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UP Institute of Forensic Science लखनऊ का चौथा स्थापना दिवस संपन्न, बोले डॉ. गोस्वामी – "दुनिया से आगे रहो

लखनऊ स्थित उत्तर प्रदेश स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेंसिक साइंस (UPSIFS) का चौथा स्थापना दिवस मनाया गया। जानें संस्थापक निदेशक डॉ. जी.के. गोस्वामी और अन्य अतिथियों ने छात्रों को क्या संदेश दिया।
  • By Kanhwizz Times
  • Reported By: Shivam Srivastava
  • Updated: August 19, 2026

उत्तर प्रदेश स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेंसिक साइंस, लखनऊ का चौथा स्थापना दिवस धूमधाम से संपन्न

"जब तक दुनिया जागे, तब तक आप आगे हों" — डॉ. जी.के. गोस्वामी का छात्रों को संदेश

लखनऊ। उत्तर प्रदेश स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेंसिक साइंस (UPSIFS) का चौथा स्थापना दिवस मंगलवार को संस्थान परिसर में हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। कार्यक्रम की शुरुआत संस्थापक निदेशक डॉ. जी.के. गोस्वामी ने मुख्य अतिथियों के साथ दीप प्रज्जवलित कर की।

इस अवसर पर संस्थापक निदेशक डॉ. जी.के. गोस्वामी तथा अपर निदेशक हेमराज मीना ने विशिष्ट अतिथि वक्ताओं — उप महानिरीक्षक (तकनीकी सेवाएं) आशीष तिवारी, पुलिस मुख्यालय के पुलिस अधीक्षक डॉ. सतीश कुमार, डीसीपी उत्तरी अमित कुमार आनन्द और मिलिन्द राज — को स्मृति चिन्ह भेंटकर सम्मानित किया।

"कानूनी, फॉरेंसिक और तकनीकी ज्ञान को एक साथ जोड़ें" — डॉ. गोस्वामी

छात्र-छात्राओं को संबोधित करते हुए डॉ. गोस्वामी ने बताया कि संस्थान ने अपनी शैक्षणिक यात्रा के तीन वर्ष पूर्ण कर चौथे वर्ष में प्रवेश कर लिया है। उन्होंने बताया कि यह संस्थान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की महत्वाकांक्षी परियोजनाओं में से एक है, और बीते तीन वर्षों में संस्थान ने कई नए आयाम हासिल किए हैं।

उन्होंने विद्यार्थियों को सलाह दी कि वे अपने कानूनी ज्ञान, फॉरेंसिक समझ और तकनीकी दक्षता को एकीकृत कर समग्र रूप से विकसित हों, क्योंकि आज की समझ ही आने वाले कल की नेतृत्व क्षमता तय करेगी। उन्होंने वैश्विक बदलावों का ज़िक्र करते हुए कहा कि संस्थान का लक्ष्य है कि दुनिया के जागने से पहले ही छात्र उससे कहीं आगे निकल चुके हों।

डीआईजी आशीष तिवारी: "एआई चुनौती भी है, अवसर भी"

डीआईजी आशीष तिवारी ने छात्रों को इस अग्रणी संस्थान में प्रवेश पाने के लिए भाग्यशाली बताया और कहा कि यहां से बहुत कुछ हासिल किया जा सकता है, बशर्ते दृढ़ संकल्प हो। उन्होंने कहा कि यह संकल्प ही छात्रों को आगे बढ़ाएगा और वे यहां से केवल नौकरी तलाशने वाले नहीं बल्कि "जॉब क्रिएटर" भी बन सकते हैं। उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को एक ओर चुनौती तो दूसरी ओर नए अवसरों का स्रोत बताया।

डॉ. सतीश कुमार: "किताबें आपकी सबसे अच्छी दोस्त हैं"

पुलिस अधीक्षक डॉ. सतीश कुमार ने कहा कि जो आज ही अपने लक्ष्य की योजना बनाएगा, वही सफल होगा। उन्होंने छात्रों को प्रतिदिन कम से कम 20 पन्ने पढ़ने और नियमित रूप से समाचार पत्र पढ़ने की सलाह दी, जो प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में सहायक होगा। साथ ही उन्होंने स्वस्थ जीवनशैली के लिए नियमित शारीरिक व्यायाम पर भी जोर दिया।

डीसीपी अमित कुमार आनन्द: "जीवन जटिल से सरल की ओर यात्रा है"

डीसीपी उत्तरी अमित कुमार आनन्द ने छात्रों को नई जीवन यात्रा की शुभकामनाएं दीं और कहा कि जीवन निरंतर सीखने का नाम है — जो जितना सीखेगा, उतना आगे बढ़ेगा। उन्होंने कहा कि जीवन मूलतः जटिलता से सरलता की ओर बढ़ने की प्रक्रिया है, और संस्थान का यह पूरा प्रयास छात्रों को भविष्य के लिए तैयार करने का है।

अपर निदेशक हेमराज मीना ने जताया आभार

कार्यक्रम के अंत में उप महानिरीक्षक हेमराज मीना ने संस्थान की ओर से सभी अतिथियों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि अपनों से दूर रहकर पढ़ाई करना कठिन होता है, लेकिन कुछ बनने के लिए यह त्याग जरूरी है। उन्होंने छात्रों को उनके माता-पिता की उम्मीदों को पूरा करने के लिए प्रेरित किया।

कार्यक्रम में ये रहे मौजूद

इस अवसर पर उप निदेशक जितेन्द्र श्रीवास्तव, चिरंजीव मुखर्जी, अतुल यादव, पीआरओ संतोष तिवारी सहित फैकल्टी सदस्य डॉ. सपना शर्मा, डॉ. श्रुतिदास गुप्ता, डॉ. प्रीती, डॉ. शाश्या मिश्र, डॉ. कमलेश दुबे और डॉ. पोरवी सिंह आदि उपस्थित रहे।

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