Search News

ड्रोन से बदल रही युद्ध की रणनीति: भारत ने कब किया था पहली बार ड्रोन का इस्तेमाल?

ड्रोन तकनीक ने युद्ध की परिभाषा बदल दी है। भारत ने पहली बार 1995 में 'निशांत' ड्रोन का परीक्षण किया था, जो सेना की निगरानी और टोही जरूरतों को पूरा करता था। जानें ड्रोन के इतिहास और युद्ध में इसके प्रभाव के बारे में।
  • By Kanhwizz Times
  • Reported By: Kritika pandey
  • Updated: May 15, 2025

कैनवीज़ टाइम्स, डिजिटल डेस्क । 

भारत-पाकिस्तान के बीच हालिया तनातनी ने एक बार फिर ड्रोन तकनीक के महत्व को उजागर किया है। पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद दोनों देशों ने एक-दूसरे पर ड्रोन का इस्तेमाल किया। भारतीय सेना ने पाकिस्तान में आतंकियों के ठिकाने निशाना बनाए, जबकि पाकिस्तान ने सैकड़ों ड्रोन भेजकर जवाबी हमला किया, लेकिन भारतीय एयर डिफेंस सिस्टम ने इन ड्रोन को हवा में ही नष्ट कर दिया। ड्रोन अब सिर्फ निगरानी का उपकरण नहीं, बल्कि युद्ध का निर्णायक हथियार बन चुके हैं। रूस-यूक्रेन युद्ध और इजरायल-गाजा संघर्ष में भी ड्रोन का जमकर इस्तेमाल हुआ, जिससे यह साबित हो गया कि आधुनिक युद्ध ड्रोन की रणनीति पर निर्भर करते हैं।

भारत में ड्रोन का इतिहास:

भारत में ड्रोन का पहला स्वदेशी परीक्षण 1995 में हुआ, जब रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) ने 'निशांत' ड्रोन का सफल परीक्षण किया। यह ड्रोन भारतीय सेना की रिमोटली पायलेटेड व्‍हीकल (RPV) की जरूरतों को पूरा करने के लिए डिजाइन किया गया था और मुख्य रूप से निगरानी और टोही अभियानों में इस्तेमाल हुआ। 

ड्रोन के इस्तेमाल से युद्ध की बदलती तस्वीर:

सटीकता: ड्रोन दुश्मन के ठिकानों पर सटीक हमला करने में सक्षम हैं।

कम जोखिम: ड्रोन का उपयोग सैनिकों को सीधे खतरे में डाले बिना किया जा सकता है।

गोपनीयता: ड्रोन की तेज गति और ऊंचाई पर उड़ान भरने की क्षमता उन्हें दुश्मन की नजर से छिपने में मदद करती है।

ड्रोन का भविष्य:

भारत स्वदेशी ड्रोन तकनीक को बढ़ावा दे रहा है और आधुनिक युद्ध के लिए एआई-सक्षम ड्रोन विकसित कर रहा है। भविष्य में ड्रोन न केवल निगरानी बल्कि हमले और बचाव अभियानों में भी मुख्य भूमिका निभाएंगे।

Breaking News:

Recent News: