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आजादी के दिन तिरंगा लहराएं, पर्यावरण को न दें प्रदूषण का बोझ

  • By Kanhwizz Times
  • Reported By: Admin
  • Updated: August 12, 2021

कोलकाता : 15 अगस्त यानी आजादी का दिन। इस दिन हर भारतवासी तिरंगा लहराकर अंग्रेजों से मिली आजादी का जश्न मनाता है। जश्न भले आजादी का हो लेकिन इसमें तिरंगे के मान-सम्मान को लेकर कहीं कोई कोताही न बरती जाए, इन नियमों का पूरा ख्याल रखा जाता है। वैसे तो इस दिन ज्यादातर कपड़े या कागज के बने झण्डे ही फहराये जाते हैं। पिछले कुछ सालों से प्लास्टिक के झण्डों का चलन तेजी से चल रहा है। यह चलन इतनी तेजी से बढ़ा है कि एक तरह से यह प्रदूषण को दावत देने के साथ झण्डे का असम्मान भी करता है। इस मसले को गंभीरता से देखते हुए केंद्र सरकार की ओर से राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को एडवायजरी जारी की गयी है कि राज्यों में सख्ती से फ्लैग कोड का पालन किया जाए।

राज्य फ्लैग कोड का पालन करें
निर्देश नया नहीं है लेकिन तिरंगे की शान और सम्मान के लिए एक बार फिर आजादी का जश्न मनाने के दौरान प्लास्टिक के झण्डे न इस्तेमाल किये जाएं इसे लेकर केंद्र सरकार सख्त हुई है। राज्यों को निर्देश भी दे दिया गया है जिसमें साफ कहा गया है कि यह देशवासियों की आशा और आकांक्षा से जुड़ने के साथ ही प्रदूषण की समस्या से भी ताल्लुक रखता है। प्लास्टिक के झण्डे कागज या कपड़े की तरह बायोडिग्रेडेबल नहीं होते हैं जिसकी वजह से इसे डीकंपोज होने में वक्त लगता है।

प्लास्टिक का झण्डा तिरंगा का अपमान, पर्यावरण के लिए खतरा
प्लास्टिक के जिन झण्डों का उपयोग हम एक-आध घंटे के लिए करते हैं और दुर्भाग्यवश उस एक प्लास्टिक को गलने में 1000 साल से ज्यादा का वक्त लगता है जो चंद मिनटों में पर्यावरण को प्रदूषित करता है। हैरानी की बात है कि हर मिनट 10 लाख प्लास्टिक का उपयोग किया जाता है जो खतरे के निशान को पार कर रहा है। सर्वे के अनुसार रोजाना 30 करोड़ टन से ज्यादा प्लास्टिक का उत्पादन जो करीब पूरी आबादी के वजन के बराबर है। प्लास्टिक को गलने में घंटे दो घंटे का नहीं बल्कि सालों का समय लगता है जिसका सीधा खामियाजा पर्यावरण को प्रदूषित होकर भरना पड़ता है, इसलिए आजादी का जश्न मनाएं, तिरंगा भी लहरायें लेकिन चंद पल के लिए पर्यावरण को सालों के प्रदूषण का बोझ न दें।

कोताही हुई तो होगा एक्शन
केंद्र की जारी एडवायजरी में ‘भारतीय ध्वज संहिता, 2002’ और द प्रिवेंशन ऑफ इंसल्ट टू नेशनल ऑनर एक्ट 1971 का उल्लेख किया गया है। पर्यावरण संरक्षण का हवाला देते हुए प्लास्टिक के झंडा का उपयोग किए जाने की स्थिति में फ्लैग कोड ऑफ इंडिया 2002 के तहत कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।

झण्डे वालों ने किया जुगाड़
कोलकाता में झण्डा तैयार करने वाले व्यवसायी लतीफ ने बताया कि पहले प्ला​स्टिक के झण्डे बनाते थे लेकिन अब 50 माइक्रोन से ज्यादा की प्लास्टिक जो री-साइकल होती है उसका झण्डा तैयार किया जा रहा है। देश में करीब 17 राज्यों में कहने को इन प्लास्ट

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