कैनवीज टाइम्स/ डिजिटल डेस्क। प्रयागराज में पौराणिक मान्यता के अनुसार मोक्ष के लिए अक्षयवट वृक्ष से छलांग लगाने की परंपरा रही है, जिसे मुगल बादशाह अकबर ने बंद करा दिया था। अब महाकुंभ 2025 के दृष्टिगत, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 13 दिसंबर को इसका उद्घाटन करेंगे, और श्रद्धालुओं के लिए इसे फिर से खोल दिया जाएगा।
अक्षयवट पौराणिक स्थल का कॉरिडोर कारीगरों द्वारा अंतिम रूप दिया जा रहा है, और यह निर्माण किले के अंदर किया जा रहा है। प्रधानमंत्री मोदी के आगमन की तैयारी जोर-शोर से चल रही है, और प्रशासन इस विशेष अवसर के लिए निर्माण कार्यों को अंतिम रूप दे रहा है।
मेलाधिकारी विजय किरण आनंद के अनुसार, इस कॉरिडोर की लागत 18 करोड़ रुपये है, और इसका निर्माण कार्य 2023 में शुरू हुआ था। यह कॉरिडोर 10 एकड़ में फैला हुआ है। इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य महाकुंभ में आने वाले श्रद्धालुओं को आकर्षित करना है। लंबे समय तक सेना के कब्जे में रहने के बाद, यह क्षेत्र अब महाकुंभ में श्रद्धालुओं के लिए खोला जाएगा।

अक्षयवट कॉरिडोर का निर्माण राजस्थान के धौलपुर से लाए गए विशेष लाल पत्थरों से किया गया है। इसके अलावा, इन पत्थरों पर की गई नक्काशी में संस्कृत और हिंदी में प्रयाग की महिमा का वर्णन किया गया है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी महाकुंभ के दौरान संगम तट पर पूजन और आरती करेंगे, और इसके बाद 6500 करोड़ रुपये की परियोजनाओं का लोकार्पण करेंगे। संगम नोज पर पीएम की जनसभा के लिए पंडाल की तैयारियां अंतिम चरण में हैं, जिसमें दो लाख से अधिक लोगों के बैठने की व्यवस्था की गई है।
प्रोजेक्ट इंजीनियर अभिनव कुमार सिंह ने बताया कि अक्षयवट कॉरिडोर का निर्माण कार्य अंतिम चरण में है, और सरस्वती कूप के चारों ओर फव्वारे भी लगाए जाएंगे।
अक्षयवट कॉरिडोर की प्रमुख विशेषताएँ:
- 18 करोड़ रुपये की लागत से तीन मंदिरों का निर्माण होगा
- कुल 10 एकड़ में निर्माण कार्य चल रहा है
- निर्माण कार्य 2023 में शुरू किया गया था
- अक्षयवट कॉरिडोर के तहत सरस्वती कूप के चारों ओर फव्वारे लगाए जाएंगे
