डिजिटल डेस्क/लखनऊ। उत्तर प्रदेश के नवनिर्वाचित विधायक मिथिलेश पाल की विधायकी अब संकट में घिरी हुई है। उनके खिलाफ एक याचिका दायर की गई थी, जिसमें आरोप लगाया गया है कि उनका निर्वाचन प्रक्रिया में कुछ अनियमितताएँ थीं। इस मामले में कोर्ट ने 3 जनवरी 2024 को फैसला सुनाने का फैसला किया है, जिससे उनकी विधायकी पर खतरा मंडरा रहा है।
मिथिलेश पाल को हाल ही में विधानसभा चुनाव में विजय प्राप्त हुई थी और वे समाजवादी पार्टी (SP) के उम्मीदवार के तौर पर विजयी हुए थे। लेकिन उनकी जीत के बाद एक विपक्षी उम्मीदवार ने उनके खिलाफ अदालत में याचिका दायर की थी। याचिका में आरोप है कि मिथिलेश पाल ने चुनावी प्रक्रिया के दौरान कुछ नियमों का उल्लंघन किया है, जिससे उनकी चुनावी वैधता पर सवाल खड़े हो गए हैं।
याचिका में यह भी आरोप लगाया गया कि मिथिलेश पाल ने अपने चुनावी हलफनामे में कुछ जानकारी छुपाई थी और गलत दस्तावेज़ प्रस्तुत किए थे। इसके अलावा, चुनाव में कुछ विशेष प्रावधानों का उल्लंघन होने का दावा भी किया गया है, जिसके कारण उनके चुनाव को अवैध घोषित किया जा सकता है।
विधायकी के संकट में घिरे मिथिलेश पाल ने इन आरोपों को सिरे से नकारा है और उन्होंने दावा किया है कि चुनावी प्रक्रिया पूरी तरह से निष्पक्ष और पारदर्शी रही। उनका कहना है कि उन्हें विश्वास है कि कोर्ट में उनके पक्ष में फैसला आएगा और वे अपनी विधायकी बनाए रखेंगे।
कोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान सभी पक्षों की दलीलें सुनीं और अब 3 जनवरी को इस मामले में अंतिम फैसला सुनाने का निर्णय लिया है। अगर कोर्ट ने उनके खिलाफ फैसला सुनाया, तो उनकी विधायकी खारीज हो सकती है और उपचुनाव की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।
इस मामले में फैसला आने के बाद उत्तर प्रदेश की राजनीतिक स्थिति में हलचल मच सकती है। मिथिलेश पाल की विधायकी पर संकट के चलते उनके समर्थकों में भी चिंता का माहौल है, वहीं विपक्ष इस मामले में कोर्ट के फैसले का बेसब्री से इंतजार कर रहा है।
