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सुना है क्या: पेंडुलम की तरह झूल रहे साहब... दूसरे साहब को नहीं मिल रही मलाई, पढ़ें नौकरशाहों के किस्से

यूपी में अलग-अलग विभागों के साहब आजकल थोड़े परेशान नजर आ रहे हैं। कोई विभाग का मुखिया बनने गया तो पेंडुलम बन गया। वहीं, एक अन्य नौकरशाह लगातार नेता बनने के लिए दम लगा रहे हैं। वहीं, एक अन्य विभाग के नौकरशाह मलाई न मिलने से निराश हैं।
  • By Kanhwizz Times
  • Reported By: Admin
  • Updated: December 11, 2025

यूपी में अलग-अलग विभागों के साहब आजकल थोड़े परेशान नजर आ रहे हैं। कोई विभाग का मुखिया बनने गया तो पेंडुलम बन गया। वहीं, एक अन्य नौकरशाह लगातार नेता बनने के लिए दम लगा रहे हैं। वहीं, एक अन्य विभाग के नौकरशाह मलाई न मिलने से निराश हैं। यूपी में एक विभाग के बड़े अधिकारी मुखिया बनने के लिए सारी जुगत लगा रहे थे पर अपने ही विभाग में पेंडुलम बनकर रह गए। वहीं, एक नौकरशाह बीते काफी समय से नेतागिरी के लिए खुद को तैयार कर रहे हैं पर उन्हें मौका नहीं मिल रहा है तो एक और नौकरशाह हैं जिनके नीचे वाले तो मलाई काट रहे हैं पर वो हैं कि तरस रहे हैं। प्रदेश में पढ़ाई-लिखाई वाले विभाग में एक साहब पिछले छह महीने से पेंडुलम की तरह झूल रहे हैं। कभी इस विभाग में तो कभी उस विभाग में। उनके ख्वाब तो विभाग का मुखिया बनने के थे लेकिन छह महीने में उनको कहीं तैनाती नहीं मिल पाई। ऐसे में अब वह इस प्रयास में हैं कि उनको कहीं भी बिठा दिया जाए ताकि उनका वेतन जारी होना शुरू हो जाए। इस पर विभाग के ही एक अधिकारी ने कहा कि साहब की स्थिति आधी छोड़ पूरी को धावै, आधी मिलै न पूरी पावै वाली हो गई है। हालांकि, साहब अभी भी पूरा जोर लगाए हैं। एक नौकरशाह काफी दिनों से नेता बनने के लिए दम लगा रहे हैं। उन्होंने 2022 में इसकी शुरूआत की। जिस दल ने भरोसा दिया उसने ऐन मौके पर गच्चा दे दिया। फिर आया 2024 और नेताजी दो नाव की सवारी करने लगे। यह बात दोनों दलों को पता चल गई। नतीजतन सामाजिक समीकरण में उनका पत्ता साफ हो गया। अब वह 2027 के लिए मैदान में हैं। दम लगा रहे हैं। देखना है कि उनकी दमदारी दिख पाती है या नहीं क्योंकि उनके कई चहेते उन्हें मात देने में लगे हैं।

नीचे वालों की मौज
सरकारी खजाना भरने वाले शीर्ष तीन विभागों में शामिल एक विभाग में ऊपर वाले तो तरस रहे हैं लेकिन नीचे वाले जमकर मलाई काट रहे हैं। माननीय से लेकर साहबों तक को पूरी जानकारी है लेकिन प्रदेश की राजधानी से लेकर देश की राजधानी तक में बैठे दिग्गजों का आशीर्वाद लेकर कुर्सी पर जमे दर्जनभर अफसर धुआंधार जेब भरने में लगे हैं। जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आते जा रहे हैं ठंडी कुर्सी पर बरसों से जमे अफसर का दर्द फूटने लगा है। शिकायतें भी खूब आ रही हैं लेकिन विभागीय सूत्रों का कहना है कि माननीय लाचार हैं।

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