लखनऊ में 'पुरातत्व अभिरुचि पाठ्यक्रम' का शुभारंभ, 150 से अधिक शोधार्थी-विद्यार्थी हुए शामिल
राज्य पुरातत्व निदेशालय में 13 दिनों तक चलेगा कार्यक्रम, देशभर के विशेषज्ञ देंगे व्याख्यान
लखनऊ। उत्तर प्रदेश राज्य पुरातत्व निदेशालय, संस्कृति विभाग की ओर से 20 अगस्त से 3 सितंबर 2026 तक 'पुरातत्व अभिरुचि पाठ्यक्रम' का आयोजन किया जा रहा है। इसका शुभारंभ गुरुवार को छतर मंजिल परिसर, कैसरबाग स्थित पुरातत्व निदेशालय के सभागार में हुआ। कार्यक्रम में 100 से अधिक प्रतिभागियों ने प्रत्यक्ष रूप से और 50 से अधिक प्रतिभागियों ने ऑनलाइन माध्यम से हिस्सा लिया।
पद्मश्री डॉ. नारायण व्यास ने दिया की-नोट व्याख्यान
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एवं मुख्य वक्ता पद्मश्री डॉ. नारायण व्यास (पूर्व अधीक्षण पुरातत्वविद्, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण) ने पुरातात्विक व सांस्कृतिक धरोहरों के प्रति बच्चों और विद्यार्थियों में जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि विरासत का संरक्षण केवल सरकार या विशेषज्ञों की नहीं, बल्कि युवा पीढ़ी की भी जिम्मेदारी है। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रो. किरन कुमार थपल्याल (पूर्व विभागाध्यक्ष, प्राचीन भारतीय इतिहास, लखनऊ विश्वविद्यालय) ने की।
पाठ्यक्रम में इन विषयों पर होगी चर्चा
पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह के अनुसार, आगामी सत्रों में शामिल होंगे:
- प्राचीन ईंट संरचनाओं का अध्ययन और स्तूप संरक्षण (नालासोपारा स्तूप विशेष संदर्भ)
- पाषाण युग से धातु युग तक प्रागैतिहासिक विकास
- पुरावशेष एवं स्मारक संरक्षण कानून
- सरस्वती-सिंधु सभ्यता व भारतीय ज्ञान परंपरा
- भारतीय चित्रकला में काव्य, प्रेम और नायक-नायिका चित्रण
- सरयू-पार क्षेत्र (बलरामपुर, बहराइच, गोंडा, श्रावस्ती) की पुरातात्विक बसावट
- सिक्कों का इतिहास, विनिमय और प्रसार
- गुजरात के संरक्षित स्मारक और संरक्षण चुनौतियां
- सिरपुर, कोणार्क की मूर्तिकला और अधूरा स्थापत्य
- सैल्वेज ऑपरेशन (आपातकालीन पुरातत्व संरक्षण)
विशेषज्ञों की लंबी सूची देगी व्याख्यान
कार्यक्रम में पद्मश्री डॉ. नारायण व्यास, डॉ. अनिल कुमार, इंदु प्रकाश, डॉ. राजेंद्र यादव, डॉ. नीरज राय, डॉ. नरेंद्र परमार, डॉ. विजय माथुर, डॉ. दुर्गेश कुमार श्रीवास्तव, साधना व्यास, डॉ. विनय कुमार सिंह, डॉ. पंकज शर्मा, डॉ. प्रवीण कुमार मिश्रा, डॉ. राजीव द्विवेदी और पद्मश्री डॉ. बी.आर. मणि सहित कई जाने-माने विशेषज्ञ अपने विचार साझा करेंगे।
