ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई की मौत के बाद उनके बेटे मुजतबा खामेनेई का नाम नए सुप्रीम लीडर के रूप में चर्चा में है। रमजान के पवित्र महीने के दौरान अली खामेनेई की मृत्यु को ईरान के इस्लामी गणराज्य के इतिहास का एक बड़ा मोड़ माना जा रहा है। ऐसे समय में मुजतबा का उभरना केवल नेतृत्व परिवर्तन नहीं, बल्कि यह भी दिखाता है कि 1979 की ईरानी क्रांति के बाद बनी व्यवस्था किस दिशा में जा रही है।
कौन हैं मुजतबा खामेनेई
मुजतबा खामेनेई एक शिया धर्मगुरु हैं, जिन्होंने लंबे समय तक सार्वजनिक राजनीति से दूर रहते हुए भी सत्ता के बेहद करीब भूमिका निभाई है। वे अक्सर अपने पिता के कार्यालय में काम करते हुए सत्ता के गलियारों में प्रभावशाली व्यक्ति माने जाते रहे हैं।
महज 17 साल की उम्र में उन्होंने ईरान-इराक युद्ध में संक्षिप्त सेवा भी दी थी। 1990 के दशक के अंत में उनका नाम तब चर्चा में आया जब उनके पिता अली खामेनेई की स्थिति सर्वोच्च नेता के रूप में और मजबूत हो गई।
समय के साथ उनकी पहचान दो प्रमुख बातों से जुड़ी रही—
ईरान के सुरक्षा तंत्र, खासकर इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) से करीबी संबंध
सुधारवादी राजनीति और पश्चिमी प्रभाव का कड़ा विरोध
आलोचकों का आरोप है कि 2009 के विवादित राष्ट्रपति चुनाव के बाद हुए विरोध प्रदर्शनों को दबाने में भी उनका प्रभाव रहा था।
ट्रंप प्रशासन ने लगाया था प्रतिबंध
साल 2019 में अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने मुजतबा खामेनेई पर प्रतिबंध लगाया था। आरोप था कि वे बिना किसी आधिकारिक पद के भी सर्वोच्च नेता की ओर से कई सरकारी फैसलों में भूमिका निभा रहे थे और सत्ता के तंत्र को प्रभावित कर रहे थे।
कैसे चुना जाता है ईरान का सुप्रीम लीडर
ईरान के संविधान के अनुसार देश का सर्वोच्च नेता “विशेषज्ञों की सभा” (Assembly of Experts) चुनती है। यह 88 धर्मगुरुओं का निकाय होता है, जो धार्मिक और राजनीतिक योग्यता के आधार पर उम्मीदवार का चयन करता है।
हालांकि आलोचकों का कहना है कि इस प्रक्रिया में सत्ता के प्रभावशाली नेटवर्क और संस्थानों का असर भी होता है, जिससे चयन प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी नहीं मानी जाती।
मुजतबा को 2022 में अयातुल्ला की उपाधि भी दी गई थी, जो सर्वोच्च नेता बनने के लिए आवश्यक मानी जाती है। इससे यह संकेत मिला कि उन्हें भविष्य के नेतृत्व के लिए तैयार किया जा रहा था।
वंशवाद को लेकर उठ रहे सवाल
1979 की ईरानी क्रांति का एक बड़ा सिद्धांत वंशवादी शासन का विरोध था। इसलिए कई ईरानी विश्लेषकों का मानना है कि अगर अली खामेनेई के बाद उनके बेटे मुजतबा सत्ता संभालते हैं, तो यह क्रांति के मूल सिद्धांतों के विपरीत होगा और व्यवस्था एक तरह से धर्मतांत्रिक राजतंत्र जैसी दिख सकती है।
हालांकि औपचारिक रूप से उन्हें सर्वोच्च नेता बनने के लिए विशेषज्ञों की सभा से चयनित होना जरूरी होगा।
ट्रंप और नेतन्याहू को क्यों नहीं पसंद
मुजतबा खामेनेई का रुख पश्चिम और इजराइल के प्रति बेहद सख्त माना जाता है। उनके बारे में माना जाता है कि:
वे सुरक्षा और सैन्य प्रतिष्ठान के अधिक करीब हैं
पश्चिमी देशों के साथ समझौते की बजाय कड़ा रणनीतिक रुख अपनाने के समर्थक हैं
क्षेत्रीय राजनीति में आईआरजीसी और सहयोगी संगठनों की भूमिका बढ़ाने के पक्षधर माने जाते हैं
इसी वजह से अमेरिका और इजराइल के लिए उनका नेतृत्व और अधिक टकरावपूर्ण माना जा रहा है।
ईरान की राजनीति में क्या बदल सकता है
विशेषज्ञों के अनुसार मुजतबा खामेनेई के नेतृत्व में ईरान की नीति में कुछ संभावित बदलाव देखे जा सकते हैं:
घरेलू स्तर पर अधिक कड़ा नियंत्रण
क्षेत्रीय मामलों में सुरक्षा संस्थाओं की बढ़ती भूमिका
पश्चिम के साथ बातचीत में सावधानी और रणनीतिक रुख
हालांकि माना जा रहा है कि यदि शासन के अस्तित्व पर खतरा पैदा होता है, तो ईरान व्यावहारिक कूटनीति का रास्ता भी अपना सकता है।
