। फिर बोले कुछ अलग करना है तो रिस्क तो लेना ही पड़ेगा।

एयरलाइंस में उधारी नहीं, इसलिए पसंद आया ये सेक्टर

श्रवण कुमार विश्वकर्मा कहते हैं कि अपने पिछले व्यापारिक अनुभव से मैंने यह सीखा कि घाटा वहीं पर होता है जहां पर उधारी ज्यादा हो जाती है। एयरलाइंस के बिजनेस में आने की एक वजह यह भी है कि इसमें उधार नहीं है। बोले, शरीर में खून और बिजनेस में कैश फ्लो जिसने मेंटेन कर लिया, वह कभी मर नहीं सकता।

श्रवण कुमार कहते हैं कि मैं भले ही कम पढ़ा लिखा हूं लेकिन मेरी टीम बहुत ही टेक्निकल अपडेटेड है। यह टीमवर्क से ही हो सकता है। मेरा काम फंड्स को मैनेज करना और फैसला लेना है जो मैं कर रहा हूं।

जो एयरलाइंस बंद हो गई हैं। उस बारे में उन्होंने कहा कि मैं कभी निगेटिव नहीं सोचता हूं। उन्होंने कहा कि मेरा अपना वर्किंग स्टाइल है और मेरा अपना विजन है और मेरा अपना बिजनेस प्लान है और मैं उस पर चलूंगा। यात्रियों की संख्या इतनी बढ़ा दूंगा कि घाटा नहीं होगा

नई एयरलाइंस के नाते प्राइस बार का सामना कैसे करेंगे इस सवाल पर उन्होंने कहा कि मेरे पास उसकी पूरी प्लानिंग है और सबसे सीधी सी बात मुझे डर नहीं लगता। मुझे ग्राहकों की संख्या बढ़ाना है। आम लोगों की पहुंच तक हवाई जहाज को पहुंचाना है। 

इस दिशा में मेरा सबसे बड़ा काम यही होगा कि मैं लोगों के बीच यह मिथ दूर करूंगा कि एयरपोर्ट या फ्लाइट लग्जरी का साधन है। आखिर उसे एक-दो घंटे की फ्लाइट में ही हम सारी लग्जरी क्यों ढूंढ रहे हैं और जिन्हें यह लग्ज़री चाहिए, उनके लिए हमारा बिजनेस क्लास भी होगा।

श्रवण कुमार ने कहा कि आम लोगों के पास आज आर्थिक रूप से उतनी समस्या नहीं है और वह भी हवाई जहाज में उड़ने की क्षमता रखते हैं लेकिन झिझक और डर के कारण वह इसकी टिकट खरीदने से डरते हैं और मुझे उसे डर को ही दूर करना है। उन लोगों को हम हवाई जहाज तक लाएंगे, जो पैसे की वजह से नहीं बल्कि झिझक और डर की वजह से हवाई जहाज में नहीं बैठते हैं। एक बात समझनी होगी कि किसी भी देश चलाना हो या बिजनेस, मिडिल क्लास को शामिल किए बिना नहीं संभव नहीं है।

शंख मेरी जिंदगी का हिस्सा

शंख हमारी जिंदगी से जुड़ा है।मेरे पिता रोजाना शंख का इस्तेमाल करते थे। इसलिए कंपनी का नाम शंख रखा।

तीन एयरबस से शुरुआत

अपने बिजनेस विस्तार के बारे में बताया कि अभी तीन एयरबस 320 ला रहे हैं। दो अगस्त सितंबर तक आएंगे। मेरा लक्ष्य है कि मार्च से अप्रैल के बीच में फ्लाइट्स का संचालन शुरू कर दूं। इसकी शुरुआत लखनऊ दिल्ली मुंबई कोलकाता हैदराबाद समेत मेट्रो शहरों से होगी और इसे गोरखपुर प्रयागराज कानपुर जैसे यूपी के मेट्रोपोलिटन जिलों से कनेक्ट किया जाएगा। एयरक्राफ्ट की संख्या बढ़ाने के साथ ही हम पूरे पैन इंडिया में दिखाई देंगे।

शुरुआत 2000 करोड़ से, अगले 4 साल में 100 एयरक्राफ्ट होंगे

उन्होंने कहा कि अभी तीन एयरक्राफ्ट पर करीब 2000 करोड़ का निवेश किया है। अगले 3 साल में शंख एयरलाइंस दुनिया भर के प्रमुख शहरों में अपनी उड़ने भरेगी। अगले 4 साल में शंख एयरलाइंस में 100 एयरक्राफ्ट की फ्लीट होगी। उन्होंने साफ कहा कि कि अगर बिजनेस में सफलता पानी है तो एयरक्राफ्ट की संख्या ज्यादा होनी चाहिए वरना आप सरवाइव नहीं कर पाएंगे।
 

 

एकाधिकार तोड़ना और हवाई चप्पल पहनने वाले को जहाज पर बैठाना लक्ष्य

उन्होंने अपने ट्रक बिजनेस को लेकर कहा कि यह मैंने वहां से सीखा कि अगर आपके पास फ्लीट है तभी आप सफल हो पाएंगे और बेहतर सर्विस दे पाएंगे। उन्होंने कहा कि स्थापित प्रतिस्पद्र्धन की चुनौतियों का सामना करने के लिए हमें संख्या बढ़ानी होगी।

तभी हम मोनोपोली तोड़ पाएंगे। उन्होंने ठसक के साथ कहा कि मैं यह एकाधिकार तोड़ दूंगा कि एयरलाइंस केवल लग्जरी ट्रांसपोर्ट है और यह मेरा वादा है कि हवाई चप्पल पहनने वाला हवाई जहाज का सफर करेगा।

घाटे का डर होता तो टेंपो ही चलाता रह जाता

अपने जमी जमा ट्रांसपोर्ट बिजनेस और सुकून भरी जिंदगी के बीच एयरलाइंस में निवेश के खतरे भरे फैसले पर घर या करीबियों ने टोका नहीं, इस पर श्रवण ने कहा ki जम जम धंधा तो टेंपो से ही था। वहां भी मेरी लाइफ सेट थी। यह तो आपको सोचना है कि कहां जाकर ठहरना है। 

तूने कहा कि यह पैसा, यह बिजनेस मैंने खुद खड़ा किया है और मैं अपनी मर्जी से ही आगे भी काम करूंगा। यदि आपके पास विजन है तो आप असफल होने की संभावनाएं न्यूनतम हो जाती हैं। मेरे फैसले शुरू में भी ऐसे ही थे और आगे भी इसी तरह के रहेंगे।

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