तकनीकी शिक्षा और नवाचार से देश के विकास में योगदान दें विद्यार्थी
लखनऊ। डॉ. शकुन्तला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय के फैकल्टी ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी में बीटेक के नवप्रवेशित विद्यार्थियों के इंडक्शन प्रोग्राम का आयोजन किया गया। मां सरस्वती की पूजा-अर्चना एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ कार्यक्रम की शुरुआत हुई। वक्ताओं ने विद्यार्थियों से तकनीकी शिक्षा के साथ शोध, नवाचार, व्यावहारिक कौशल और रचनात्मक सोच विकसित कर देश के तकनीकी विकास में योगदान देने का आह्वान किया।
प्रयोगशाला, प्रोजेक्ट और शोध पर विशेष जोर: प्रो. सीके दीक्षित
फैकल्टी ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी के निदेशक प्रो. सीके दीक्षित ने अतिथियों का स्वागत करते हुए विद्यार्थियों को फैकल्टी एवं विभागों की शैक्षणिक गतिविधियों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि वर्तमान दौर तकनीक और नवाचार का है। विद्यार्थियों को सैद्धांतिक ज्ञान के साथ प्रयोगशाला, प्रोजेक्ट, शोध और व्यावहारिक प्रशिक्षण पर विशेष ध्यान देना चाहिए।
उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग, डेटा साइंस, रोबोटिक्स, इंटरनेट ऑफ थिंग्स और ऑटोमेशन जैसी तकनीकों की जानकारी हासिल करने के साथ समस्या समाधान की क्षमता विकसित करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने स्टार्टअप, उद्यमिता, इंटर्नशिप और उच्च शिक्षा के अवसरों का लाभ उठाने पर भी जोर दिया।
अनुशासन और नैतिकता जरूरी: प्रो. आशुतोष पांडेय
विश्वविद्यालय के चीफ प्रॉक्टर प्रो. आशुतोष पांडेय ने विद्यार्थियों को अनुशासन, नैतिकता और जिम्मेदारी का महत्व बताया। उन्होंने कहा कि तकनीकी ज्ञान तभी सार्थक है, जब उसके साथ अच्छे संस्कार और जिम्मेदार नागरिक बनने की भावना भी हो। उन्होंने विद्यार्थियों से विश्वविद्यालय परिसर में अनुशासन और मर्यादा का पालन करने का आह्वान किया।
नेतृत्व क्षमता और टीम वर्क भी जरूरी: डॉ. पांचाली सिंह
मैनेजमेंट विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. पांचाली सिंह ने प्रबंधन, व्यवसाय, नेतृत्व और उद्यमिता के बारे में विद्यार्थियों को जानकारी दी। उन्होंने कहा कि तकनीकी दक्षता के साथ नेतृत्व क्षमता, टीम वर्क, संवाद कौशल और प्रबंधन क्षमता भी जरूरी है। नवाचार आधारित सोच विद्यार्थियों को रोजगार मांगने वाला नहीं, बल्कि रोजगार देने वाला बनने की दिशा में आगे बढ़ा सकती है।
गणित और तकनीक एक-दूसरे के पूरक: डॉ. रामविलास मिश्रा
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ. रामविलास मिश्रा, पूर्व कुलपति अवध विश्वविद्यालय एवं प्रख्यात गणितज्ञ, ने विद्यार्थियों को तकनीकी एवं व्यावहारिक ज्ञान के महत्व से अवगत कराया। उन्होंने कहा कि इंजीनियरिंग की शिक्षा केवल डिग्री हासिल करने तक सीमित नहीं होनी चाहिए। विद्यार्थियों को पुस्तकों के अध्ययन, प्रयोग, शोध और नवाचार को अपनी शिक्षा का अभिन्न हिस्सा बनाना चाहिए।
डॉ. मिश्रा ने कहा कि गणित और तकनीक एक-दूसरे के पूरक हैं। मूलभूत गणितीय सिद्धांतों से लेकर अत्याधुनिक तकनीकों तक ज्ञान की निरंतरता बनी हुई है। उन्होंने विद्यार्थियों को गणितीय सोच विकसित करने की सलाह देते हुए कहा कि तार्किक और विश्लेषणात्मक क्षमता जटिल समस्याओं का समाधान खोजने में मदद करती है। उन्होंने विद्यार्थियों से पाठ्यक्रम तक सीमित न रहकर नई तकनीकों, शोध-पत्रों और पुस्तकों का अध्ययन करने, प्रश्न पूछने, प्रयोग करने और असफलताओं से सीखने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि आने वाले समय में वही विद्यार्थी आगे बढ़ेंगे, जो तकनीक को समाज की वास्तविक समस्याओं से जोड़कर समाधान विकसित करेंगे। उन्होंने मानव कल्याण, दिव्यांगजन सशक्तीकरण और समाज के कमजोर वर्गों की समस्याओं के समाधान के लिए तकनीक के उपयोग की दिशा में सोचने के लिए भी प्रेरित किया।
AI, मशीन लर्निंग और रोबोटिक्स का दौर: वक्ताओं की राय
कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि आने वाला समय आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग, रोबोटिक्स, डेटा साइंस और अन्य उभरती तकनीकों का है। ऐसे में विद्यार्थियों को तकनीकी दक्षता के साथ रचनात्मक सोच, नैतिक दृष्टिकोण, समस्या समाधान की क्षमता और मानवीय संवेदनाएं भी विकसित करनी होंगी।
कार्यक्रम में रहे मौजूद
कार्यक्रम में डॉ. दिनेश कुमार सिंह, डॉ. शिवेश मणि त्रिपाठी, डॉ. हरेंद्र वर्मा, डॉ. आकाश सिंह, डॉ. राकेश वर्मा, अजीत शुक्ला, अनिल गौण, नन्द कुमार, डॉ. आशीष मल्ल सहित फैकल्टी ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी के शिक्षक एवं सहयोगी मौजूद रहे।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. अर्चना अवस्थी ने किया। उन्होंने विभिन्न सत्रों को व्यवस्थित रूप से संचालित करते हुए विद्यार्थियों की सहभागिता सुनिश्चित की। अंत में डॉ. पवन कुमार ने फैकल्टी ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी की ओर से मुख्य अतिथि, अतिथियों, विश्वविद्यालय प्रशासन, शिक्षकों, सहयोगियों और नवप्रवेशित विद्यार्थियों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि इंडक्शन प्रोग्राम विद्यार्थियों के विश्वविद्यालयी जीवन की नई शुरुआत है।
