कैनविज टाइम्स, डिजिटल डेस्क ।
प्लास्टिक प्रदूषण अब केवल पर्यावरणीय समस्या नहीं, बल्कि वैश्विक आपदा बनता जा रहा है। ताजा रिपोर्ट्स के मुताबिक, हर 30 सेकेंड में प्लास्टिक और उससे जुड़ी बीमारियों के कारण एक व्यक्ति की मौत हो रही है। प्लास्टिक की बढ़ती खपत और अव्यवस्थित निपटान के कारण यह संकट लगातार गहराता जा रहा है। पिछले 70 वर्षों में प्लास्टिक का उत्पादन 20 लाख टन से बढ़कर 45 करोड़ टन हो गया है। इसकी टिकाऊ और सस्ती प्रकृति ने इसके उपयोग को व्यापक बनाया है, लेकिन इसके अपशिष्ट ने नदियों, समुद्रों और हवा को प्रदूषित कर दिया है। रिसाइकल न होने वाला प्लास्टिक धीरे-धीरे टूटकर माइक्रोप्लास्टिक बन रहा है, जो पानी, भोजन और हवा के जरिए मानव शरीर में प्रवेश कर रहा है। इससे कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ रहा है। हर साल 35.3 करोड़ टन प्लास्टिक कचरा उत्पन्न होता है, जिसमें से केवल 23% का ही ठीक से प्रबंधन हो पाता है। करीब 60 लाख टन कचरा समुद्र में पहुंच रहा है, जिससे समुद्री जीवों की प्रजनन क्षमता पर बुरा असर पड़ रहा है। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर यह संकट एक चेतावनी बनकर सामने आया है कि यदि अभी भी सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो प्लास्टिक प्रदूषण भविष्य में और भी विकराल रूप ले सकता है। संयुक्त राष्ट्र ने 2022 में एक वैश्विक संधि की बातचीत शुरू की थी, ताकि 2024 तक एक बाध्यकारी समझौते पर पहुंचा जा सके, लेकिन 2024 में दक्षिण कोरिया के बुसान में हुए सम्मेलन में तेल उत्पादक देशों के विरोध के चलते यह प्रयास असफल रहा।
