कैनविज टाइम्स, डिजिटल डेस्क ।
पांच वर्षों के लंबे अंतराल के बाद कैलाश मानसरोवर यात्रा एक बार फिर शुरू होने जा रही है। भारत और चीन के बीच बनी आपसी सहमति के बाद विदेश मंत्रालय ने इस पवित्र यात्रा के लिए चयनित तीर्थयात्रियों के नामों की घोषणा कर दी है। 2019 में कोविड महामारी और भारत-चीन संबंधों के बिगड़ने के कारण यह यात्रा स्थगित कर दी गई थी। अब अक्टूबर 2024 में बनी सहमति के बाद इस वर्ष जून से यात्रा फिर से आरंभ की जा रही है। विदेश मंत्रालय के अनुसार, जून से अगस्त 2025 के बीच 50-50 यात्रियों के कुल 15 जत्थे कैलाश मानसरोवर की ओर रवाना होंगे। इनमें से पांच जत्थे लिपुलेख रूट से और 10 जत्थे नाथु ला पास रूट से भेजे जाएंगे। अधिकारियों का कहना है कि दोनों मार्गों को अब वाहन-योग्य बना दिया गया है, जिससे तीर्थयात्रियों को बहुत कम दूरी ही पैदल तय करनी पड़ेगी। नई दिल्ली में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्द्धन सिंह ने कंप्यूटर आधारित लॉटरी सिस्टम के जरिए चयनित यात्रियों के नामों की घोषणा की। मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया कि यह लॉटरी प्रणाली पूरी तरह पारदर्शी और निष्पक्ष है।
इस वर्ष यात्रा के लिए 5561 लोगों ने आवेदन किया, जिनमें 4024 पुरुष और 1537 महिलाएं थीं। इनमें से 750 यात्रियों का चयन किया गया है, जिन्हें अलग-अलग चरणों में भेजा जाएगा।
कैलाश मानसरोवर यात्रा हर वर्ष भारतीय तीर्थयात्रियों के लिए धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व रखती है। यह यात्रा हिमालय की कठिन वादियों से होकर गुजरती है और इसमें अद्वितीय प्राकृतिक सौंदर्य व धार्मिक अनुभूति का अनुभव होता है। यात्रा दो मुख्य मार्गों उत्तराखंड के लिपुलेख और सिक्किम के नाथु लासे करवाई जाती है। इस बार यात्रा के मार्गों को अधिक सुविधाजनक बनाने के लिए विशेष इंफ्रास्ट्रक्चर कार्य किए गए हैं, जिससे यह उम्मीद की जा रही है कि तीर्थयात्रियों को पहले की तुलना में कम शारीरिक कठिनाई झेलनी पड़ेगी।
