आंचलिक विज्ञान केंद्र में विद्यार्थियों की अधिकतम सहभागिता हेतु चार प्रांतों की राज्य स्तरीय संवेदीकरण बैठक संपन्न
लखनऊ। विज्ञान के प्रति विद्यार्थियों में रुचि, वैज्ञानिक दृष्टिकोण, जिज्ञासा एवं भारतीय वैज्ञानिक विरासत के प्रति गौरव की भावना विकसित करने के उद्देश्य से विद्यार्थी विज्ञान मंथन (VVM) के अंतर्गत अवध, ब्रह्मवर्त, गोरक्ष एवं काशी प्रांतों के राज्य एवं जिला समन्वयकों की संवेदीकरण बैठक का आयोजन बुधवार को रीजनल साइंस सिटी, लखनऊ में किया गया।
बैठक में चारों प्रांतों के राज्य एवं जिला समन्वयकों के साथ विद्यालयों के प्रधानाचार्य, विद्यालय समन्वयक एवं सक्रिय विज्ञान शिक्षक उपस्थित रहे।
मुख्य अतिथि डॉ. शिव कुमार शर्मा का उद्बोधन
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ. शिव कुमार शर्मा, राष्ट्रीय संगठन मंत्री, विज्ञान भारती ने अपने उद्बोधन में कहा कि विद्यार्थी विज्ञान मंथन केवल एक प्रतियोगी परीक्षा नहीं, बल्कि भारत की वैज्ञानिक चेतना को नई पीढ़ी तक पहुँचाने वाला एक व्यापक राष्ट्रीय अभियान है।
उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों में वैज्ञानिक सोच विकसित करना केवल विद्यालय की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज के प्रत्येक जागरूक व्यक्ति का दायित्व है। भारत की प्राचीन वैज्ञानिक परंपरा से लेकर आधुनिक भारत के वैज्ञानिकों की उपलब्धियों तक विद्यार्थियों को अपनी समृद्ध वैज्ञानिक विरासत से परिचित कराने की आवश्यकता है।
विद्यार्थी विज्ञान मंथन विद्यार्थियों को प्रश्न पूछने, तर्क करने, प्रयोग करने और समस्याओं के वैज्ञानिक समाधान खोजने के लिए प्रेरित करता है। डॉ. शर्मा ने सभी राज्य एवं जिला समन्वयकों तथा शिक्षकों का आह्वान करते हुए कहा कि हमारा लक्ष्य केवल पंजीकरण संख्या बढ़ाना नहीं, बल्कि प्रत्येक विद्यालय में विज्ञान के प्रति सकारात्मक वातावरण और वैज्ञानिक संस्कार का निर्माण करना होना चाहिए। उन्होंने विद्यालय-स्तर तक सशक्त संपर्क एवं समन्वय स्थापित करने तथा अधिकाधिक विद्यार्थियों को VVM से जोड़ने पर विशेष बल दिया।
समन्वय शृंखला मजबूत करने पर जोर
क्षेत्रीय संगठन मंत्री, विज्ञान भारती, उत्तर प्रदेश (पूर्वी) अंकित राय ने कहा कि VVM की सफलता का आधार उसकी मजबूत समन्वय शृंखला — राज्य से प्रांत, प्रांत से जिला और जिला से विद्यालय स्तर तक है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक समन्वयक को अपने क्षेत्र की वर्तमान स्थिति का आकलन करते हुए स्पष्ट लक्ष्य निर्धारित करने चाहिए।
इस अवसर पर विशेष रूप से प्रधानाचार्य संपर्क अभियान, विद्यालय भ्रमण, शिक्षक एवं छात्र ओरिएंटेशन, डिजिटल एवं सोशल मीडिया अभियान तथा सक्रिय WhatsApp नेटवर्क को मजबूत बनाने का आह्वान किया गया। उन्होंने कहा कि जहाँ नियमित संपर्क, स्पष्ट लक्ष्य और टीम भावना के साथ कार्य होता है, वहाँ संगठन की पहुँच और प्रभाव दोनों तेजी से बढ़ते हैं।
वैज्ञानिक दृष्टिकोण बने व्यक्तित्व निर्माण का आधार
डॉ. रजनीश चतुर्वेदी, महासचिव, विज्ञान भारती अवध प्रांत एवं मुख्य वैज्ञानिक, CSIR-IITR ने कहा कि आज के समय में वैज्ञानिक दृष्टिकोण का विकास विद्यार्थियों के समग्र व्यक्तित्व निर्माण का महत्वपूर्ण आधार है। विज्ञान को केवल पाठ्यपुस्तक और परीक्षा तक सीमित न रखकर उसे विद्यार्थियों के दैनिक जीवन, समाज और राष्ट्र निर्माण से जोड़ना आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि एक विद्यार्थी में वैज्ञानिक दृष्टिकोण का विकास भविष्य के एक जिम्मेदार नागरिक और नवाचारी भारत की नींव रख सकता है।
शिक्षक हैं विद्यार्थी और विज्ञान के बीच सेतु
डॉ. मयूरी दत्त, प्रतिनिधि, शिक्षा शिल्पी ने कहा कि विद्यार्थियों को विज्ञान से जोड़ने के लिए उनके भीतर जिज्ञासा और सीखने की स्वाभाविक प्रवृत्ति को प्रोत्साहित करना आवश्यक है। उन्होंने शिक्षक को विद्यार्थी और विज्ञान के बीच महत्वपूर्ण सेतु बताते हुए कहा कि यदि शिक्षक स्वयं विज्ञान के प्रति उत्साह और सकारात्मक दृष्टिकोण प्रदर्शित करें, तो विद्यार्थी अधिक प्रभावी ढंग से विज्ञान से जुड़ते हैं।
विज्ञान आंचलिक विज्ञान केंद्र में विद्यार्थियों की अधिकतम सहभागिता हेतु चार प्रांतों की राज्य स्तरीय संवेदीकरण बैठक संपन्न
लखनऊ। विज्ञान के प्रति विद्यार्थियों में रुचि, वैज्ञानिक दृष्टिकोण, जिज्ञासा एवं भारतीय वैज्ञानिक विरासत के प्रति गौरव की भावना विकसित करने के उद्देश्य से विद्यार्थी विज्ञान मंथन (VVM) के अंतर्गत अवध, ब्रह्मवर्त, गोरक्ष एवं काशी प्रांतों के राज्य एवं जिला समन्वयकों की संवेदीकरण बैठक का आयोजन बुधवार को रीजनल साइंस सिटी, लखनऊ में किया गया।
बैठक में चारों प्रांतों के राज्य एवं जिला समन्वयकों के साथ विद्यालयों के प्रधानाचार्य, विद्यालय समन्वयक एवं सक्रिय विज्ञान शिक्षक उपस्थित रहे।
मुख्य अतिथि डॉ. शिव कुमार शर्मा का उद्बोधन
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ. शिव कुमार शर्मा, राष्ट्रीय संगठन मंत्री, विज्ञान भारती ने अपने उद्बोधन में कहा कि विद्यार्थी विज्ञान मंथन केवल एक प्रतियोगी परीक्षा नहीं, बल्कि भारत की वैज्ञानिक चेतना को नई पीढ़ी तक पहुँचाने वाला एक व्यापक राष्ट्रीय अभियान है।
उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों में वैज्ञानिक सोच विकसित करना केवल विद्यालय की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज के प्रत्येक जागरूक व्यक्ति का दायित्व है। भारत की प्राचीन वैज्ञानिक परंपरा से लेकर आधुनिक भारत के वैज्ञानिकों की उपलब्धियों तक विद्यार्थियों को अपनी समृद्ध वैज्ञानिक विरासत से परिचित कराने की आवश्यकता है।
विद्यार्थी विज्ञान मंथन विद्यार्थियों को प्रश्न पूछने, तर्क करने, प्रयोग करने और समस्याओं के वैज्ञानिक समाधान खोजने के लिए प्रेरित करता है। डॉ. शर्मा ने सभी राज्य एवं जिला समन्वयकों तथा शिक्षकों का आह्वान करते हुए कहा कि हमारा लक्ष्य केवल पंजीकरण संख्या बढ़ाना नहीं, बल्कि प्रत्येक विद्यालय में विज्ञान के प्रति सकारात्मक वातावरण और वैज्ञानिक संस्कार का निर्माण करना होना चाहिए। उन्होंने विद्यालय-स्तर तक सशक्त संपर्क एवं समन्वय स्थापित करने तथा अधिकाधिक विद्यार्थियों को VVM से जोड़ने पर विशेष बल दिया।
समन्वय शृंखला मजबूत करने पर जोर
