कैनविज टाइम्स, डिजिटल डेस्क। जिले में प्राइवेट स्कूलों की मनमानी जारी है कई स्कूलों ने इस साल मनमानी तरीकों से फीस में बढ़ोत्तरी की है,जिससे कि अभिभावक भी परेशान है।अवध केसरी सेना के कार्यकर्ताओं ने जिला वि द्यालय निरीक्षक से मुलाकात कर निजी स्कूलों पर लगाम लगाने की मांग की है।मंगलवार क़ो अवध केसरी सेना के पदाधिकारिओ ने गोंडा स्टेशन रोड पर स्थित निजी जिलाविद्यालय निरीक्षक के ऑफि स पर पहुंच कर फीस बढोत्तरी का विरोध किया है, अवधकेसरी सेना के प्रमुख ठाकुर नीरज सिंह का कहना है कि इससे पहले भी स्कूलों की मनमानी के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होने की सूरत में कार्यकर्ताओं ने जिलाधिकारी नेहा शर्मा क़ो एक ज्ञापन भी दिया है,वही जिले में प्राइवेट स्कूलों की मनमानी रूकने का नाम नहीं ले रही है।
अवध के सरी सेना का आरोप है कि प्राइवेट स्कूल एक ही बुक सेलर से किताबे खरीदने का दबाव बनाते है अभिभावकों और छात्रों को भी मजबूरी में वहीं से किताबें खरी दनी पड़ती है स्कूल संचालक विद्या लय में किताबों को डंप करके स्कूल में किताबें बेच रहे हैं और मौ जा,जूता बैग एक ही दुकान पर खरी दने के लिए मजबूर करते हैं।अवध केसरी सेना की मांग है कि अभिभावकों और छात्रों को स्वतंत्र रूप से किसी भी बुक सेलर से पुस्तकें खरीदने की छूट दी जाए,इसके अलावा यूनिफॉर्म के लिए भी छात्रों और उनके अभिभावकों को इसी तरह मजबूर कि या जा रहा है,अवध केसरी सेना का आरोप है कि निजी कमीशन खोरी के चक्कर में अभिभावकों का शो षण कर रहे हैं,जिस किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।वही अवध केसरी सेना के प्रदे श अध्यक्ष ठाकुर नील सिंह ने कहा कि शिक्षा मा फियो के नाम से गोंडा जनपद प्रसिद्ध है।प्राइवेट स्कूल संचालक यहाँ अभिभावकों को लूटने में लगे हुए है।
अभिभावकों को लूटने का ये खेल खत्म हो ना चाहिए इसीलिए अवध केसरी सेना जिला विद्या लय निरीक्षक से मिलकर पूरी बात को अवगत क राया है।ताकि अभिभावकों को निजी स्कूलों की लूट से राहत मिल सके,नील ठाकुर ने कहा कि पहले निजी स्कूलों में आरटीई यानी शिक्षा के अधि कार के तहत गरीब बच्चों के पढ़ने की योजना थी, लेकिन अधिकतर स्कूलों ने इस प्रक्रिया को खत्म कर दिया है ऐसे में गरीब बच्चों को शिक्षा से वंचित होना पड़ रहा है।अवध केसरी सेना प्रमुख ने कहा कि प्राइवेट स्कूल संचालक मनमर्जी से अचानक फीस में बढ़ोतरी कर दी है।जिस पर रोक लगाने की मांग की है।
प्रशासन की मनमानी और अभिभावकों की बेबसी
वही जब अभिभावक स्कूल प्रशासन से मिलने जा ते हैं और अपनी समस्याएं रखते हैं,तो उन्हें ताना दिया जाता है या उनके बच्चों को टारगेट किया जा ता है।कई बार छात्रों को कक्षा में अपमानित भी किया जाता है।परेशान अभिभावक जब समाधान की मांग करते हैं,तो स्कूल प्रशासन कहता है, अगर परेशानी है तो बच्चों का नाम कटवा लें।"
निरीक्षण में कमी और प्रशासन की चुप्पी
इन सबके बीच सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि शिक्षा विभाग या अन्य जिम्मेदार अधिकारी शायद ही कभी स्कूलों का निरीक्षण करते हैं।यदि समय-समय पर इन स्कूलों की जांच की जाए,तो कई अनियमितताओं का खुलासा हो सकता है।निजी स्कूलों की इस मनमानी पर सख्ती से लगाम लगा ए।ड्रेस,किताबें,फीस,और अन्य शुल्क पर नियंत्रण होना चाहिए ताकि मध्यम वर्गीय परिवार भी अपने बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा दे सकें।साथ ही, स्कू लों में मानकों के अनुरूप ढांचा,योग्य शिक्षक और अभिभावकों के साथ सम्मानजनक व्यवहार सुनि श्चित किया जाए।
