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वाराणसी में खतरे के निशान की ओर बढ़ रही गंगा, घाटों से लगे निचले इलाकों में जलभराव

वाराणसी
  • By Kanhwizz Times
  • Reported By: Kritika pandey
  • Updated: September 9, 2025

कैनविज टाइम्स, डिजिटल डेस्क ।

उत्तर प्रदेश के वाराणसी में गंगा के जलस्तर में लगातार वृद्धि हो रही है। केंद्रीय जल आयोग के अनुसार गंगा का जलस्तर चेतावनी बिंदु 70.262 मीटर को पार कर मंगलवार सुबह आठ बजे तक 70.71 मीटर पर पहुंच गया। जलस्तर में लगभग एक सेंटीमीटर प्रति घंटे की दर से बढ़ोतरी हो रही है। लहरें खतरे के निशान 71.26 मीटर की ओर बढ़ रही है। इस मानसून सीजन में यह तीसरी बार है जब गंगा चेतावनी बिंदु को पार कर खतरे के निशान की ओर बढ़ रही है। लगातार बढ़ते जलस्तर से गंगा के तटवर्ती इलाकों के निवासियों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। घाटों से लगे निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति है। इससे लोगों को रोजमर्रा की गतिविधियों में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। बाढ़ से अस्सी घाट से लेकर नमो घाट तक सभी 86 घाटों का संपर्क आपस में कट गया है। एक घाट से दूसरे घाट पर जाना कठिन हो गया है। दशाश्वमेध घाट पर होने वाली विश्व प्रसिद्ध गंगा आरती आयोजक गंगा सेवा निधि की छत पर हो रही है। केदार घाट, अस्सी, भैसासुर घाट आदि पर होने वाली गंगा आरती का स्थान बदल गया है। सांकेतिक रूप से मां गंगा की आरती की जा रही है। मोक्षस्थली मणिकर्णिका घाट पर जलस्तर बढ़ने से शवदाह की प्रक्रिया प्रभावित हो रही है। निचले प्लेटफॉर्म डूब जाने के कारण अब छतों (उपरी प्लेटफॉर्म) पर अंतिम संस्कार किया जा रहा है। हरिश्चंद्र घाट की गलियों में भी शवदाह की नौबत आ गई है। दशाश्वमेध घाट पर जल पुलिस का कार्यालय पानी में डूब चुका है, जबकि अस्सी घाट पर जलधारा सड़क तक पहुंच गई है। गंगा के बढ़ते जलस्तर के कारण वरुणा नदी में पलट प्रवाह शुरू हो गया है, जिससे उसका पानी अब आबादी वाले इलाकों में घुस गया है। पुरानापुल क्षेत्र के पुलकोहना में नक्खी घाट पर दर्जनों मकान जलमग्न हो चुके हैं। ढेलवरिया, कोनिया, सरैंया, हुकुलगंज, पिपरहवा घाट जैसे क्षेत्रों में भी बाढ़ का पानी घरों तक पहुंच चुका है। स्थिति को देखते हुए जिला प्रशासन ने एक बार फिर बाढ़ राहत शिविरों को सक्रिय कर दिया है। एनडीआरएफ की टीमें मौके पर तैनात हैं और बाढ़ प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के प्रयास जारी हैं। एनडीआरएफ की टीम भी सतर्क है। जिन इलाकों में पहले ही पानी भर चुका है, वहां लोगों ने अस्थायी शिविरों और ऊंचे स्थानों पर शरण ले ली है। तटवर्ती क्षेत्रों में रहने वाले लोग सुरक्षित स्थानों की तलाश में जुट गए हैं। जिला प्रशासन ने भी स्थिति की गंभीरता को देखते हुए आवश्यक कदम उठाना शुरू कर दिया है।

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