क्षेत्रीय संगठन मंत्री, विज्ञान भारती, उत्तर प्रदेश (पूर्वी) अंकित राय ने कहा कि VVM की सफलता का आधार उसकी मजबूत समन्वय शृंखला — राज्य से प्रांत, प्रांत से जिला और जिला से विद्यालय स्तर तक है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक समन्वयक को अपने क्षेत्र की वर्तमान स्थिति का आकलन करते हुए स्पष्ट लक्ष्य निर्धारित करने चाहिए।
इस अवसर पर विशेष रूप से प्रधानाचार्य संपर्क अभियान, विद्यालय भ्रमण, शिक्षक एवं छात्र ओरिएंटेशन, डिजिटल एवं सोशल मीडिया अभियान तथा सक्रिय WhatsApp नेटवर्क को मजबूत बनाने का आह्वान किया गया। उन्होंने कहा कि जहाँ नियमित संपर्क, स्पष्ट लक्ष्य और टीम भावना के साथ कार्य होता है, वहाँ संगठन की पहुँच और प्रभाव दोनों तेजी से बढ़ते हैं।
वैज्ञानिक दृष्टिकोण बने व्यक्तित्व निर्माण का आधार
डॉ. रजनीश चतुर्वेदी, महासचिव, विज्ञान भारती अवध प्रांत एवं मुख्य वैज्ञानिक, CSIR-IITR ने कहा कि आज के समय में वैज्ञानिक दृष्टिकोण का विकास विद्यार्थियों के समग्र व्यक्तित्व निर्माण का महत्वपूर्ण आधार है। विज्ञान को केवल पाठ्यपुस्तक और परीक्षा तक सीमित न रखकर उसे विद्यार्थियों के दैनिक जीवन, समाज और राष्ट्र निर्माण से जोड़ना आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि एक विद्यार्थी में वैज्ञानिक दृष्टिकोण का विकास भविष्य के एक जिम्मेदार नागरिक और नवाचारी भारत की नींव रख सकता है।
शिक्षक हैं विद्यार्थी और विज्ञान के बीच सेतु
डॉ. मयूरी दत्त, प्रतिनिधि, शिक्षा शिल्पी ने कहा कि विद्यार्थियों को विज्ञान से जोड़ने के लिए उनके भीतर जिज्ञासा और सीखने की स्वाभाविक प्रवृत्ति को प्रोत्साहित करना आवश्यक है। उन्होंने शिक्षक को विद्यार्थी और विज्ञान के बीच महत्वपूर्ण सेतु बताते हुए कहा कि यदि शिक्षक स्वयं विज्ञान के प्रति उत्साह और सकारात्मक दृष्टिकोण प्रदर्शित करें, तो विद्यार्थी अधिक प्रभावी ढंग से विज्ञान से जुड़ते हैं।
विज्ञान केंद्र और विद्यालयों के बीच मजबूत संपर्क जरूरी
इस मौके पर स्वरूप मंडल, केंद्र प्रमुख एवं क्यूरेटर 'E', रीजनल साइंस सिटी ने कार्यक्रम की सराहना करते हुए कहा कि विज्ञान केंद्रों और विद्यालयों के बीच मजबूत संपर्क विद्यार्थियों में विज्ञान के प्रति रुचि विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। उन्होंने कहा कि विज्ञान को देखने, समझने और अनुभव करने के अवसर विद्यार्थियों की जिज्ञासा को नई दिशा देते हैं।
हर विद्यालय तक पहुँचना सामूहिक लक्ष्य
कार्यक्रम की आयोजक शर्मिला सिंह, जोनल कोऑर्डिनेटर, विद्यार्थी विज्ञान मंथन, उत्तर प्रदेश (पूर्वी) ने कहा कि संगठन को व्यापक जनभागीदारी का अभियान बनाने के लिए सभी प्रांतों एवं जिलों के समन्वयकों को टीम भावना के साथ कार्य करना होगा। उन्होंने कहा कि हर विद्यालय तक पहुँचना और हर इच्छुक विद्यार्थी को VVM से जोड़ना हमारा सामूहिक लक्ष्य है। उन्होंने कार्यक्रम में उपस्थित सभी अतिथियों, राज्य एवं जिला समन्वयकों, प्रधानाचार्यों, विद्यालय समन्वयकों एवं विज्ञान शिक्षकों के प्रति आभार व्यक्त किया।आंचलिक विज्ञान केंद्र में विद्यार्थियों की अधिकतम सहभागिता हेतु चार प्रांतों की राज्य स्तरीय संवेदीकरण बैठक संपन्न
