Search News

अखिलेश यादव के राम वाले बयान पर डॉ. राजेश्वर सिंह का पलटवार, बोले- राम आस्था हैं, चुनावी नारा नहीं

सरोजनीनगर विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह ने अखिलेश यादव के हालिया राम संबंधी बयानों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि राम राष्ट्र की सनातन आस्था हैं, चुनावी रणनीति का माध्यम नहीं। राजेश्वर सिंह, अखिलेश यादव, राम मंदिर, अयोध्या, बीजेपी, समाजवादी पार्टी, उत्तर प्रदेश, लखनऊ, राजनीतिक बयान, यूपी न्यूज, Hindi News, Breaking News
  • By Kanhwizz Times
  • Reported By: Shivam Srivastava
  • Updated: July 6, 2026

सरोजनीनगर विधायक ने कहा- जो कभी श्रीराम पर मौन थे, वे आज राम-नाम का सहारा ले रहे हैं; जनता आस्था और अवसरवाद का अंतर जानती है

लखनऊ, 6 जुलाई 2026। सरोजनीनगर विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह ने समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के हालिया बयानों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि प्रभु श्रीराम करोड़ों भारतीयों की आस्था, संस्कृति और मर्यादा के प्रतीक हैं। उनका नाम राजनीतिक सुविधा या चुनावी रणनीति का माध्यम नहीं बनाया जाना चाहिए।

 

डॉ. राजेश्वर सिंह ने कहा कि उत्तर प्रदेश की जनता भली-भांति जानती है कि वर्षों तक श्रीराम जन्मभूमि, अयोध्या और रामभक्तों की भावनाओं के प्रति उपेक्षापूर्ण रवैया अपनाने वाले लोग आज अपने लगभग हर सार्वजनिक बयान में श्रीराम का उल्लेख कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि यह परिवर्तन वास्तविक आस्था और आत्ममंथन का परिणाम है तो उसका स्वागत किया जाना चाहिए, लेकिन यदि यह केवल चुनावी मजबूरी है तो जनता इसे भी समझ रही है।

 

उन्होंने कहा कि श्रीराम का नाम लेना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनके आदर्शों—मर्यादा, सत्य, सेवा और राष्ट्रधर्म—को सार्वजनिक जीवन में अपनाना ही सच्ची श्रद्धा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में अयोध्या का गौरव पुनर्स्थापित हुआ है तथा श्रीराम जन्मभूमि पर निर्मित भव्य मंदिर करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था और विश्वास का प्रतीक बन चुका है।

 

डॉ. राजेश्वर सिंह ने कहा कि "राम का नाम चुनावी सीज़न का नारा नहीं, बल्कि राष्ट्र की सनातन आस्था है। जनता श्रद्धा और अवसरवाद के बीच का अंतर भली-भांति पहचानती है।"

 

उन्होंने आगे कहा कि "राम आस्था हैं, ट्रेंड नहीं; राम मर्यादा हैं, राजनीतिक मजबूरी नहीं।" उत्तर प्रदेश की जनता केवल भाषणों से नहीं, बल्कि नेताओं के आचरण और कार्यों से उनकी नीयत का आकलन करती है।

Breaking News:

Recent News: