विद्युत पेंशनर्स परिषद ने पेंशनरों के चिकित्सा भत्ता के लिए प्रबंध निदेशक को भेजा पत्र
लखनऊ। लेसा एवं अन्य क्षेत्रों में जहां वर्टिकल व्यवस्था लागू है, वहां के पेंशनरों व पारिवारिक पेंशनरों को एक गलत आदेश के चलते चिकित्सा प्रतिपूर्ति और चिकित्सा भत्ते के लिए लगातार परेशान किया जा रहा है। निदेशक (का.प्र. एवं प्रशासन) के एक आदेश का हवाला देकर उन पेंशनरों के आवश्यक प्रपत्र स्वीकार नहीं किए जा रहे, जो उत्पादन निगम, जल विद्युत निगम एवं ट्रांसको निगम से सेवानिवृत्त होकर वर्टिकल व्यवस्था लागू होने से पहले अपना पेंशन खंड चुन चुके हैं।
विद्युत पेंशनर्स परिषद ने रखा स्पष्ट पक्ष
इस मामले में विद्युत पेंशनर्स परिषद उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष भारत भूषण गोयल और प्रमुख महासचिव कप्तान सिंह ने स्पष्ट किया कि 14 जनवरी 2000 तक सभी सेवानिवृत्त एवं कार्यरत कार्मिक, जो पूर्ववर्ती उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत परिषद द्वारा भर्ती किए गए थे और वर्ष 2001 व दिसंबर 2008 के बाद बने निगमों में प्रतिनियुक्ति पर कार्य कर सेवानिवृत्त हुए हैं या होंगे, उनके टर्मिनल बेनिफिट (विद्युत एवं चिकित्सा सुविधाओं) की समस्त जिम्मेदारी उत्तर प्रदेश सरकार एवं उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड की विद्युत सुधार अंतरण स्कीम 2000 में पहले से तय है।
प्रबंध निदेशक को भेजा पत्र, यह मांग रखी
परिषद के प्रमुख महासचिव कप्तान सिंह ने इस संबंध में अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक, उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन को पत्र भेजा है। पत्र में मुख्य रूप से यह मांगें रखी गई हैं:
- पेंशनरों के चिकित्सा भत्ते का भुगतान हर माह की 5 तारीख को सुनिश्चित किया जाए
- वर्टिकल व्यवस्था के तहत लागू पेंशन खंडों के अंतर्गत, अन्य निगमों से प्रतिनियुक्ति पर कार्य कर सेवानिवृत्त हुए लोगों के चिकित्सा प्रतिपूर्ति के व्यय बीजक स्वीकार कर उचित कार्रवाई हो
- इस पूरे मामले में शीघ्र उचित आदेश जारी किया जाए
