• बेजुबान की जिंदगी बचाने के लिए खुद जोखिम में उतरे पार्षद ललित तिवारी
• सीढ़ी के सहारे खुद मकान में दाखिल हुए पार्षद, सफाई सुपरवाइजर गौरव प्रधान ने भी निभाई अहम भूमिका
लखनऊ, कैनविज टाइम्स संवाददाता। इंसानियत केवल इंसानों की मदद करने तक सीमित नहीं होती, बल्कि बेजुबान जीवों के प्रति संवेदना और उनकी जिंदगी बचाने का जज्बा भी सच्ची मानवता की पहचान है। फैजुल्लागंज तृतीय के नायक नगर में कुछ ऐसा ही सराहनीय उदाहरण देखने को मिला, जहां पिछले आठ दिनों से एक बंद मकान में जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रहे कुत्ते को स्थानीय पार्षद एवं अधिवक्ता ललित तिवारी ने अपनी सूझबूझ, तत्परता और मानवीय संवेदना के बल पर सकुशल बाहर निकाल लिया।
जानकारी के अनुसार, नायक नगर स्थित एक बंद मकान में करीब आठ दिन पहले एक कुत्ता गिर गया था। मकान बंद होने और बाहर निकलने का कोई रास्ता नहीं मिलने के कारण वह लगातार अंदर फंसा रहा। भूख-प्यास और असहाय स्थिति में फंसे इस बेजुबान की परेशानी देखकर स्थानीय पड़ोसी ने इसकी जानकारी क्षेत्रीय पार्षद ललित तिवारी को दी।
सूचना मिलते ही पार्षद ने बिना देर किए मदद के प्रयास शुरू कर दिए। उन्होंने नगर निगम के पशु चिकित्सक अभिनव से संपर्क कर रेस्क्यू के लिए सहायता मांगी, लेकिन अपेक्षित मदद नहीं मिल सकी। इसके बाद उन्होंने स्वयं मौके पर पहुंचकर कुत्ते को बचाने का जिम्मा उठाया। सीढ़ी के सहारे बंद मकान में दाखिल होकर उन्होंने काफी मशक्कत के बाद फंसे हुए कुत्ते को सुरक्षित बाहर निकाला। इस मानवीय अभियान में वार्ड के सफाई सुपरवाइजर गौरव प्रधान ने भी सक्रिय सहयोग किया।

बेजुबान की जान बचाकर मिला सुकून
रेस्क्यू अभियान सफल होने के बाद पार्षद ललित तिवारी ने खुशी जाहिर करते हुए कहा कि एक सप्ताह से अधिक समय से बंद पड़े मकान में फंसे कुत्ते को सुरक्षित बाहर निकालना उनके लिए बेहद सुकून देने वाला अनुभव रहा। किसी बेजुबान की जान बचाने से बड़ा संतोष और क्या हो सकता है। उन्होंने कहा कि जीव-जंतुओं के प्रति संवेदना रखना और संकट में उनकी मदद के लिए आगे आना हम सभी की जिम्मेदारी है।
उन्होंने बताया कि मकान के पिछले हिस्से की छत खुली होने के कारण वहां काफी झाड़ियां उग आई थीं और जंगल जैसी स्थिति बन गई थी। रेस्क्यू के दौरान उस हिस्से की सफाई भी कराई गई, जिससे आसपास की गंदगी और अव्यवस्था को दूर करने में मदद मिली।
एक प्रयास ने बचा ली बेजुबान की जिंदगी
आठ दिनों तक बंद मकान में फंसे कुत्ते के सुरक्षित बाहर आने से स्थानीय लोगों ने भी राहत की सांस ली। पार्षद ललित तिवारी की व्यक्तिगत पहल और सफाई सुपरवाइजर गौरव प्रधान के सहयोग से संभव हुआ यह रेस्क्यू अभियान समाज को एक सकारात्मक संदेश देता है कि संवेदनशीलता, जिम्मेदारी और इच्छाशक्ति हो तो किसी बेजुबान की जिंदगी भी बचाई जा सकती है। वास्तव में, किसी ऐसे जीव की पीड़ा समझना जो अपनी तकलीफ शब्दों में बयां नहीं कर सकता, इंसानियत की सबसे खूबसूरत मिसाल है।

