लखनऊ, कैनविज टाइम्स संवाददाता। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से अपील की है कि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण का निर्णय निरस्त कर उत्तर प्रदेश में पिछले 16 साल से चल रहे आगरा फ्रेंचाइजी के निजीकरण के प्रयोग की समीक्षा की जाए। जहां फ्रेंचाइजी के चलते पावर कारपोरेशन को अब तक लगभग 30 अरब रुपए का घाटा हो चुका है। 23 दिसंबर को भारत रत्न पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह का जन्मदिन और किसान दिवस होने के कारण संघर्ष समिति ने निर्णय लिया है कि बिजली कर्मियों, ट्रेड यूनियनों और किसान संगठनों का निजीकरण के विरोध में प्रदर्शन अब 23 दिसंबर के बजाय उत्तर प्रदेश के समस्त जनपदों में 24 दिसंबर को होगा। संघर्ष समिति ने कहा कि उप्र विधान सभा में निजीकरण पर चर्चा के दौरान ऊर्जा मंत्री ने आगरा और ग्रेटर नोएडा के निजीकरण का हवाला दिया। इसलिए और जरूरी हो जाता है कि प्रदेश में निजीकरण का नया प्रयोग करने के पहले आगरा फ्रेंचाइजी और ग्रेटर नोएडा की निजी कंपनी के परफार्मेंस की गहन समीक्षा की जाय और निजीकरण का प्रयोग विफल रहने की स्थिति में ग्रेटर नोएडा और आगरा के निजीकरण के करार रद्द किए जाय। संघर्ष समिति ने बताया कि वर्ष 2024-25 में आगरा में पावर कारपोरेशन ने टोरेंट पावर कंपनी को लगभग 2500 मिलियन यूनिट बिजली की आपूर्ति की है। ध्यान देने की बात यह है कि पावर कॉरपोरेशन ने यह बिजली 05 रुपए 65 पैसे प्रति यूनिट की दर से खरीदा और टोरेंट पॉवर कंपनी को मात्र 04 रुपए 29 पैसे प्रति यूनिट की दर पर बेचा। इस प्रकार पावर कारपोरेशन को प्रति यूनिट 01 रुपए 36 पैसे का नुकसान हुआ है। वर्ष 2024-25 में आगरा फ्रेंचाइजी करार के कारण इस प्रकार लगभग 340 करोड रुपए का नुकसान पावर कॉरपोरेशन ने उठाया है। चालू वित्तीय वर्ष में भी पॉवर कॉरपोरेशन लगभग 300 करोड़ रुपए का नुकसान उठा चुका है। संघर्ष समिति ने कहा कि इसके पहले 01 अप्रैल 2010 से 31 मार्च, 2024 तक पावर कॉरपोरेशन महंगी दरों पर बिजली खरीद कर सस्ती दरों पर टोरेंट पावर कंपनी को देता रहा और इस तरह लगभग 2434 करोड रुपए का नुकसान उठा चुका है। वर्ष 2024-25 के और चालू वित्तीय वर्ष के नुकसान को जोड़ देने पर इस मद में पॉवर कॉरपोरेशन को 3000 करोड़ रुपए से अधिक का नुकसान हो चुका है। इसके अतिरिक्त पॉवर कॉरपोरेशन का राजस्व का 2200 करोड रुपए का बकाया आज तक टोरेंट पावर कंपनी ने पावर कारपोरेशन को नहीं दिया है। संघर्ष समिति ने कहा कि पॉवर कारपोरेशन प्रबन्धन पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण की जल्दबाजी में है तो उसे यह भी बताना चाहिए कि आगरा के निजीकरण का क्या परिणाम रहा है ? संघर्ष समिति ने कहा कि घाटे के झूठे आंकड़े देकर निजीकरण की वकालत करने वाला प्रबंधन आगरा फ्रैंचाइजी पर चुप्पी क्यों साधे हुए है। निजीकरण के विरोध में चल रहे लगातार आंदोलन के 390वें दिन बिजली कर्मियों ने प्रदेश भर में समस्त जनपदों में व्यापक विरोध प्रदर्शन जारी रखा।