लखनऊ। विज्ञान के प्रति विद्यार्थियों में रुचि, वैज्ञानिक दृष्टिकोण, जिज्ञासा एवं भारतीय वैज्ञानिक विरासत के प्रति गौरव की भावना विकसित करने के उद्देश्य से विद्यार्थी विज्ञान मंथन (VVM) के अंतर्गत अवध, ब्रह्मवर्त, गोरक्ष एवं काशी प्रांतों के राज्य एवं जिला समन्वयकों की संवेदीकरण बैठक का आयोजन बुधवार को रीजनल साइंस सिटी, लखनऊ में किया गया।
बैठक में चारों प्रांतों के राज्य एवं जिला समन्वयकों के साथ विद्यालयों के प्रधानाचार्य, विद्यालय समन्वयक एवं सक्रिय विज्ञान शिक्षक उपस्थित रहे।
मुख्य अतिथि डॉ. शिव कुमार शर्मा का उद्बोधन
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ. शिव कुमार शर्मा, राष्ट्रीय संगठन मंत्री, विज्ञान भारती ने अपने उद्बोधन में कहा कि विद्यार्थी विज्ञान मंथन केवल एक प्रतियोगी परीक्षा नहीं, बल्कि भारत की वैज्ञानिक चेतना को नई पीढ़ी तक पहुँचाने वाला एक व्यापक राष्ट्रीय अभियान है।
उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों में वैज्ञानिक सोच विकसित करना केवल विद्यालय की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज के प्रत्येक जागरूक व्यक्ति का दायित्व है। भारत की प्राचीन वैज्ञानिक परंपरा से लेकर आधुनिक भारत के वैज्ञानिकों की उपलब्धियों तक विद्यार्थियों को अपनी समृद्ध वैज्ञानिक विरासत से परिचित कराने की आवश्यकता है।
विद्यार्थी विज्ञान मंथन विद्यार्थियों को प्रश्न पूछने, तर्क करने, प्रयोग करने और समस्याओं के वैज्ञानिक समाधान खोजने के लिए प्रेरित करता है। डॉ. शर्मा ने सभी राज्य एवं जिला समन्वयकों तथा शिक्षकों का आह्वान करते हुए कहा कि हमारा लक्ष्य केवल पंजीकरण संख्या बढ़ाना नहीं, बल्कि प्रत्येक विद्यालय में विज्ञान के प्रति सकारात्मक वातावरण और वैज्ञानिक संस्कार का निर्माण करना होना चाहिए। उन्होंने विद्यालय-स्तर तक सशक्त संपर्क एवं समन्वय स्थापित करने तथा अधिकाधिक विद्यार्थियों को VVM से जोड़ने पर विशेष बल दिया।
समन्वय शृंखला मजबूत करने पर जोर
क्षेत्रीय संगठन मंत्री, विज्ञान भारती, उत्तर प्रदेश (पूर्वी) अंकित राय ने कहा कि VVM की सफलता का आधार उसकी मजबूत समन्वय शृंखला — राज्य से प्रांत, प्रांत से जिला और जिला से विद्यालय स्तर तक है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक समन्वयक को अपने क्षेत्र की वर्तमान स्थिति का आकलन करते हुए स्पष्ट लक्ष्य निर्धारित करने चाहिए।
इस अवसर पर विशेष रूप से प्रधानाचार्य संपर्क अभियान, विद्यालय भ्रमण, शिक्षक एवं छात्र ओरिएंटेशन, डिजिटल एवं सोशल मीडिया अभियान तथा सक्रिय WhatsApp नेटवर्क को मजबूत बनाने का आह्वान किया गया। उन्होंने कहा कि जहाँ नियमित संपर्क, स्पष्ट लक्ष्य और टीम भावना के साथ कार्य होता है, वहाँ संगठन की पहुँच और प्रभाव दोनों तेजी से बढ़ते हैं।
वैज्ञानिक दृष्टिकोण बने व्यक्तित्व निर्माण का आधार
डॉ. रजनीश चतुर्वेदी, महासचिव, विज्ञान भारती अवध प्रांत एवं मुख्य वैज्ञानिक, CSIR-IITR ने कहा कि आज के समय में वैज्ञानिक दृष्टिकोण का विकास विद्यार्थियों के समग्र व्यक्तित्व निर्माण का महत्वपूर्ण आधार है। विज्ञान को केवल पाठ्यपुस्तक और परीक्षा तक सीमित न रखकर उसे विद्यार्थियों के दैनिक जीवन, समाज और राष्ट्र निर्माण से जोड़ना आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि एक विद्यार्थी में वैज्ञानिक दृष्टिकोण का विकास भविष्य के एक जिम्मेदार नागरिक और नवाचारी भारत की नींव रख सकता है।
शिक्षक हैं विद्यार्थी और विज्ञान के बीच सेतु
डॉ. मयूरी दत्त, प्रतिनिधि, शिक्षा शिल्पी ने कहा कि विद्यार्थियों को विज्ञान से जोड़ने के लिए उनके भीतर जिज्ञासा और सीखने की स्वाभाविक प्रवृत्ति को प्रोत्साहित करना आवश्यक है। उन्होंने शिक्षक को विद्यार्थी और विज्ञान के बीच महत्वपूर्ण सेतु बताते हुए कहा कि यदि शिक्षक स्वयं विज्ञान के प्रति उत्साह और सकारात्मक दृष्टिकोण प्रदर्शित करें, तो विद्यार्थी अधिक प्रभावी ढंग से विज्ञान से जुड़ते हैं।
विज्ञान केंद्र और विद्यालयों के बीच मजबूत संपर्क जरूरी
इस मौके पर स्वरूप मंडल, केंद्र प्रमुख एवं क्यूरेटर 'E', रीजनल साइंस सिटी ने कार्यक्रम की सराहना करते हुए कहा कि विज्ञान केंद्रों और विद्यालयों के बीच मजबूत संपर्क विद्यार्थियों में विज्ञान के प्रति रुचि विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। उन्होंने कहा कि विज्ञान को देखने, समझने और अनुभव करने के अवसर विद्यार्थियों की जिज्ञासा को नई दिशा देते हैं।
हर विद्यालय तक पहुँचना सामूहिक लक्ष्य
कार्यक्रम की आयोजक शर्मिला सिंह, जोनल कोऑर्डिनेटर, विद्यार्थी विज्ञान मंथन, उत्तर प्रदेश (पूर्वी) ने कहा कि संगठन को व्यापक जनभागीदारी का अभियान बनाने के लिए सभी प्रांतों एवं जिलों के समन्वयकों को टीम भावना के साथ कार्य करना होगा। उन्होंने कहा कि हर विद्यालय तक पहुँचना और हर इच्छुक विद्यार्थी को VVM से जोड़ना हमारा सामूहिक लक्ष्य है। उन्होंने कार्यक्रम में उपस्थित सभी अतिथियों, राज्य एवं जिला समन्वयकों, प्रधानाचार्यों, विद्यालय समन्वयकों एवं विज्ञान शिक्षकों के प्रति आभार व्यक्त किया।केंद्र और विद्यालयों के बीच मजबूत संपर्क जरूरी
इस मौके पर स्वरूप मंडल, केंद्र प्रमुख एवं क्यूरेटर 'E', रीजनल साइंस सिटी ने कार्यक्रम की सराहना करते हुए कहा कि विज्ञान केंद्रों और विद्यालयों के बीच मजबूत संपर्क विद्यार्थियों में विज्ञान के प्रति रुचि विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। उन्होंने कहा कि विज्ञान को देखने, समझने और अनुभव करने के अवसर विद्यार्थियों की जिज्ञासा को नई दिशा देते हैं।
हर विद्यालय तक पहुँचना सामूहिक लक्ष्य
कार्यक्रम की आयोजक शर्मिला सिंह, जोनल कोऑर्डिनेटर, विद्यार्थी विज्ञान मंथन, उत्तर प्रदेश (पूर्वी) ने कहा कि संगठन को व्यापक जनभागीदारी का अभियान बनाने के लिए सभी प्रांतों एवं जिलों के समन्वयकों को टीम भावना के साथ कार्य करना होगा। उन्होंने कहा कि हर विद्यालय तक पहुँचना और हर इच्छुक विद्यार्थी को VVM से जोड़ना हमारा सामूहिक लक्ष्य है। उन्होंने कार्यक्रम में उपस्थित सभी अतिथियों, राज्य एवं जिला समन्वयकों, प्रधानाचार्यों, विद्यालय समन्वयकों एवं विज्ञान शिक्षकों के प्रति आभार व्यक्त किया।
